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एक 'आतंकी' की कहानी जिसे अशोक चक्र से नवाजा गया, जानिए क्यों

कश्मीर के शोपियां में पिछले साल नवंबर में आतंकवाद रोधी अभियान के दौरान अपनी जान कुर्बान करने वाले लांस नायक नजीर अहमद वानी को अशोक चक्र प्रदान किया जाएगा

Updated On: Jan 29, 2019 12:43 PM IST

FP Staff

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एक 'आतंकी' की कहानी जिसे अशोक चक्र से नवाजा गया, जानिए क्यों

इस बार गणतंत्र दिवस पर पिछले साल कश्मीर में शहीद हुए लांस नायक नज़ीर अहमद वानी को मरणोपरांत अशोक च्रक से सम्मानित किया जाएगा. नज़ीर अहमद वानी ये सम्मान प्राप्त करने वाले पहले कश्मीरी होंगे.

कश्मीर के शोपियां में पिछले साल नवंबर में आतंकवाद रोधी अभियान के दौरान अपनी जान कुर्बान करने वाले लांस नायक नजीर अहमद वानी को अशोक चक्र प्रदान किया जाएगा. अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी. अशोक चक्र भारत का शांति के समय दिया जाने वाला सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है.

अधिकारियों ने बताया कि 38 साल के वानी कुलगाम के अश्मुजी के रहने वाले थे. उनके परिवार में उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं. वह 25 नवंबर को भीषण मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए थे. शोपियां में हुए इस मुठभेड़ में छह आतंकियों को मार गिराया गया था.

वानी को मुठभेड़ के दौरान गोली लगी थी. उन्हें प्राथमिक उपचार देकर 92 बेस हॉस्पिटल पहुंचाया गया था, लेकिन बाद में उनका निधन हो गया था.

शुरू में आतंकी रहे वानी बाद में हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौट आए थे. वह 2004 में कश्मीर के 162 टेरिटोरियल आर्मी बटालियन में शामिल हुए थे. अधिकारियों ने बताया कि वानी दक्षिण कश्मीर में कई आतंकवाद रोधी अभियानों में शामिल रहे.

वानी को आतंकवादियों से लड़ने में अदम्य साहस का परिचय देने के लिए एक बार 2007 में और पिछले साल अगस्त में सेना पदक भी दिया गया था. सेना में शामिल होने से पहले 90 के दशक में वानी इखवान नाम के एक आतंकवाद रोधी बल के लिए काम करते थे.

इस बल में पूर्व आतंकी शामिल थे, जो आंतकियों से लड़ते थे. हालांकि, वो आंतिकयों को कमजोर कर पाते थे लेकिन उनपर मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगे थे. इसके बाद 2004 में वानी ने भारतीय सेना जॉइन कर लिया था.

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