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31 मार्च करीब आ रही है, ऐसे बचाएं टैक्स

जानिए पांच ऐसे निवेश विकल्पों को जो सेक्शन 80 सी के तहत आते हैं

Updated On: Mar 18, 2017 05:41 PM IST

Bindisha Sarang

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31 मार्च करीब आ रही है, ऐसे बचाएं टैक्स

मौजूदा वित्त वर्ष 31 मार्च को खत्म हो रहा है, इसलिए टैक्स बचाने के लिए जरूरी इनवेस्टमेंट यानी निवेश करने के लिए कुछ ही दिन बचे हैं. ऐसे में, इस बात की काफी संभावना है कि आप आपाधापी में गलत जगह अपना पैसा लगा दें.

सेल्स एग्जीक्यूटिव्स को भी मार्च के महीने का इंतजार रहता है. उनके लिए यह ऐसे निवेश प्लान बेचने का सबसे अच्छा महीना होता है जो टैक्स बचाने में आपकी मदद करने से ज्यादा उन्हें ज्यादा फायदा पहुंचाते हैं. आप अपने निवेश को लेकर बिल्कुल सही फैसला करें और आपका वित्तीय जीवन आसान हो, इसके लिए चलिए आपको देते हैं कुछ खास टिप्स.

सबसे पहले नजर डालते हैं पांच ऐसे निवेश विकल्पों पर जो सेक्शन 80 सी के तहत आते हैं.

सेक्शन 80 सी निवेश: शुरू करने से पहले, एक बात दिमाग में रखिए कि कर्मचारी भविष्य निधि यानी ईपीएफ में जाने वाला आपका पैसा सेक्शन 80सी कटौती के एक बड़े हिस्से को कवर करेगा. इस सेक्शन के तहत होने वाली अधिकतम कटौती 1.5 लाख रुपए तक हो सकती है.

पब्लिक प्रोविडेंट फंड: आज के समय में यह टैक्स बचाने के लिए सबसे बढ़िया निवेश विकल्पों में से एक है. आप अपने स्थानीय डाकघर में एक पीपीएफ खाता खोल सकते हैं. यह खाता एसबीआई और उसकी सहायक बैंकों या फिर आईसीआईसीआई जैसी निजी क्षेत्र के बैकों में भी खोला जा सकता है.

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इसकी अवधि 15 साल होती है और यह लंबे समय के लिए बचत करने के लिहाज से बढ़िया रहता है. इसमें मिलने वाले ब्याज की दर हर साल बदलती रहती है. टैक्स बचाने के लिए यह सबसे अच्छे विकल्पों में से एक है क्योंकि मैच्योरिटी पर आपको जो राशि मिलती है, वह टैक्स फ्री होती है.

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जीवन बीमा प्रीमियम: खुद के लिए या पत्नी और बच्चों के लिए दिए गए प्रीमियम को भी टैक्स बचाने के विकल्पों में गिना जाता है. इसकी अवधि उस पॉलिसी के समय पर निर्भर करती है जो आपने चुनी है.

यहां पर मिलने वाला रिटर्न खासा कम है जो 5 से 6 प्रतिशत की रेंज में है. हालांकि मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम टैक्स फ्री होगी. इसलिए टैक्स बचाने के लिहाज से लोग इसकी तरफ खिंचते हैं. लेकिन इस चक्कर में कई लोग गलत पॉलिसी खरीद लेते हैं क्योंकि उनके दिमाग में सिर्फ टैक्स बचाने की बात रहती है.

हमेशा याद रखिए, बीमा इंसान इसलिए कराता है ताकि जोखिम के वक्त वह काम आ सके. इसलिए नहीं कि इससे टैक्स बचाने में मदद मिलेगी. अगर आप कोई जीवन बीमा पॉलिसी खरीदने के बारे में सोच रहे हैं तो हमारी सलाह है कि आप जीवन बीमा के तौर पर कोई टर्म प्लान खरीदें.

ईएलएसएस (इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम): टैक्स बचाने का यह विकल्प आपके पैसे को शेयर बाजार में पहुंचा देता है और यहां मिलने वाला रिटर्न बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है. यह बात ध्यान में रखिए कि यहां पैसा तीन साल की लॉक्ड-इन अवधि के लिए लगाया जाता है. यानी इससे पहले आप उसे निकाल नहीं सकते. यहां आपको जो भी लाभ मिलता है, वह टैक्स फ्री होता है. इसका इस्तेमाल लंबी अवधि वाले निवेश को सोच कर ही करें.

आम तौर पर आपको सिस्टमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान के जरिए ही ईएलएसएस में निवेश करना चाहिए, लेकिन चूंकि अब ज्यादा समय नहीं बचा है तो हमारी सलाह होगी कि इस साल आप ईएलएसएस में सिर्फ 20 हजार रुपए तक ही निवेश करें.

बाकी राशि को पीपीएफ और एनएससी जैसे सुरक्षित विकल्पों में लगाएं. कारण यह है कि बाजार में उठापटक के चलते आपको ऊंचे दामों पर यूनिट्स खरीदनी पड़ सकती हैं. अप्रैल से आप सिप रूट के जरिए ईएलएसएस में निवेश कर सकते हैं.

नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट: एनएससी में 8 प्रतिशत का रिटर्न मिलता है और फिलहाल यह 5 साल और 10 साल के दो मैच्योरिटी विकल्पों में मौजूद है. यह बात समझ लीजिए कि यह लंबी अवधि वाला निवेश है जिसमें आपको मिलने वाले रिटर्न पर अंतिम साल में ही टैक्स लगेगा. पीपीएफ के मुकाबले यह टैक्स बचाने के हिसाब से कम आकर्षक विकल्प है.

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सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम: यह विकल्प सिर्फ वरिष्ठ नागरिकों के लिए है. इसमें सालाना 8.5 प्रतिशत ब्याज मिलता है. यहां एक वित्त वर्ष में आप अधिकतम 15 लाख रुपए का निवेश कर सकते हैं.

ब्जाय हर तिमाही पर मिलता है. यह पांच साल वाला लॉक्ड इन निवेश विकल्प है जिसे बाद में आप तीन साल के लिए और बढ़ा सकते हैं. सिर्फ मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम पर आपकी श्रेणी के हिसाब से टैक्स लगेगा. यह आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प है क्योंकि आप उनकी तरफ से निवेश कर सकते हैं और इसमें पीपीएफ से भी अच्छा रिटर्न हासिल कर सकते हैं.

पांच साल का फिक्स्ड डिपोजिट: यहां पर लॉक्ड इन अवधि पांच साल है और मैच्योरिटी से पहले आप पैसा नहीं निकाल सकते हैं. यहां मिलने वाले ब्याज की दर बैंकों के हिसाब से अलग अलग है जो 6 से 8 प्रतिशत की रेंज में होती है.

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याद रखिए कि यहां जो भी ब्याज आप कमा रहे हैं वह पूरी तरह से टैक्स के दायरे में आता है और एक वित्त वर्ष में होने वाली आमदनी दस हजार से ज्यादा है तो फिर टीडीएस भी कटेगा. इसकी अच्छी बात यह है कि अगर आप ऑनलाइन बैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग इस्तेमाल करते हैं तो टैक्स बचाने वाला एफडी खाता खोलने में चंद ही सेकंड लगते हैं.

तो ये कुछ विकल्प हैं जो आप इस साल टैक्स बचाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. पढ़ते रहिए अगली बार हम आपके लिए लेकर आएंगे टैक्स बचाने के ऐसे विकल्प जो सेक्शन 80सी में नहीं पड़ते हैं. उनमें से ऐसे बहुत से विकल्प हैं जिनके बारे में फैसला लेते हुए आप गड़बड़ी कर सकते हैं.

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