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क्या वोटिंग से पहले EVM में होती है छेड़छाड़? सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब

लोकसभा चुनाव 2019 में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के इस्तेमाल से जुड़ी परेशानियों को लेकर विपक्षी दल काफी चिंतित नजर आ रहा है.

Updated On: Feb 04, 2019 06:33 PM IST

FP Staff

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क्या वोटिंग से पहले EVM में होती है छेड़छाड़? सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब

हाल के दिनों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को लेकर कई राजनीतिक दलों के जरिए सवालिया निशान खड़े किए जा चुके हैं. वहीं ईवीएम से जुड़े एक मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग से जवाब मांगा है.

सुप्रीम कोर्ट ने एक पत्रकार के जरिए दायर की गई याचिका पर चुनाव आयोग को 4 हफ्ते में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है. इस याचिका में कहा गया है कि चुनाव में इस्तेमाल होने वाली ईवीएम मशीनों की चेकिंग में मतदान से पहले निजी लोगों की दखल रहती है. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने याचिका के अंतिम निपटान के लिए 6 सप्ताह के बाद की तारीख तय की है.

वहीं लोकसभा चुनाव 2019 में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के इस्तेमाल से जुड़ी परेशानियों को लेकर विपक्षी दल काफी चिंतित नजर आ रहा है. इसी के चलते विपक्षी दलों ने बीते दिनों इसे लेकर आपस में बातचीत की और अपनी चिंताओं से चुनाव आयोग को अवगत कराने का फैसला किया. इस दौरान कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के साथ कथित छेडछाड़ के मुद्दे पर गहन चर्चा की.

हाल ही में मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा ने बैलेट पेपेर से चुनाव कराने की मांग से इनकार कर दिया. कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए बैलेट पेपर की तरफ लौटने की मांग की थी. जिस पर अरोड़ा ने कहा, 'हम बैलेट पेपर के युग में वापस नहीं जा रहे हैं. दो दशक से भी अधिक समय से हमारे देश में ईवीएम मशीन का इस्तेमाल हो रहा है और यह काफी समय से ईसीआई (भारत निर्वाचन आयोग) की एक सुसंगत नीति रही है और मुझे लगता है कि यह नीति जारी रहेगी.'

हाल ही में लंदन में हुए ईवीएम को हैक करने के डिमॉनस्ट्रेशन के दौरान एक अमेरिकी हैकर ने सनसनीखेज दावा किया था. इस दावे की वजह से हिंदुस्तान की सियासत में खलबली मच गई थी. अमेरिकी हैकर सैयद शुजा ने दावा किया था कि बीजेपी नेता गोपीनाथ मुंडे की 2014 में हत्या इसलिए हुई थी क्योंकि वह ईवीएम में होने वाली गड़बड़ी के बारे में जानते थे. सैयद शुजा ने यह भी दावा किया कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और गुजरात के चुनावों में धांधली हुई थी. हैकर ने कहा कि ईवीएम को ब्लूटूथ और वायरलैस फ्रीक्वेंसी पर हैक नहीं किया जा सकता लेकिन ईवीएम तक पहुंच होने पर उसे हैक किया जा सकता है. हालांकि चुनाव आयोग ने इसे खारिज कर दिया था.

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