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इंटरनल रिपोर्ट: नक्सलवाद का सिकुड़ता आधार...कारगर हो रही बहुआयामी रणनीति

सरकारी दावे के मुताबिक नक्सल प्रभावित इलाकों में सरकार की बहुआयामी रणनीति कारगर होती दिखाई पड़ रही है.

Updated On: Jul 24, 2018 08:42 AM IST

Pankaj Kumar Pankaj Kumar

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इंटरनल रिपोर्ट: नक्सलवाद का सिकुड़ता आधार...कारगर हो रही बहुआयामी रणनीति

नक्सल प्रभावित इलाकों में सरकार की बहुआयामी रणनीति कारगर होती दिखाई पड़ रही है. यहां पर सरकार की तमाम एजेंसियां और मंत्रालय बेहतरीन तालमेल बिठाकर नक्सलियों की कमर तोड़ने में जुट चुके हैं. सरकार के प्रयास नक्सली हिंसा को रोक पाने में काफी हद तक असरदार दिखाई पड़ रहे हैं. वामपंथी उग्रवाद का प्रभाव कभी 10 राज्यों के 126 जिलों में हुआ करता था वो अब 11 राज्यों के 90 जिलों में सिमटकर दम तोड़ने लगा है. केरल के 3 जिलों को सरकार ने नक्सल प्रभावित इलाकों में दूरगामी सोच के आधार पर रखा है ताकि इन्हें शुरुआती दौर में ही पैर फैलाने से रोका जा सके.

गृहमंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वामपंथी उग्रवाद वाले अतिप्रभावित जिलों की संख्या अब 35 से घटकर 30 हो गई है. इन्हीं 30 अतिप्रभावित वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में कुल नक्सली हिंसक वारदातों की 90 फीसदी घटनाएं घटी हैं और इन 30 जिलों में सरकार अपने संसाधनों का विशेष हिस्सा खर्च करेगी जिससे वामपंथी उग्रवाद से निपटने में कामयाबी मिल सके.

फ़र्स्टपोस्ट के हाथ लगी एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक साल 2011 से 2018 मई तक नक्सली वारदात और उसमें जान गंवा चुके लोगों की संख्या में खासी कमी आई है. 2010 में कुल 2213 हिंसक वारदातें हुईं जिनमें 1005 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा. वहीं 2017 में नक्सली वारदात की संख्या घटकर 908 हो गईं और इसमें जान गंवाने वालों की संख्या 263. खास बात यह है कि 31 मई 2018 तक जो संख्या दर्ज हुई है, वो 2017 में हुई वारदातों के लगभग बराबर है लेकिन इसमें मारे गए लोगों में 20 फीसदी कमी आई है. साल 1989 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब नक्सली वारदातों की संख्या 1000 के नीचे पहुंची.

वैसे वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिन दो राज्यों का नाम सबसे ऊपर आता है वो हैं छत्तीसगढ़ और झारखंड. इसके बाद ओडिशा, बिहार और महाराष्ट्र ऐसे राज्य हैं जहां प्रभाव धीरे-धीरे घटोत्तरी की ओर है. आंकड़ों के मुताबिक इन पांच राज्यों में 99.1 फीसदी मौतें और 96.6 फीसदी नक्सली वारदातें हुई हैं. जाहिर है सरकार के लिए इन पांच राज्यों में नक्सलियों से निपटना एक बड़ी चुनौती है लेकिन सरकार की बहुआयामी रणनीति कारगर असर दिखाने में कामयाब होने लगी है. कुछ दिनों पहले गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने बिहार में कहा भी था कि नक्सली आतंक के कुछ ही दिन शेष बचे हैं.

Rajnath Singh campaigns for Tripura assembly election campaign

छत्तीसगढ़ में कार्यरत स्पेशल डीजी दुर्गेश मोहन उपाध्याय कहते हैं, 'पिछले चार सालों में विकास के काफी काम हुए हैं. जिससे माहौल में गुणात्मक सुधार हुआ है. नक्सली कोर बेस एरिया में सुरक्षा बल जाने लगे हैं. इससे उनका बेस एरिया ध्वस्त होने लगा है.' दरअसल शहर की ओर बढ़ने की नक्सलियों की योजना फेल हुई है दूसरी तरफ जंगल में भी पहली बार उन्हें बेस इलाका छोड़ कर भागना पड़ा है.

कमजोर होते नक्सलवाद के पीछे सुरक्षा तंत्र का रोल

सुरक्षा तंत्र की मजबूती के लिए केन्द्रीय सशस्त्र बल की तैनाती के अलावा राज्यों की पुलिस को प्रशिक्षण सहायता, घने जंगलों में नक्सली आतंक की गतिविधियों पर पैनी नजर रखने के लिए हेलीकॉप्टर्स, इनमें मानव रहित हेलीकॉप्टर्स भी हैं, का विशेष प्रबंधन शामिल है. इतना ही नहीं केन्द्र सरकार राज्य सरकार के साथ खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान भी कर रही है, जिससे वामपंथी उग्रवाद पर नकेल कसने में कामयाबी मिल सके. इसके अलावा सुरक्षा तंत्र की मजबूती और कारगर क्षमता के लिए विशेष फंड का प्रावधान है जो विशेष राजस्व व्यय योजना (special Revenue expenditure scheme), एमपीएफ स्कीम ( Modernisation Of Police Force scheme) एसआईएस स्कीम (Special Infrastructure scheme ) के तहत दिया जा रहा है.

सरकार एक तरफ अपने पुलिस बल की मजबूती के लिए विशेष कदम उठा रही है. वहीं जमीनी स्तर पर विकास के कार्यक्रमों को लाकर सार्थक प्रयास कर रही है. वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों में सड़कों का जाल, मोबाइल टावर्स का लगाया जाना और बैंकों और डाकघरों के जरिए वित्तीय समावेषण (financial inclusion) प्रभावी कदम माना जा रहा है. विकास के इन कार्यक्रमों में अलग-अलग मंत्रालय विशेष योगदान दे रहे हैं.

विकास की योजनाएं

अति प्रभावित वामपंथी उग्रवाद जिलों में विद्युतिकरण का काम जोरों पर है. अब तक कुल 35 अतिप्रभावित नक्सल प्रभावित जिलों के 47 हजार 9 सौ 41 गांवों में से 26 हजार 2 सौ 46 गांवों में विद्युतिकरण हो चुका है. जाहिर है 55 फीसदी गांव में बिजली पहंच चुकी है और बाकी के बचे 21 हजार 695 गांवों में इसे जल्द से जल्द पहंचाए जाने की कवायद जारी है.

मिनिस्ट्री ऑफ न्यू और रिन्यूवेवल एनर्जी (MNRE) भी वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित इलाकों में अपना योगदान सकारात्मक तरीके से दे रही है. 2017-2018 में इस मंत्रालय ने 80 हजार 800 सोलर वाटर पंप का वितरण किया वहीं इसकी योजना मार्च 2019 तक 27 लाख 60 हजार 5 सौ 89 सोलर लैंप बांटने की है. इतना ही नहीं इन इलाकों में होम लाइट्स, स्ट्रीट लाइट्स से लेकर सोलर लैंप और स्टडी लैंप बांटे जाने की योजना है जिसमें कुल 1559 करोड़ की राशि खर्च की जाएगी. वैसे इस योजना की स्वीकृति डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी से मिलना बाकी है.

नक्सली साहित्य वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित इलाकों में पढ़ाकर उनकी बौद्धिक क्षमता पर प्रहार किया जाता है. सरकार राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत केन्द्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय खोलकर लोगों को शिक्षित करने का सराहनीय कदम उठा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक अति प्रभावित नक्सल प्रभावित जिलों में 7 केन्द्रीय विद्यालय और 6 जवाहर नवोदय विद्यालयों में पढ़ाई जारी है, जबकि 1 केन्द्रीय विद्यालय में पढ़ाई का काम नहीं चल पा रहा है. कुल 35 वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में 1590 स्कूल की स्वीकृति मिली है. जिनमें 1529 चल रहे हैं. वहीं 61 को क्रियाशील बनाया जाना बाकी है.

प्रतीकात्मक

प्रतीकात्मक

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत लड़कियों के लिए हॉस्टल का भी प्रावधान है. इनमें 203 हॉस्टल में लड़कियां रहती हैं. वहीं 146 को क्रियाशील बनाए जाने की योजना है. सर्व शिक्षा अभियान के तहत भी शिक्षा का प्रसार बदस्तूर जारी है. गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक 34 उग्रवाद प्रभावित जिलों में 349 कस्तूरबा गांधी विद्यालय हैं, जहां लड़कियों की पढ़ाई के साथ चहुंमुखी विकास पर ध्यान दिया जा रहा है.

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत वामपंथी उग्रवाद प्रभावित इलाकों में मिनिस्ट्री ऑफ स्किल डेवलपमेंट ने 16 इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खोले हैं, जिनमें 10 क्रियाशील हैं, वहीं 46 स्किल डेवलपमेंट सेंटर भी खोले गए हैं और 22 का खोला जाना बाकी है.

इतना ही नहीं वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों में आर्थिक प्रगति के लिए 454 नई बैंक शाखाएं और 1127 एटीएम 1 अप्रैल 2015 से लेकर 31 मार्च 2018 तक खोले गए हैं. पोस्ट ऑफिस को अपग्रेड कर बैंक बनाए जाने के लिए बजट का प्रावधान किया गया है. जिससे अति उग्रवाद प्रभावित इलाके में बैंकिंग प्रक्रिया सुचारू रूप से चलाई जा सके.

दूरसंचार मंत्रालय भी वामपंथी उग्रवाद प्रभावित इलाके में मोबाइल टावर्स लगाकर अपनी सहभागिता दिखाने में किसी से पीछे नहीं हैं. वैसे संचार के इस युग में फेज 1 का काम पूरा कर दिया गया है जिसके तहत वीसैट के बैंडविथ में 512 केबीपीएस से बढ़ाकर 2 एमबीपीएस कर दिया गया है. फेज 2 में 4 हजार 72 मोबाइल टावर लगाए जाने की योजना है जिसकी स्वीकृति कैबिनेट द्वारा दे दी गई है.

वहीं ग्रामीण विकास मंत्रालय इन इलाकों में 4135 किलोमीटर सड़क का निर्माण करा चुका है और सड़क और परिवहन मंत्रालय 7300 करोड़ की लागत से 4626 किलोमीटर सड़क का निर्माण कर चुका है... रेल मंत्रालय भी कोडरमा नवावडीह और हाजीपुर गोसवर लाइन को पूरा कर इसे क्रियाशील कर चुकी है. वहीं कई और बड़े प्रोजेक्ट पर काम जोरों से चल रहा है जिन्हें 2019 तक पूरा किए जाने की संभावना है.

झारखंड में कार्यरत एडीजी आर के मलिक कहते हैं, 'सरकार की बहुआयामी रणनीती कारगर साबित हो रही है....अब इंटेरियर इलाके तक पहंचना सुरक्षा बल के लिए आसान हो गया है... वहीं बड़े अधिकारियों की लगातार आवाजाही से मॉनिटरिंग बेहतर होने लगी है....नक्सलियों के अंदर पैसाखोरी और अन्य वजहों से काफी मतभेद उभर कर सामने आए हैं वहीं स्थानीय लोगों की सहभागिता कम हुई है.'

जाहिर है स्थानीय लोगों की सहभागिता कम होने और सुरक्षा तंत्र की मजबूती से वामपंथी उग्रवाद कमजोर दिखाई पड़ने लगा है. वैसे एडीजी आर के मलिक कहते हैं, ' वामपंथी उग्रवाद कमजोर जरूर हुआ है लेकिन इसे खत्म मान लेना जल्दबाजी होगा.' एडीजी आर के मलिक के अनुसार संपत्ति जब्त करने की कवायद भी नक्सल उग्रवाद की कमर तोड़ने में काफी सहायक हो रही है.

आर्थिक नाकेबंदी

नक्सलियों की कमर तोड़ने के लिए उनके फंडिंग के जरिए पर सरकार लगातार नजर बनाई हुई है. लेवी और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर कमाई गई राशि में एक बड़ा हिस्सा नक्सली नेता अपने परिवार और बच्चों के ऐशोआराम में खर्च करते पाए गए हैं. बिहार झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी के मेंबर प्रद्युमन शर्मा ने कैपिटेशन फीस के तौर पर 22 लाख रुपए एक मेडिकल कॉलेज को अपने बच्चे के दाखिले के लिए दिया है.

demonetisation

प्रतीकात्मक तस्वीर

वहीं दूसरे सदस्य संदीप यादव ने नोटबंदी के दरमियान 15 लाख रुपए बदलने के लिए भेजे थे. रिपोर्ट के मुताबिक सरकार इन पैसों से कमाई गई संपत्ति को अधिकृत करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है. प्रवर्तन निदेशालय इनकी काली कमाई के लिए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉडरिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज कर चुका है और उनके 1.5 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त भी कर चुका है.

बिहार और झारखंड में अनलॉफुल एक्टीवीटीज प्रिवेंशन एक्ट सेक्शन 25 के तहत 21एकड़ जमीन 13 कारें 2 जेसीबी.4 ट्रेक्टर 5 बाइक और पौने दो करोड़ कैश जब्त किए गए हैं. नोटबंदी के दरम्यान 1 करोड़ की राशि भी जब्त हुई है.

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