S M L

कहां से आया था बापू को हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने का विचार ?

हिंदी साहित्य समिति के मानस भवन के शिलान्यास के लिए बापू धोती छोड़, काठियावाड़ी वेशभूषा में पहुंचे थे

FP Staff Updated On: Sep 14, 2017 04:01 PM IST

0
कहां से आया था बापू को हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने का विचार ?

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साथ इंदौर शहर की भी ऐतिहासिक यादें जुड़ी हुई हैं. इंदौर ही वो शहर था जहां महात्मा गांधी के मन में हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाए जाने का विचार पहली बार आया था.

इंदौर में महात्मा गांधी पहली बार 29 मार्च 1918 में हिंदी साहित्य समिति के मानस भवन का शिलान्यास और दूसरी बार 20 अप्रैल 1935 में इसी भवन का उद्घाटन करने आए थे. भवन के उद्घाटन के लिए पहुंचे बापू ने इंदौर के नेहरू पार्क में बैठकर ही सबसे पहले हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने का विचार आया था.

हिंदी को राष्ट्रभाषा

महात्मा गांधी पहली बार 1918 में इंदौर पहुंचे थे. उस समय शहर में हिंदी भाषा को लेकर एक बड़ी बैठक होने वाली थी. उन्होंने उस सभा में हिस्सा लेकर उसे आधिकारिक बनाया था. राष्ट्रपिता दूसरी बार 1935 में इंदौर आए थे. इस बार वे हिंदी सभा की अध्यक्षता करने पहुंचे थे. दक्षिण भारत से भी हिंदी भाषा को लेकर मिल रही काफी शानदार प्रतिक्रिया के कारण उन्होंने हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने की मुहिम शुरू की थी.

काठियावाड़ी वेशभूषा में आए थे बापू

बापू को यूं तो हमेशा ही सबने उनकी खादी की धोती में देखा था पर जब वो 20 अप्रैल 1935 को हिंदी साहित्य समिति के मानस भवन के शिलान्यास के लिए इंदौर आए, तो उन्होंने काठियावाड़ी वेशभूषा पहनी थी. इस दौरान उनकी काठियावाड़ी पगड़ी आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी.

1935 में महात्मा गांधी इंदौर में 20 से 23 अप्रैल तक ठहरे थे. इस दौरान समिति का 24वां हिंदी साहित्य सम्मेलन हुआ था जिसमें गांधीजी सभापति थे. उस वक्त के बिस्को पार्क (नेहरू पार्क) में आयोजित सम्मेलन में उन्होंने फिर राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी की पैरवी की थी.

(साभार न्यूज 18)

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
SACRED GAMES: Anurag Kashyap और Nawazuddin Siddiqui से खास बातचीत

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi