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रेलवे ला सकता है संशोधित फ्लेक्सी किराया स्कीम, अब किया ये बड़ा फैसला

बाद में जब थर्ड एसी वाली 'हमसफर' प्रीमियम ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ तो रेलवे ने इसमें फ्लेक्सी फेयर का नया प्रारूप पेश किया था

Updated On: Sep 14, 2018 10:11 AM IST

FP Staff

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रेलवे ला सकता है संशोधित फ्लेक्सी किराया स्कीम, अब किया ये बड़ा फैसला
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भारतीय रेलवे की फ्लेक्सी किराया स्कीम में जल्द ही संशोधन हो सकता है. रेल मंत्रालय ने अब इस बारे में फैसला कर लिया है. जल्द ही इसका ऐलान कर दिया जाएगा. सूत्रों की मानें तो संशोधित स्कीम में कुछ कम लोकप्रिय प्रीमियम ट्रेनों को स्कीम से पूरी तरह से हटा दिया जाएगा जबकि अधिक लोकप्रिय प्रीमियम ट्रेनों में स्कीम को 'हमसफर' की तर्ज पर लागू किया जाएगा.

9 सितंबर 2016 से शुरू हुई थी स्कीम

फ्लेक्सी किराया स्कीम 9 सितंबर, 2016 से राजधानी, शताब्दी और दूरंतो ट्रेनों में लागू की गई थी. इसमें शुरू की दस प्रतिशत बर्थ/सीट सामान्य किराए पर दी जाती हैं जबकि उसके बाद प्रत्येक 10 प्रतिशत बर्थ/सीट के लिए 10 फीसदी अतिरिक्त किराया वसूला जाता है जो बढ़ते-बढ़ते अधिकतम 50 प्रतिशत तक हो जाता है. इस तरह आखिरी 10 प्रतिशत बर्थ/सीटों के लिए डेढ़ गुना किराया भी देना पड़ता है. यब स्कीम लॉन् होने के बाद से ही लगातार लोगों की आलोचनाओं का शिकार हो रही थी. यही वजह है कि बाद में जब थर्ड एसी वाली 'हमसफर' प्रीमियम ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ तो रेलवे ने इसमें फ्लेक्सी फेयर का नया प्रारूप पेश किया था. इसके अंतर्गत शुरू की 50 फीसदी बर्थ/सीट (तत्काल कोटा छोड़कर) सामान्य से 15 फीसदी अधिक किराए पर जबकि बाद की 50 फीसदी बर्थ/सीटें 10-10 प्रतिशत के अंतराल पर किराए में बढ़ोतरी के साथ आवंटित की जाती हैं. हालांकि इस स्कीम को भी लोगों ने बिल्कुल पसंद नहीं किया. इसका कारण ये था कि इसमें अंतिम 10 फीसदी सीटों के लिए सामान्य थर्ड एसी के मुकाबले डेढ़ गुना से भी ज्यादा रकम वसूली जाती है.

कैग रिपोर्ट में सामने आई सच्चाई

शुरू में रेलवे ने फ्लेक्सी किराया स्कीम को बहुत कामयाब बताकर लोगों में इसका जमकर प्रचार किया था. सरकार का दावा था कि सितंबर 2016 से जून 2017 के दौरान स्कीम के फलस्वरूप रेलवे को 85 हजार अतिरिक्त यात्रियों से 540 करोड़ रुपए की अधिक आमदनी हुई है लेकिन पिछले महीने आई कैग की रिपोर्ट ने इन दावों को सबके सामने लाकर रख दिया.

कैग रिपोर्ट के मुताबिक 9 सितंबर 2016 से 31 जुलाई 2017 की अवधि में फ्लेक्सी किरायों के कारण रेलवे को प्रीमियम ट्रेनों में पहले के मुकाबले 7 लाख कम यात्री हासिल हुए हैं. स्कीम के लिए रेलवे की खिंचाई करते हुए कैग ने कहा था कि फ्लेक्सी किरायों के परिणामस्वरूप हवाई जहाज का सफर ट्रेन के मुकाबले सस्ता हो गया है. कैग की रिपोर्ट तो इस साल आई है, लेकिन रेलवे को अपनी भूल का एहसास पिछले वर्ष ही हो गया था. तभी तो उसने दिसंबर 2017 में स्कीम की समीक्षा के लिए एक समिति का गठन किया था, जिसने स्कीम में संशोधन की सिफारिश की थी, लेकिन इस पर फैसले को टाला जाता रहा. अब जबकि चुनावों की सुगबुगाहट तेज है, अचानक समिति की रिपोर्ट को लागू करने की तैयारियां शुरू हो गई हैं.

स्कीम की समीक्षा के लिए हुआ था समिति का गठन

दिसंबर 2017 में इस प्रीमियम स्कीम की समीक्षा के लिए एक समिति का गठन किया था जिसने स्कीम में संशोधन की सिफारिश की थी लेकिन इस पर फैसले को हमेशा से टाला जाता रहा है. अब जब चुनाव का समय नजदीक आ रहा है तो अचानक ही समिति की रिपोर्ट को लागू करने की तैयारियां शुरू हो गई हैं. सूत्रों के अनुसार रेलवे बोर्ड ने रिपोर्ट मंजूर कर रेलमंत्री पीयूष गोयल को भेज दी है और वह इस पर आम लोगों की राय ले रहे है. जल्द ही वह संशोधित फ्लेक्सी स्कीम की घोषणा कर सकते हैं.

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