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180 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ी बिना इंजन वाली ट्रेन-18, बनाया ये खास रिकॉर्ड

ट्रेन-18 ट्रायल के दौरान 180 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की स्पीड से दौड़ी और इस तरह यह देश की सबसे तेज दौड़ने वाली ट्रेन बन गई है, इस ट्रेन की अधिकतम स्पीड 220 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है

Updated On: Dec 03, 2018 10:44 AM IST

FP Staff

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180 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ी बिना इंजन वाली ट्रेन-18, बनाया ये खास रिकॉर्ड

भारतीय रेलवे की पहली बिना इंजन वाली ट्रेन ने स्पीड के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया है. ट्रेन-18 ट्रायल के दौरान 180 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की स्पीड से दौड़ी और इस तरह यह देश की सबसे तेज दौड़ने वाली ट्रेन बन गई है. इस ट्रेन की अधिकतम स्पीड 220 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है. इससे पहले भारतीय पटरियों पर टैल्गो ट्रेन 180 की स्पीड से दौड़ी थी, लेकिन वह स्पेन की ट्रेन थी. मौजूदा समय में भारत की सबसे तेज दौड़ने वाली ट्रेन गतिमान एक्सप्रेस दिल्ली से झांसी के बीच अधिकतम 160 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से सफर करती है.

स्पीड में भी ट्रेन में झटके नहीं लग रहे हैं

नेक्स्ट जेनरेशन की ट्रेन कही जा रही ट्रेन-18 का ट्रायल दिल्ली-मुंबई राजधानी रूट पर किया जा रहा है. शनिवार को ट्रायल के दौरान ट्रेन 170 किलोमीटर प्रति घंटे के स्पीड से दौड़ी, जबकि रविवार को इसने नया रिकॉर्ड बनाया. रेलमंत्री पीयूष गोयल ने एक विडियो शेयर करके बताया है कि इतनी स्पीड में भी ट्रेन में झटके नहीं लग रहे हैं. वीडियो में पानी के बोतलों को दिखाया गया है, जो काफी स्थिर हैं. उन्होंने लिखा, 'जोर स्पीड का झटका धीरे से लगा.'

 ट्रेन के निर्माण पर करीब 100 करोड़ रुपए का खर्च आया है

चेन्नई की इंटेग्रल कोच फैक्टरी में बनी यह ऐसी ट्रेन है, जिसे चलाने के लिए किसी इंजन की जरूरत नहीं होगी. जिस पहले कोच में ड्राइविंग सिस्टम लगा है, उसमें 44 सीटें भी हैं. ट्रेन पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत है. इसे विशेष रूप से बुलेट ट्रेन के मॉडल पर तैयार किया गया है. ट्रेन के निर्माण पर करीब 100 करोड़ रुपए का खर्च आया है, जिसे 18 महीने के समय में तैयार कराया गया है.

वातानुकूलित ट्रेन ‘सेल्फ प्रपल्शन मॉड्यूल’ से चलेगी

खास सेफ्टी सिस्टम की वजह से किसी दुर्घटना की स्थिति में कम से कम लोग घायल होंगे और मौत से भी लोग बचेंगे. इसमें बेहतर फायर प्रोटेक्शन सिस्टम भी लगाया गया है. वातानुकूलित ट्रेन ‘सेल्फ प्रपल्शन मॉड्यूल’ से चलेगी. ट्रेन की पांच और इकाइयों का निर्माण वर्ष 2019-20 के अंत तक आईसीएफ द्वारा किया जाना है.

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