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अस्पतालों को काबू में रखने के लिए नए गाइडलाइंस लाया IMA

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने डॉक्टर्स और अस्पतालों के लिए कुछ गाइडलाइंस और सुधार जारी की हैं. इसे आईएमए का हेल्थकेयर सेक्टर में क्राइसिस कंट्रोल माना जा रहा है

FP Staff Updated On: Dec 12, 2017 04:25 PM IST

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अस्पतालों को काबू में रखने के लिए नए गाइडलाइंस लाया IMA

बीते दिनों में अस्पतालों की लापरवाही के कई मामले सामने आने के बाद अब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने डॉक्टर्स और अस्पतालों के लिए कुछ गाइडलाइंस और सुधार जारी की हैं. इसे आईएमए का हेल्थकेयर सेक्टर में क्राइसिस कंट्रोल माना जा रहा है.

31 नियमों की इस लिस्ट में ओवर चार्जिंग, जरूरत से ज्यादा टेस्ट लिखना, मरीजों को बेड की उपलब्धता से लेकर हर सर्विस की सही कीमत की जानकारी देना, यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार ट्रांसजेंडर पॉलिसी लाना तक शामिल है.

आईएमए के प्रेसिडेंट केके अग्रवाल के मुताबिक, अस्पतालों की मुनाफाखोरी में बदलाव लाने की जरूरत है. ये नियम बिल्कुल नई तरह के नहीं हैं, लेकिन इनकी मदद से करप्शन और कदाचार को रोकने में मदद करेंगे. उनका कहना है कि कहीं न कहीं अस्पतालों की लापरवाही से सब नाराज है और इसके बाद लोगों की डॉक्टरों के बारे में अच्छी राय नहीं है. जिसमें बदलाव की जरूरत है.

मरीजों को हो जाएगी आसानी

इन गाइडलाइनों के जारी होने के बाद मरीजों को काफी आसानी होगी. इनके मुताबिक, अस्पतालों को मरीजों को बताना होगा कि उनकी तरफ से सुझाए गए टेस्ट मरीज के लिए क्यों जरूरी हैं, अस्पताल को बताना होगा कि किस वार्ड की सुविधा कितनी कीमत पर उपलब्ध हैं, जरूरतमंद मरीजों को सर्विस और सुविधाओं की जानकारी देने के लिए एक टीम होगी, डॉक्टरों को मरीज के इलाज में लगने अनुमानित रकम की जानकारी देनी होगी, डॉक्टर्स एक बार मरीजों को भर्ती करने के बाद उन्हें नजरअंदाज या दूसरे हॉस्पिटल में शिफ्ट करने को नहीं कर सकते. और इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों और डिवाइस डॉक्टरों को तय करना होगा, न कि अस्पताल प्रबंधन को.

सरकारों से भी अपील

आईएमए ने सभी अस्पतालों की बैठक बुलाई जिसमें सरकार से भी अपील की है कि एक दवा को दो रेट पर बेचने की अनुमति न मिले. डॉक्टरों को भी सलाह दी जा रही है कि वह मरीजों को जरूरी दवाएं लिखें. आईएमए ने केंद्र और राज्य सरकारों से इमरजेंसी रेस्पॉन्स की जिम्मेदारी लेने को कहा है. साथ ही उसका कहना है कि सरकारों को उन लोगों को महंगे इलाज का खर्च भी उठाना चाहिए, जो खुद का खर्च नहीं उठा पाते.

आईएमए का कहना है कि अगर इन गाइडलाइनों को कानूनी रूप से लागू किया जाए, तो प्राइवेट और पब्लिक हेल्थकेयर सेक्टर में बड़ा बदलाव आएगा.

दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के हड़ताल पर रोक

एक जिंदा बच्ची को मृत बताकर परिवार को सौंप देने के चलते दिल्ली के शालीमार बाग के मैक्स हॉस्पिटल का लाइसेंस दिल्ली सरकार ने रद्द कर दिया है, जिसके विरोध में दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने हड़ताल पर जाने की बात की थी. हालांकि, आईएमए ने बताया कि उसने डीएमए को यह कहकर हड़ताल न करने की सलाह दी कि एसोसिएशन लोगों का विश्वास नहीं खोना चाहता.

वैसे, आईएमए ये गाइडलाइंस ला सकता है, वो इसे कानूनी रूप से मेडिकल बॉडीज पर लागू नहीं कर सकता. इसलिए उसने इसके लिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और दिल्ली मेडिकल काउंसिल के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और दिल्ली सरकार को पत्र लिखा है.

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