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'मोदी केयर' पर IMA ने पहले उठाए थे सवाल, अब किया समर्थन

आईएमए के प्रतिनिधि ने 'आयुष्मान भारत' कार्यक्रम के प्रभारी अधिकारी से मुलाकात की, जिसके बाद उन्होंने इस कार्यक्रम को बेहतर तरीके से लागू करने के संबंध में सहयोग देने का वादा किया.

Updated On: Jun 23, 2018 03:15 PM IST

FP Staff

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'मोदी केयर' पर IMA ने पहले उठाए थे सवाल, अब किया समर्थन

हाल ही में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने मोदी केयर के नाम से मशहूर केंद्र सरकार के ‘आयुष्मान भारत’ कार्यक्रम में कई खामियों का जिक्र किया था, लेकिन अब आईएमए ने इसका समर्थन किया है. आईएम ने कहा था कि कार्यक्रम की समीक्षा होनी चाहिए. निजी बीमा कंपनियों की भागीदारी को लेकर कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए पत्र लिखा था. संस्थान की तरफ से कार्यक्रम में अवधारणा (कॉन्सेप्ट) की कमी और संचालन में खामी की बात कही गई थी.

शुक्रवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के प्रतिनिधि ने 'आयुष्मान भारत' कार्यक्रम के प्रभारी अधिकारी से मुलाकात की, जिसके बाद उन्होंने इस कार्यक्रम को बेहतर तरीके से लागू करने के संबंध में सहयोग देने का वादा किया.

आईएमए के महासचिव आरएन टंडन ने बताया कि ‘आयुष्मान भारत’ कार्यक्रम के साथ जुड़कर आईएमए को गर्व होगा और वह विशेष तौर पर टायर-2 और टायर-3 शहरों में जागरूकता फैलाने और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं प्रदान करने हेतु बड़ा नेटवर्क विकसित करने के लिए इच्छुक हैं.

योजना की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र की भूमिका महत्वपूर्ण

आईएमए के डिप्टी सीईओ दिनेश अरोड़ा ने न्यूज 18 से बात करते हुए कहा कि आईएमए ने शिकायत निवारण तंत्र का हिस्सा बनने के लिए कहा था, क्योंकि अधिकांश स्थानों पर इसकी शाखाएं हैं. उन्होंने कहा कि आईएमए सरकार के साथ भागीदारी करने को लेकर खुश थी. इस बीच एबीएनएचपीएम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी इंदु भूषण ने कहा कि आईएमए इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र की भूमिका महत्वपूर्ण है.

एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि मीटिंग में अस्पतालों को सही समय पर भुगतान, फीडबैक और शिकायत निवारण तंत्र, अस्पताल में कैशलेश लेन-देने के लिए आईटी की आधारभूत संरचना की स्थापना जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया और सुझाव दिए गए.

IMA ने की थी पारदर्शिता की मांग

बता दें कि पिछले हफ्ते आईएमए चीफ ने कहा था कि ‘आयुष्मान भारत’ के अंतर्गत जिस दाम में सेवा प्रदान करने की बात कही जा रही है उसमें मरीज के जीवन को खतरे में डाले बिना कोई भी अस्पताल काम नहीं कर पाएगा. आईएमए ने मांग की थी कि लागत पारदर्शी सार्वजनिक डोमेन में हो. डॉक्टरों की संस्था ने कहा कि अगर प्रत्येक जिला अस्पताल पर 2 करोड़ रुपये खर्च कर दिए जाएं तो एबीएनएचपीएम को जो धन दिया जा रहा है उसका बेहतर इस्तेमाल हो सकता है.

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