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मेजर गोगोई का सम्मान कश्मीर में अलगाववाद की भावना को बढ़ाएगा

सुरक्षा की भावना महसूस कराने के बजाए किस दिशा में जा रही है भारतीय सेना?

Sameer Yasir Updated On: May 25, 2017 08:14 AM IST

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मेजर गोगोई का सम्मान कश्मीर में अलगाववाद की भावना को बढ़ाएगा

मेजर नितिन लीतुल गोगोई की देश भर में जमकर तारीफ हो रही है. सेना के अफसरों से लेकर नेताओं और आम लोगों तक, सब उनका गुणगान कर रहे हैं. लेकिन कश्मीर में सत्ताधारी पीडीपी हो या विपक्षी नेशनल कांफ्रेंस या फिर आम लोग, सब के सब मेजर गोगोई को सम्मानित किए जाने से बेहद नाराज हैं.

उनके एक शख्स को जीप से बांधने की घटना की जांच पूरी होने से पहले ही सम्मानित किए जाने से कश्मीर में लोग बेहद खफा हैं. ये घटना 9 अप्रैल को श्रीनगर में संसदीय सीट के उप चुनाव के दौरान हुई थी.

पीडीपी के महासचिव निजामुद्दीन बट कहते हैं कि मेजर को सम्मानित करना गलत था. ये सही फैसला नहीं था. बट ने कहा कि उनकी सरकार मामले की सही जांच करेगी. मेजर गोगोई ने जो किया वो आम लोगों की सोच के लिहाज से गलत था और इसकी सही जांच होनी चाहिए. अगर गोगोई को इस घटना के लिए सम्मानित किया गया है तो वो सरासर गलत है.

सेना के मेजर गोगोई को सम्मानित करने के फैसले पर हंगामे के बाद कश्मीर के पुलिस अफसर मुनीर अहमद खान ने कहा कि गोगोई के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर की जांच होती रहेगी. एफआईआर खारिज नहीं की जाएगी, भले ही आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने उन्हें सम्मानित किया हो.

वोट डालने का ये मिला सिला

इस मामले में विवाद के बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के निर्देश पर एफआईआर दर्ज की गई थी. जिसमें शॉल बुनने वाले फारुक अहमद डार को जीप से बांधने का इल्जाम था. 27 साल के डार बड़गाम के चिल-ब्रास इलाके के रहने वाले हैं. उन्होंने चुनाव के दौरान जबरदस्त हिंसा के बीच अपना वोट डाला था. उस दिन हुई हिंसा में 9 लोग मारे गए थे.

मंगलवार को गोगोई को सम्मानित करने को डार ने कहा कि इंसाफ की हत्या हो गई है. आज निर्दयता को बढ़ावा दिया जा रहा है. बेरहम इंसान को सम्मानित किया जा रहा है. मैंने अलगाववादियों के विरोध के बावजूद वोट डाला और बदले में मुझे ये मिला. डार ने कहा कि अब वो कभी वोट नहीं डालेंगे.

फारुक अहमद डार के मुताबिक, वो और उनका चचेरा भाई घर से एक रिश्तेदार के अंतिम संस्कार में शामिल होने गौमपुरा गांव के लिए निकले थे. जब वो उटिलगाम पहुंचे तो सेना ने उन्हें रोका और जीप के बोनट पर बांध दिया. इसके बाद जीप को आस-पास के दर्जन भर गांवों में घुमाया गया.

हालांकि इस मामले में मेजर नितिन गोगोई का दावा अलग है. मंगलवार को बीरवाह में अपने कैंप में कुछ पत्रकारों से मुखातिब हुए गोगोई ने कहा कि डार को जीप के बोनट से बांधकर उन्होंने 12 लोगों की जान बचाई.

अलगाववादियों को मिल गया है मौका

हुर्रियत कांफ्रेंस के प्रमुख सैयद अली शाह गिलानी ने भी मेजर गोगोई को सम्मानित करने को शर्मनाक करार दिया है. गिलानी ने कहा कि मेजर गोगोई के सम्मान से हमारा ये आरोप सही साबित हुआ है कि ये सरकार की नीति का हिस्सा है. उन्हें आम कश्मीरियों की जान की परवाह नहीं. हम उम्मीद करते हैं कि इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में उसी तरह दखल देगा, जैसे उसने कुलभूषण जाधव के मामले में किया था.

Leetul Gogoi

गिलानी ने आगे कहा कि सेना के अफसर ने एक इंसान को जीप से बांधकर मानव ढाल की तरह इस्तेमाल किया. ये बेहद असंवेदनशील है. अधिकारी जिस हालात का दावा कर रहे हैं वो काबिले-यकीन नहीं. ये तो मानवता के खिलाफ है. सैन्य अधिकारी की नीयत ठीक नहीं थी. वो स्थानीय लोगों को सिर्फ परेशान करना चाहता था. ये लोगों को जबरदस्ती पोलिंग बूथ ले जाने के लिए किया गया था.

जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के अध्यक्ष यासीन मलिक ने कहा कि मेजर गोगोई का सम्मान फासीवाद है. हालांकि मलिक ने कहा कि इस फैसले से उन्हें जरा भी अचरज नहीं हुआ. मलिक ने कहा कि भारतीय सेना और दूसरे सुरक्षा बल कश्मीरियों को बेरहमी से मार रहे हैं. उन्हें अंधा कर रहे हैं. ये जुल्म खुलेआम हो रहा है.

मलिक ने कहा कि मेजर गोगोई की हरकत को नेता आत्मरक्षा के लिए उठाया गया कदम बता रहे हैं. ये कह रहे हैं कि मोहब्बत और जंग में सब जायज है. ये उनकी फासीवादी मानसिकता को दिखाता है.

एक और अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह ने कहा कि दुनिया को इस बात को काफी गंभीरता से लेना चाहिए. क्योंकि मेजर गोगोई का सम्मान कश्मीरियों के जख्म पर नमक छिड़कने जैसा है. शाह ने कहा कि किसी को मानव ढाल बनाना जेनेवा कन्वेंशन का सीधा उल्लंघन है. भारत पर कश्मीर में युद्ध अपराध करने का केस चलना चाहिए. मेजर गोगोई के खिलाफ जांच होनी चाहिए.

क्या है भारत सरकार की नीयत?

सीनियर कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर श्रीनगर में एक बैठक में शामिल होने आए थे. अय्यर ने कहा कि किसी को मानव ढाल बनाने वाले फौजी अफसर को सम्मानित करना ठीक नहीं है. इससे कश्मीर में तनाव और बढ़ेगा.

Kashmir Killing

(फोटो: पीटीआई)

हुर्रियत के नरम धड़े के प्रमुख मीरवाइज उमर फारुक ने कहा कि मेजर गोगोई को सम्मानित करके भारत सरकार ने अपनी नीयत साफ कर दी है. वो कश्मीर पर अवैध कब्जा बनाए रखना चाहते हैं. मीरवाइज ने कहा कि ऐसी फासीवादी हरकतें भारत में बढ़ती जा रही हैं. खास तौर से कश्मीर के लोगों के साथ ऐसा बार-बार हो रहा है. मीरवाइज ने आरोप लगाया कि मीडिया ऐसी हरकतों को बढ़ावा दे रहा है.

विपक्षी दल नेशनल कांफ्रेंस ने कहा कि जब एक मेजर एक आम इंसान को जीप से बांधकर उसे मानव ढाल बनाएगा और उसका सम्मान किया जाएगा, तो मुख्यधारा की पार्टियां किस मुंह से वोट मांगेंगी. पार्टी के प्रवक्ता जुनैद आजिम मट्टू ने कहा कि गोगोई का सम्मान पूरे कश्मीर के मुंह पर एक तमाचा है. मट्टू ने कहा कि वो शर्मिंदा हैं और नाउम्मीद भी.

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि एक नागरिक को मानव ढाल बनाने वाले अफसर को सम्मानित करने से ये संदेश गया है कि सेना मानवाधिकार उल्लंघन का समर्थन करती है. जिस अधिकारी के खिलाफ जांच चल रही है उसे सम्मानित करके सेना ने साफ कर दिया कि वो ऐसी घटनाओं को गंभीरता से नहीं लेती और इनकी अनदेखी करती है. इससे बेरहमी और बदसलूकी करने को बढ़ावा मिलेगा. एमनेस्टी इंटरनेशनल के भारत में निदेशक आकार पटेल ने कहा कि इससे सेना के दूसरे अफसरों को भी आम लोगों पर जुल्म ढाने का हौसला मिलेगा.

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