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Pocso: यौन अपराधियों का डेटा रखने वाला दुनिया का आठवां देश होगा भारत

दुनिया भर में भारत में बढ़ रही यौन अपराधों की दर की आलोचना के बाद सरकार ने कदम उठाने शुरू किए हैं

Updated On: Apr 21, 2018 09:13 PM IST

Bhasha

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Pocso: यौन अपराधियों का डेटा रखने वाला दुनिया का आठवां देश होगा भारत

भारत में यौन अपराधों में इजाफे के मद्देनजर अमेरिका में आलोचना के बाद सरकार ने यौन अपराधियों से जुड़े विस्तृत लेखाजोखा संग्रहित ( डाटाबेस ) करने का फैसला किया गया है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आज हुयी मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी. इसके साथ ही भारत यौन अपराधियों का डाटाबेस तैयार करने वाले आठ देशों के समूह में शामिल हो जाएगा.

मंत्रिमंडल ने बच्चियों के साथ बलात्कार करने वाले अपराधियों को मृत्युदंड देने के प्रावधान को लागू करने के लिए आपराधिक कानून संशोधन अध्यादेश 2018 को मंजूरी देते हुए राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो को यौन अपराधियों के ‘प्रोफाइल’ के साथ इनका डाटाबेस तैयार करने को कहा है.

डाटाबेस में संरक्षित किए गए आंकड़ों, तथ्यों और जानकारियों को नियमित तौर पर राज्यों एवं संघ शासित क्षेत्रों के साथ साझा किया जाएगा. जिससे स्थानीय पुलिस यौन अपराध के मामलों की जांच की निरंतर निगरानी कर सके.

हालांकि कुछ मानवाधिकार संगठनों ने यौन अपराधियों से जुड़ी जानकारियों का डाटाबेस तैयार करने का यह कहते हुए विरोध किया है कि ऐसा करने से इन्हें समाज की मुख्य धारा में लाने के लिए किए जाने वाला पुनर्वास कार्य नकारात्मक रूप से प्रभावित होगा.

मानवाधिकारों पर आधारित किताब ‘ ह्यूमन राइट्स वॉच ’ की लेखक जयश्री बजोरिया ने अमेरिका के आधिकारिक आंकड़ों के हवाले से बताया कि वहां के अधिकांश बाल यौन अपराधों में परिजनों, विश्वासपात्र परिचितों या ऐसे लोग शामिल पाए गए, जो पहले कभी यौन अपराधों में दोषी नहीं ठहराए गए थे. भारत में भी कमोबेश इसी स्थिति को देखते हुए सरकार को पॉक्सो कानून सहित अन्य मौजूदा कानूनी का बेहतर तरीके से पालन करना चाहिए.

बजोरिया ने कहा कि अमेरिका में अपराधियों का डाटाबेस लोगों के बीच सार्वजनिक होता है. जबकि ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, आयरलैंड, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, त्रिनिनाद और ग्रेट ब्रिटेन में यौन अपराधियों का डाटाबेस सिर्फ कानून से जुड़े अधिकारियों की पहुंच में रखा जाता है.

भारत में लेकिन अभी यह साफ नहीं है कि ये डाटाबेस जनता के बीच सार्वजनिक रहेगा या नहीं. उन्होंने इसे सार्वजनिक करने के बारे में चिंता जताते हुए कहा कि ऐसा होने पर पीड़ित यौन अपराधों को पुलिस में दर्ज कराने से हिचकेंगे क्योंकि अपराध करने वाले ज्यादातर लोग परिचित होते हैं.

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