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क्या इंटरपोल की मदद से मोदी और चोकसी को पकड़ा जा सकेगा?

पीएनबी का आरोपी मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी भी पिछले कुछ समय से गायब है

Updated On: Feb 16, 2018 10:14 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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क्या इंटरपोल की मदद से मोदी और चोकसी को पकड़ा जा सकेगा?

देश के सबसे बड़े बैकिंग घोटाले के सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. दूसरी तरफ इस घोटाले के सामने आने के बाद पीएनबी शेयरों में लगातार गिरावट का दौर जारी है. पिछले दो तीन दिनों में पीएनबी के शेयरों में लगभग 24 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई है. पीएनबी के गिरते शेयरों से निवेशकों में घबराहट है.

वहीं शुक्रवार को एक बार फिर से जांच एजेंसियों ने नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के कई ठिकानों पर छापेमारी की. इसमें मेहुल चौकसी के 20 से ज्यादा ठिकानों पर घोटाले से जुडे सुराग खंगाले गए. यह छापेमारी देश के 5 राज्यों के 6 शहरों में की गई. मेहुल चौकसी नीरव मोदी के ना सिर्फ बिजनेस पार्टनर हैं बल्कि रिश्तेदार भी हैं. जांच एजेंसियों ने मुंबई, पुणे, सूरत, जयपुर, हैदराबाद और कोयम्बटोर के कई ठिकानों पर शुक्रवार को छापेमारी की.

गौरतलब है कि पिछले बुधवार को ही पंजाब नेशनल बैंक के मुंबई के एक ब्रांच से फर्जी लनेदेन का मामला सामने आया था, जिसमें पीएनबी ने कहा था कि 11 हजार 400 करोड़ का घोटाला हुआ है. इस घोटाले के सामने आने के बाद पीएनबी ने जांच के लिए सीबीआई को पत्र लिखा था. इस मामले में हीरा व्यापारी नीरव मोदी मुख्य आरोपी है.

इस बीच शुक्रवार को एक बार फिर पंजाब नेशनल बैंक ने कहा है कि इस घोटाले से कथित नुकसान 4 हजार 886 करोड़ रुपए अनुमानित है. इस मामले में तीन कंपनियों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया है. जिन कंपनियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है उनमें गीतांजलि जेम्स, गिली इंडिया और नक्षत्र ब्रांड लिमिटेड शामिल है.

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विजय माल्या केस से सीख लेते हुए इस केस में जांच एजेंसियां काफी सतर्कता बरत रही है. आरोपियों पर शिकंजा कसने के लिए हर स्तर से प्रयास तेज किए ही जा रहे हैं साथ में उनकी संपत्तियों को भी फटाफट सील किया जा रहा है.

इतना ही नहीं सीबीआई ने पीएनबी के पूर्व डिप्टी मैनेजर गोकुलानाथ शेट्टी के मलाड़ स्थित आवास पर पहुंच कर सुराग तलाशे. जांच एजेंसियों को आशंका है कि शेट्टी भी विदेश भाग गया है. शेट्टी भी पिछले कई दिनों से गायब बताया जा रहा है.

इस घोटाले के मास्टरमाइंड नीरव मोदी और मेहुल चौकसी को लेकर विदेश मंत्रालय ने हाईअलर्ट जारी किया है. मामले से जुड़े सभी अभियुक्तों के पासपोर्ट अस्थाई तौर पर सस्पेंड कर दिए गए हैं.

इसके अलावा ईडी ने नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के खिलाफ शुक्रवार को समन भी जारी किया है. ईडी ने बताया कि दोनों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत समन जारी किया गया है.

नीरव मोदी अपने नाम पर ही ज्वेलरी ब्रांड का बिजनेस करते हैं वहीं मेहुल चोकसी गीतांजलि जेम्स के प्रोमोटर हैं. ईडी ने सीबीआई के केस के आधार पर पीएमएल के तहत भी एफआईआर दर्ज किया है. दूसरी तरफ इस घोटाले के सामने आने के बाद सियासी महाभारत भी शुरू हो गई है. जहां एक तरफ बीजेपी और कांग्रेस पार्टी इस घोटाले के लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोपों की बारिश कर रही है. वहीं आम आदमी पार्टी और लेफ्ट जैसी पार्टियों ने भी इसको सियासी मुद्दा बना लिया है. कांग्रेस पार्टी दलील दे रही है कि घोटाले के संबंध में प्रधानमंत्री मोदी को जुलाई 2016 में ही सभी दस्तावेजों सौंप दिए गए थे, लेकिन सरकार ने फिर भी कुछ नहीं किया. वहीं बीजेपी का आरोप है कि घोटाले की शुरुआत 2011 में यूपीए शासन के दौरान हुई. लिहाजा घोटाले की जिम्मेदार कांग्रेस पार्टी है.

इस घोटाले के आरोपी नीरव मोदी, उसकी पत्नी अमी मोदी, भाई निशाल मोदी और गीतांजलि के ग्रुप के मालिक मेहुल चौकसी के खिलाफ इंटरपोल को भी अलर्ट कर दिया गया है. ऐसा कहा जा रहा है कि इन चारों के खिलाफ इंटरपोल ने डिफ्यूजन नोटिस जारी किया है. इन चारों को एक सप्ताह के अंदर भारतीय विदेश मंत्रालय या भारतीय दूतावास में रिपोर्ट करने को कहा गया है. इस सात दिनों के अंदर ये लोग अगर हाजिर नहीं हुए तो इनके पासपोर्ट रद्द कर दिए जाएंगे.

सीबीआई सूत्रों से जो खबर बाहर आ रही है, उसमें सीबीआई और ईडी के कुछ अधिकारी अमेरिकी जांच एजेंसियों के संपर्क में है. नीरव मोदी की पत्नी को अमेरिका की नागरिकता हासिल है. ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि नीरव मोदी के पास भी अमेरिका की नागरिकता हो? सीबीआई इस एंगल से भी जांच कर रही है.

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सीबीआई ने पिछले दो दिनों में नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के ठिकानों पर छापेमारी कर लगभग 5 हजार 100 करोड़ रुपए के हीरे और सोने के आभूषण और गहने जब्त किए हैं. सीबीआई अब पंजाब नेशनल बैंक के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से भी पूछताछ करने वाली है. इसके साथ ही एजेंसियों ने दोनों कंपनियों से विदेशों में स्थित शोरूम बंद करने के लिए कहा है.

कुल मिलाकर कह सकते हैं कि घोटाले के सामने आने के बाद सीबीआई लेकर ईडी तक हरकत में आ गई है. दूसरी तरफ भारत सरकार भी कह रही है कि पाई-पाई का हिसाब वसूल लेंगे. लेकिन, देश में अमूमन हर घोटाले के बाद राजनेताओं या सत्ता पक्ष के प्रतिनिधियों के द्वारा यही बात सुनने को मिलता है. सत्ता की नुमाइंदगी करने वाले अक्सर कहते हैं, ‘आरोपी कितने बड़े पद पर हो या फिर कितना ही बड़ा नाम हो किसी को नहीं छोड़ेंगे. कानून अपना काम करेगा. दोषियों को सख्त सजा मिलेगी.’ लेकिन पिछले कुछ सालों से यह सिर्फ जुमला बन कर रह गया है.

भारत में घोटालों के इतिहास को अगर खंगाला जाए तो आजतक भारत में डूबी हुई रकम किसी घोटाले में वापस नहीं आई है. ऐसे में सरकार का यह दावा खोखला ही साबित होगा इसमें कोई दो राय नहीं है.

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