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अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण: भारत की सामरिक क्षमता से चीन परेशान

अग्नि-5 मिसाइल की कामयाबी से चीन भले ही डर गया हो, लेकिन फिलहाल वह 'सलामी-स्लाइसिंग' की अपनी कुटिल नीति से पीछे हटने वाला नहीं है. चीन अब भारत के खिलाफ कोई बड़ी हिमाकत करने से पहले कई बार सोचेगा

Updated On: Jan 20, 2018 02:09 PM IST

Prakash Katoch

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अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण: भारत की सामरिक क्षमता से चीन परेशान

भारत ने परमाणु क्षमता से लैस अग्नि-5 इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) का सफल परीक्षण किया है. यह परीक्षण गुरुवार सुबह लगभग 10 बजे ओडिशा के तट पर स्थित अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया. अग्नि-5 मिसाइल की ऊंचाई करीब 17 मीटर और व्यास 2 मीटर है. यह मिसाइल 1.5 टन तक वजनी परमाणु हथियार ढोने में सक्षम है. इसकी रफ्तार ध्वनि की गति से 24 गुना ज्यादा है.

साल 2012 से लेकर अब तक अग्नि-5 मिसाइल के 5 परीक्षण हुए हैं. गुरुवार को हुए परीक्षण से पहले आखिरी परीक्षण दिसंबर 2016 में किया गया था. भारत ने पिछले साल यानी 2017 में इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का एक भी परीक्षण नहीं किया. हालांकि अमेरिका, रूस, चीन और उत्तर कोरिया (संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के बावजूद) ने पिछले साल बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया था. संयोग की बात है कि, गुरुवार को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू रायसीना डायलॉग 2018 के तहत भारत की यात्रा पर थे. वास्तव में, अग्नि-5 मिसाइल के सफल परीक्षण की पुष्टि गुरुवार को उस समय हुई, जब रायसीना डायलॉग के दौरान एक पैनल 'न्यूक्लियर अनप्रेडिक्टबिलिटी: मैनेजिंग द ग्लोबल न्यूक्लियर फ्रेमवर्क' विषय पर चर्चा कर रहा था.

भारत ने अग्नि-5 मिसाइल का पहला परीक्षण 19 अप्रैल, 2012 को किया था. जबकि दूसरा परीक्षण 15 सितंबर, 2013 को, तीसरा परीक्षण 31 जनवरी, 2015 को और चौथा परीक्षण 26 दिसंबर, 2016 को किया गया. यह सभी परीक्षण एक ही बेस से किए गए. साल 2012 और 2013 के पहले दो परीक्षण खुली जगह (ओपन कॉन्फिग्युरेशन) से किए गए थे. जबकि तीसरा, चौथा और गुरुवार का पांचवां परीक्षण एक मोबाइल सॉफिस्टिकेटिड लॉन्चर से जुड़े कैनिस्टर के जरिए किया गया.

Agni Missile

मिसाइल का रख रखाव और कहीं भी लाना-ले जाना आसान हो जाता है

ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि, ओपन कॉन्फिग्युरेशन की तुलना में मोबाइल सॉफिस्टिकेटिड लॉन्चर से मिसाइल की लॉन्चिंग में बहुत कम समय लगता है. मोबाइल सॉफिस्टिकेटिड लॉन्चर के इस्तेमाल से मिसाइल की मारक क्षमता की विश्वसनीयता और सटीकता बढ़ जाती है. इसके अलावा मिसाइल की शेल्फ लाइफ में भी इजाफा होता है. साथ ही मिसाइल का रख रखाव और उसे कहीं लाना-ले जाना भी आसान हो जाता है.

भारत के पास अग्नि हथियारों की एक पूरी श्रृंखला है. अग्नि-1 मिसाइल 700 किलोमीटर की दूरी तक मार कर सकती है, अग्नि-2 मिसाइल की मारक क्षमता 2,000 किलोमीटर तक है, अग्नि-3 और अग्नि-4 मिसाइलें 2,500 किमी से लेकर 3500 किमी दूर तक अपने लक्ष्य को निशाना बनाने की क्षमता रखतीं हैं. वहीं 18 जनवरी को अग्नि-5 मिसाइल के सफल परीक्षण ने देश की मिसाइल क्षमताओं और रक्षा शक्ति में और इजाफा कर दिया है. अग्नि-5 मिसाइल 5,000 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तक वार कर सकती है और इसकी पहुंच चीन के सुदूर उत्तरी क्षेत्रों तक है.

गुरुवार को अग्नि-5 मिसाइल की उड़ान पर सभी रडार, ट्रैकिंग सिस्टम और रेंज स्टेशनों से निगरानी की गई. अग्नि-5 मिसाइल ने महज 19 मिनट में 4,900 किलोमीटर की दूरी तय की. चार सफल विकास परीक्षणों के बाद, अग्नि-5 मिसाइल का यह पहला उपयोगिता संबद्ध (यूजर एसोसिएट) परीक्षण था. यह मिसाइल अग्नि सीरीज (श्रृंखला) की सबसे उन्नत मिसाइल है. नेवीगेशन और गाइडेंस, वॉरहेड और इंजन के संदर्भ में अग्नि-5 मिसाइल में सभी नई तकनीकों को शामिल किया गया है. अग्नि-5 मिसाइल हाई स्पीड ऑन बोर्ड कंप्यूटर और फॉल्ट टॉलरेंट सॉफ्टवेयर से युक्त है. अगर नेवीगेशन सिस्टम की बात की जाए तो, इस मिसाइल में बहुत उच्च सटीकता वाला रिंग लेजर गैयरो-बेस्ड इनर्शल नेवीगेशन सिस्टम (आरआईएनएस) और सबसे आधुनिक और सटीक माइक्रो नेवीगेशन सिस्टम (एमआईएनएल) लगा हुआ है. यह दोनों नेवीगेशन सिस्टम यह सुनिश्चित करते हैं कि, मिसाइल सटीकता के साथ अपने लक्ष्य के कुछ मीटर आसपास तक आसानी से पहुंचे.

Agni-5

भारत आईसीबीएम वाले देशों के विशिष्ट समूह में शामिल हो जाएगा

पिछले चार परीक्षणों के बाद, अग्नि-5 की गुरुवार की उड़ान ने भारत को स्ट्रेटेजिक फोर्सिस कमांड की मिसाइल शक्तियों के बराबर पहुंचा दिया है. अग्नि-5 मिसाइल की उपपादन प्रक्रिया (इंडक्शन प्रोसेस) पूरी होने के बाद, भारत आईसीबीएम वाले देशों के विशिष्ट समूह में शामिल हो जाएगा. फिलहाल इस विशिष्ट समूह में अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और इजरायल ही शामिल हैं. जेरिको 3 (वाईए-4) मिसाइल को परमाणु हथियारों से लैस इजरायल की आईसीबीएम माना जाता है, जो साल 2011 से इजरायली सेना का हिस्सा है.

17 जनवरी, 2008 को, इजरायल ने एक मल्टी स्टेज (बहु-स्तरीय) बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था. जिसे जेरिको 3 की तरह का ही माना जाता है. यह मिसाइल भी परंपरागत परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बताया जाता है. फेडरेशन ऑफ अमेरिकिन साइंटिस्ट के मुताबिक, भारत के पास 120 से लेकर 130 तक परमाणु हथियार हैं, जबकि इसकी तुलना में अमेरिका कई हजार परमाणु हथियारों से लैस है. मार्च 2015 में, इजराइल के पास करीब 200 परमाणु हथियार थे.

चीन के पास पिछले साल अक्टूबर में 270 परमाणु हथियार थे. चीन के सीएसएस- 10 मॉड 2 आईसीबीएम की दूरी 11,200 किलोमीटर से ज्यादा है. अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस (डीओडी) के मुताबिक, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फोर्स (पीएलएआरएफ) अपने सिलो बेस्ड (सिलो आधारित) आईसीबीएम को बढ़ाने में लगातार जुटा हुआ है. चीन अपने आईसीबीएम को और ज्यादा उत्तरजीवी बनाने के प्रयास में है, साथ ही वह मोबाइल डिलेवरी सिस्टम को भी उन्नत करने की जुगत में लगा है. ऐसा अनुमान है कि, चीन के पास 75-100 आईसीबीएम और 50-75 लांचर हैं, जो मिसाइलों को 5,400 किलोमीटर से लेकर 13,000 किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी तक दाग सकते हैं.

Agni Missile

तस्वीर: प्रतीकात्मक

पृथ्वी का हर कोना मिसाइल की रेंज में आ जाएगा

इसके अलावा, चीन में रोड मोबाइल डीएफ-41 आईसीबीएम के विकास का काम जारी है. मल्टीपल इंडेपेंडेंटली टारगेटिड रि-एंट्री (एमआईआरवी) में सक्षम यह मिसाइल कई लक्ष्यों पर एक साथ हमला कर सकती है. डीएफ-41 आईसीबीएम एक साथ 100 किलोटन से लेकर 200 मेगाटन तक वजनी 10 विध्वंसकारी परमाणु हथियार ढो सकती है. इस मिसाइल की संभावित रेंज 12,000-15,000 किमी के बीच है. इस प्रकार, पृथ्वी का हर कोना इस मिसाइल की रेंज में आ जाएगा.

गुरुवार को अग्नि-5 के सफल परीक्षण के बाद चीन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. हालांकि, दिसंबर 2016 में जब अग्नि-5 का परीक्षण किया गया था, तब चीन ने कहा था कि, उसे आशा है कि, भारत ने परमाणु क्षमता से लैस अग्नि-5 आईसीबीएम का परीक्षण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के नियमों के मुताबिक किया होगा और दक्षिण एशिया के सामरिक संतुलन का भी ख्याल रखा होगा.

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा था, 'मुझे लगता है कि, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों में स्पष्ट नियम हैं कि, भारत परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम इस बैलिस्टिक मिसाइल को विकसित कर सकता है या नहीं. हम हमेशा से मानते आए हैं कि, दक्षिण एशिया में सामरिक संतुलन और स्थिरता इस क्षेत्र के देशों की शांति और समृद्धि के लिए हितकर है'. चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने दक्षिण एशिया में सामरिक संतुलन का जो संदर्भ दिया था, वह स्पष्ट रूप से भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संतुलन को लेकर था.

भारत के मिसाइल परीक्षण से चीन बुरी तरह से परेशान हो उठा है

दरअसल, चुनयिंग ने जिस बात का जिक्र नहीं किया था, वह यह थी कि, भारत मिसाइल टेक्नॉलजी कंट्रोल रेजीम (एमटीसीआर) का हिस्सा है, जबकि चीन नहीं है. यही वजह है कि चीन बुरी तरह से परेशान हो उठा है.

India vs China

अग्नि- 5 मिसाइल के सफल प्रक्षेपण से समूचा चीन भारत की मारक जद में आ जाएगा

चीनी की एक और शंका 'ग्लोबल टाइम्स' के माध्यम से सामने आई. 'ग्लोबल टाइम्स' अखबार ने 'चायनीज एकेडमी ऑफ मिलिट्री साइंस' के वैज्ञानिक 'डू वेंनलांग' का हवाला देते हुए कहा, अग्नि-5 मिसाइल की मारक क्षमता 3,000 मील (4,800 किमी) की बजाय 5000 मील (8,000 किलोमीटर) है. लिहाजा, अग्नि-5 की मारक क्षमता से अन्य देश चिंतित न हो उठें, इसलिए भारत सरकार ने जानबूझकर उसकी रेंज को कम कर के बताया है.

भारत पहले से ही अग्नि-5 मिसाइल की रेंज बढ़ाने पर काम कर रहा है. इसके अलावा भारत अग्नि-6 के विकास में भी व्यस्त है. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि, चीन के पास लंबी दूरी तक मार करने वाली आईसीबीएम है या नहीं. क्योंकि, अग्नि-5 के सेवा में आने पर, पूरा एशिया और यूरोप का लगभग 70 फीसदी इलाका इसकी रेंज में आ जाएगा. यह शायद भारतीय मिसाइलों का खौफ ही है कि, चीन ने ज्यादातर आर्थिक केंद्र (इकोनॉमिक हब) अपने पूर्वी समुद्री तट के किनारे बनाए हैं. यहां तक कि, चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) की शुरुआत शिनजियांग इलाके को विकसित करने की योजना से हो रही है.

चीन अब भारत के खिलाफ कोई बड़ी हिमाकत करने से पहले कई बार सोचेगा

चीन बखूबी समझता है कि, अग्नि-5 से न सिर्फ भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु सामरिक संतुलन पर फर्क पड़ा है, बल्कि उसने चीन के समक्ष भारत को मजबूत रणनीतिक प्रतिरोध प्रदान किया है. अग्नि-5 मिसाइल की कामयाबी से चीन भले ही डर गया हो, लेकिन फिलहाल वह 'सलामी-स्लाइसिंग' की अपनी कुटिल नीति से पीछे हटने वाला नहीं है. चीन की यह कुटिल नीति हम डोकलाम और शक्सगाम घाटी में देख चुके हैं. लेकिन इस बात में कोई शक नहीं है कि, चीन अब भारत के खिलाफ कोई बड़ी हिमाकत करने से पहले कई बार सोचेगा.

DRDO Missile

भारत के पास अग्नि मिसाइलों की पूरी रेंज है

अग्नि-5 मिसाइल की कामयाबी ने उन पश्चिमी विद्वानों के विचारों को भी नकार दिया है, जिनका मानना था कि, चीन अपने सामरिक परमाणु हथियारों (टीएनडब्ल्यू) का इस्तेमाल करके भारत को विवादित क्षेत्र छोड़ने के लिए मजबूर कर सकता है.

(लेखक भारतीय सेना के सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल हैं)

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