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डोकलाम विवाद: 'शांति और अहिंसा का रास्ता अपनाए चीन'

हिमालय के सभी जल स्रोतों पर कब्जा करके हिमालयी देशों को चीन गुलाम बनाने की साजिश कर रहा है

Bhasha Updated On: Aug 13, 2017 04:26 PM IST

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डोकलाम विवाद: 'शांति और अहिंसा का रास्ता अपनाए चीन'

आरएसएस प्रचारक इंद्रेश कुमार ने चीन पर निशाना साधा है. कुमार ने चीन को विश्व शांति और अहिंसा का रास्ता अपनाने की सलाह दी है.

सिक्किम के करीब डोकलाम क्षेत्र में भारत और चीन की तनातनी के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी इंद्रेश कुमार ने कहा कि हम भारतीय चीन को शत्रु नहीं बल्कि एक साम्राज्यवादी और हिंसक देश के रूप में देखते हैं और उससे उम्मीद करते हैं कि वह अपना साम्राज्यवादी चरित्र छोड़कर विश्व शांति और अहिंसा का रास्ता अपनाए.

भूटान पर कब्जा करने का षडयंत्र!

इंद्रेश कुमार ने कहा, 'चीन और भारत के रिश्ते कभी भी सुखद नहीं रहे. चीन ने कभी भी अपने साम्राज्य के विस्तार की नीति को नहीं रोका. भारत ने पहली बार नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चीन की साम्राज्यवादी और विस्तारवादी नीति का ठीक जवाब दिया है.'

उन्होंने कहा कि चीन की डोकलाम में आकर बैठने की कोशिश एक तरह से भूटान पर कब्जा करने का षडयंत्र है. कैलाश मानसरोवर को हड़पने के बाद चीन अब नेपाल और भूटान के माध्यम से देश में प्रवेश करने की कोशिश में है. तिब्बत पर कब्जा करके उसने बता दिया कि शांति उसका रास्ता नहीं है बल्कि हिंसा ही उसका मार्ग है.

आरएसएस प्रचारक ने कहा कि हिमालय के सभी जल स्रोतों पर कब्जा करके हिमालयी देशों को चीन गुलाम बनाने की साजिश कर रहा है.

कुमार ने कहा कि भारत ने चीन की धमकियों के आगे नहीं झुककर चीन के विस्तारवादी और साम्राज्यवादी षड्यंत्र को कूटनीतिक रूप से पराजित करने का काम किया है. दूसरी ओर भारत के लोगों ने देश के विभिन्न हिस्सों में चीनी माल का बहिष्कार करके चीन की आर्थिक कमर तोड़ने का काम किया है.

क्या उम्मीद पूरी करेगा चीन?

इंद्रेश कुमार ने कहा कि हम भारतीय चीन को शत्रु नहीं बल्कि एक साम्राज्यवादी और हिंसक देश के रूप में देखते हैं और उससे उम्मीद करते हैं कि वह अपना साम्राज्यवादी चरित्र छोड़कर विश्व शांति और अहिंसा का रास्ता अपनाएं.

उन्होंने कहा कि चीन ने जिन देशों की भूमि पर कब्जा किया है, उन देशों की भूमि को उसे लौटा देना चाहिए और हिंसा की कार्रवाई को बंद करना चाहिए . ‘यह चीन के साथ एशिया और संपूर्ण दुनिया की भलाई में होगा.’

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