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अखबारों में आए 'हिंदी-चीनी, भाई-भाई' वाले एड का मतलब क्या है?

चाइनीज नेशनल डे एक अक्टूबर को है. लेकिन अखबारों में 29 सितंबर को ही इसके एड छापे गए हैं

Subhesh Sharma Updated On: Sep 29, 2017 04:34 PM IST

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अखबारों में आए 'हिंदी-चीनी, भाई-भाई' वाले एड का मतलब क्या है?

चीन के साथ भारत के रिश्तों में पिछले कुछ समय में काफी तनाव देखने को मिला है. डोकलाम मुद्दे को लेकर दोनों देशों ने अपना स्टैंड क्लियर रखा. और पीछे हटने से इनकार कर दिया. हालांकि बाद में दोनों देशों ने अपनी आपसी सूझबूझ से मुद्दे को काफी हद तक सुलझाया. लेकिन इस सबके बीच भारत के लोगों में चीन की छवि पड़ोसी से ज्यादा दुशमन देश की बनी.

सोशल मीडिया पर चाइनीज आइटम को बायकॉट करने को लेकर कैंपेन चले. और बड़ी संख्या में लोगों ने चाइनीज आइटम को 'NO' कहना भी शुरू किया. लेकिन चीन और भारत दोनों को ही इस बात का अंदाजा है कि अगर दोनों देशों के बीच व्यापार बंद हो जाएगा. तो इसका नुकसान दोनों ही देशों को भुगतना पड़ेगा. शायद इसलिए रिश्तों में सुधार लाने और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए 'चाइनीज नेशनल डे' का भारतीय अखबारों में फुल पेज पर एड दिया गया है.

India vs China

चाइनीज नेशनल डे एक अक्टूबर को है. लेकिन अखबारों में 29 सितंबर को ही इसके एड छापे गए हैं. नेशनल डे से दो दिन पहले अखबारों में एड देने के पीछे कुछ अहम बातें हैं. जो इसके पीछे काम कर रही हैं. लेकिन पहले इस एड के बारे में जान लीजिए.

इस एड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के प्रेसीडेंट शी जिनपिंग साथ-साथ नजर आ रहे हैं. दोनों ही नेताओं की ओर से दिए गए बयान छापे गए हैं. इसमें पीएम मोदी की ओर से कहा गया है कि भारत और चीन के रिश्तों की प्रगति के लिए हमें एक और एक ग्यारह बनाना होगा. वहीं जिनपिंग के बयान में कहा गया है कि चीन और भारत को अपने द्विपक्षीय संबंध ड्रैगन और हाथी की दुश्मनी की बजाए ड्रैगन और हाथी के डांस के ऊपर बनाने चाहिए.

 

national china day

साथ ही इस एड भारत में चीन के एम्बेसडर लियो झाओहुई की ओर से भी एक बड़ा संदेश दिया गया है. इसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रेसीडेंट शी जिनपिंग अब तक 12 बार मुलाकात कर चुके हैं. चीन काफी सालों से भारत का ट्रेडिंग पार्टनर रहा है. 500 से ज्यादा चीनी कंपनियों ने भारत में निवेश और बिजनेस शुरू किया है. ये निवेश पांच बिलियन अमेरिकी डॉलर से भी ज्यादा है. भारत और चीन ने मिलकर 14 प्रांतों का विकास किया है.

इस एड में व्यापार पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है. भारत में बिजनेस करने वाली प्रमुख चीनी कंपनियों के नाम दिए गए हैं. चीन की अर्थव्यवस्था, एग्रीकल्चर आउटपुट, इंडस्ट्रियल आउटपुट, एजुकेशन, हेल्थ केयर और 2016 से चीन और भारत के साथ काम करने से दोनों देशों को कितना फायदा हुआ है. ये सब इस एड में दिया गया है.

china

सवाल है कि आखिर चीन के नेशनल डे के दो दिन पहले दोनों देशों के रिश्तों को मजबूती देने वाले संदेश के साथ ऐसे एड छापे जाने की क्या वजह है? क्या इसे दोनों देशों के संबंध सुधारने की दिशा में एक कदम के तौर पर देखा जाए या फिर सीमाई तनाव से अलग इसे दोनों देशों के आपसी व्यापारिक रिश्तों को पटरी पर लाने की कोशिश के तौर पर देखा जाए. या इसका कोई तीसरा मतलब भी हो सकता है.

ऐसे सवाल उठना इसलिए भी लाजिमी है, क्योंकि चीन और भारत के रिश्तों में काफी कड़वाहट आई है. इसकी बड़ी वजह डोकलाम मुद्दा है. भारत ने डोकलाम मुद्दे पर आक्रामक रवैया अपनाया और चीन को साफ शब्दों में चेतावनी दी थी कि इस बार मुंह तोड़ जवाब देंगे और ये 1962 का दौर नहीं है. हमारी सेना जंग जीतने में सक्षम है.

कई बार भारतीय और चीनी सैनिकों की भिडंत के वीडियो भी सामने आए. वीडियो में भारतीय सैनिक चीनी सैनिकों को अपनी सीमा में आने से रोक रहे हैं. लेकिन फिर भी चीन के सैनिक भारतीय सीमा में आने का प्रयास कर रहे हैं. मामला यहीं नहीं थमा. भारत-चीन सीमा पर पत्थरबाजी तक हुई.

इस तरह सीमा पर अपने सैनिकों को चीनी सैनिकों से लड़ते देख भारत के लोगों में चीन के प्रति गुस्सा लाजिमी है. कहा जा सकता है कि लोग आज चीन को भारत का पाकिस्तान से बड़ा दुश्मन मान रहे हैं. ये सब देखने के बाद दोस्ती भरे इस एड की किसी को उम्मीद नहीं थी.

भारत के कुछ स्कूलों ने तो छात्रों को मेड इन चाइना की स्टेशनरी भी इस्तेमाल करने से मना कर दिया. चीन के खिलाफ लोगों में नफरत सिर्फ स्कूलों में ही नहीं भारतीय बाजारों में भी देखने को मिली है. भारतीय बाजारों में भी जमकर चाइनीज प्रोडक्ट्स का विरोध हुआ. दुकानदारों ने साफ कर दिया कि उनके लिए मेड इन इंडिया पहले है. इस विरोध का असर चाइनीज प्रोडक्ट्स की कीमतों पर भी पड़ा और 100 रुपए वाली चीज 60 रुपए में भी बिकने लगी.

एड के जरिए व्यापार पर इसलिए भी जोर दिया जा रहा है, क्योंकि भारत में त्योहारों का सीजन शुरू हो चुका है. और चाइनीज कंपनियां इस फेस्टिव सीजन का पूरा फायदा उठाना चाहती हैं. पिछले साल बड़ी संख्या में भारत में लोगों ने चाइनीज प्रोडक्ट्स को बायकॉट किया था. जिससे चीन को भारी नुकसान हुआ था.

इस बार भी चीनी कंपनियों को कहीं न कहीं इस बात का डर जरूर सता रहा होगा. कमाई वाले दिनों में धंधा ठप हो जाए. ये भला किसे अच्छा लगेगा. अक्सर दिवाली के मौके पर व्हाट्सऐप और फेसबुक पर मेड इन चाइना वाले पटाखे, लाइटें और दीए आदि चीजें न खरीदने वाले मैसेज खूब चलते हैं.

ऐसे में कहा जा सकता है कि ये एड दोनों देशों के रिश्तों में मिठास दिखाने और व्यापार को बढ़ाने के लिए छापा गया है. ताकि चाइनीज आइटम भारतीय बाजारों में फिर से पहले की तरह बिक सके. भारत के लोगों में चीन के प्रति नफरत को कम किया जा रहा है.

इसके अलावा रिश्तों में सुधार लाने के लिए भारत की कई सेंट्रल यूनिर्सिटीज में भी चाइनीज नेशनल डे मनाया जाता है. जेएनयू और सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड में जहां चाइनीज लैंग्वेज कोर्स होता है, वहां चीन के इस अहम दिन को मनाया जाता है.

एम्बेसी के लोग और चीन से आए टीचर्स भी इसमें शामिल होते हैं. और भारतीय छात्रों को चीनी भाषा के फायदों से रूबरू भी कराते हैं. उम्मीद यही की जा रही है दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध पहले से बेहतर हों. ताकि दोनों देशों के लोगों को इसका लाभ मिल सके.

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