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भारत, अमेरिका ‘2+2’ वार्ता में द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे

रवीश कुमार ने कहा, ‘2+2 बैठक में द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और साझा हितों के वैश्विक स्तर के तमाम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी. इसका मकसद दोनों देशों के बीच रणनीतिक और सुरक्षा रिश्तों को मजबूती प्रदान करना है.’

Bhasha Updated On: Jul 20, 2018 04:20 PM IST

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भारत, अमेरिका ‘2+2’ वार्ता में द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे

भारत और अमेरिका के बीच यहां छह सितंबर को होने वाली ‘2+2’ वार्ता के दौरान द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी. विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी .

बहु प्रतीक्षित ‘2+2’ वार्ता की तारीख का ऐलान वॉशिंगटन और नई दिल्ली में हुआ. यह वार्ता पहले छह जुलाई को वाशिंगटन में होनी थी, लेकिन अमेरिकी विदेशी मंत्री माइकल आर पोम्पिओ की उत्तर कोरिया की यात्रा की वजह से इसे टाल दिया गया था.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बताया कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण क्रमश: अपने अमेरिकी समकक्षों-पोम्पिओं और जेम्स मैटिस की यहां छह सितंबर को वार्ता के लिए मेजबानी करेंगी.

वार्ता की तारीख का ऐलान करते हुए कुमार ने कहा, ‘2+2 बैठक में द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और साझा हितों के वैश्विक स्तर के तमाम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी. इसका मकसद दोनों देशों के बीच रणनीतिक और सुरक्षा रिश्तों को मजबूती प्रदान करना है.’

‘2+2’ प्रारूप के तहत स्वराज और सीतामरण अमेरिकी विदेशी मंत्री पोम्पिओ और रक्षा मंत्री मैटिस से वार्ता करेंगी. वार्ता के इस नए प्रारूप को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाशिंगटन यात्रा के दौरान पिछले साल 26 जून को अंतिम रूप दिया गया था.

पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत निक्की हेली ने कहा था कि जब दोनों देश पहली बार 2+2 वार्ता आयोजित करेंगे तब यह भारत और अमेरिका के रिश्ते में मील का नया पत्थर साबित होगा. दोनों देशों ने कई बार वार्ता के लिए तारीख तय करने की कोशिश की है.

इस साल के शुरू में भी इस वार्ता को टाल दिया गया था क्योंकि तब तक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पोम्पिओ की विदेश मंत्री के तौर पर पुष्टि करने पर अनिश्चितता थी. अप्रैल में पोम्पिओ को विदेश मंत्री बनाया गया.

यह वार्ता दोनों देशों के बीच रणनीतिक रिश्तों को आगे बढ़ाने वाली साबित हो सकती है. दोनों पक्ष भारत-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा कर सकते हैं जहां चीन अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है.

भारत वार्ता के दौरान ट्रंप प्रशासन के रूस के खिलाफ प्रतिबंधों के भारत पर पड़ने वाले प्रभाव को उठा सकता है. भारत-रूस के साथ एस-400 ट्रियुम्फ वायु रक्षा मिसाइल समझौते को अंतिम दे रहा है.

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