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आजादी स्पेशल: देश जश्न में डूबा था, महात्मा गांधी कर रहे थे उपवास

कलकत्ता में 72 घंटों के भीतर 6 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे और 20 हजार से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे

Updated On: Aug 15, 2018 02:48 PM IST

Rituraj Tripathi Rituraj Tripathi

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आजादी स्पेशल: देश जश्न में डूबा था, महात्मा गांधी कर रहे थे उपवास
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15 अगस्त 1947 को एक तरफ देश आजादी का जश्न मना रहा था तो दूसरी तरफ भारत-पाकिस्तान बंटवारे के वक्त हुई हिंसा में लाखों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. बंगाल और पंजाब में खतरनाक स्थिति थी. दंगे भी सबसे ज्यादा इन दो राज्यों में भड़के थे.

कलकत्ता में ही 72 घंटों के भीतर 6 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे और 20 हजार से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. विभाजन की आग ने करीब एक लाख से अधिक कलकत्ता के लोगों को बेघर कर दिया था.

आजादी से पहले मुस्लिम लीग ने डायरेक्ट एक्शन डे की घोषणा कर दी थी, 16 अगस्त 1947 को कलकत्ता की सड़कें खून से लाल हो गई थीं. मुस्लिम लीग ने 'सीधी कार्रवाई' नाम से अभियान चलाया था जिसके जरिए पाकिस्तान अपनी मांगें पूरी करना चाहता था. बंगाल के तत्कालीन सीएम शहीद सोहरावर्दी पर दंगे भड़काने के आरोप लगे थे. सोहरावर्दी ने एक्शन डे के दिन छुट्टी की घोषणा कर दी थी.

दंगों को रोकने के लिए महात्मा गांधी ने किया था उपवास

बंगाल और बिहार के दंगा प्रभावित इलाकों का महात्मा गांधी ने दौरा किया था. हिंदू और मुस्लिम समुदाय ने इन दंगों को लेकर गांधी पर आरोप लगाए थे लेकिन गांधी ने दंगों के खिलाफ अनशन शुरू कर दिया. इसका प्रभाव यह हुआ कि सितंबर 1947 में दंगे बंद हो गए और दंगाइयों ने गांधी के सामने हथियार डाल दिए.

महात्मा गांधी कलकत्ता में थे और हिंदू-मुस्लिम दंगों के पीड़ितों के जख्मों पर मलहम लगाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन उन्होंने दिल्ली में आजादी के समारोह में आने से मना कर दिया था.

कांग्रेस के नेता उन्हें मनाने के लिए बंगाल गए लेकिन उन्होंने साथ जाने से साफ मना कर दिया था. पूरा देश आजादी की सुबह जश्न मना रहा था और महात्मा गांधी उपवास कर रहे थे. वह उस पीड़ा को महसूस कर रहे थे जिसे हिंदू-मुस्लिम दंगों की भेंट चढ़ चुके परिवारों के आंसुओं में देखा जा सकता था.

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