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आजादी स्पेशल: ये जो हमारा तिरंगा जैसा है... ऐसा क्यों है?

22 जुलाई 1947 को कंस्टीट्यूएंट असेंबली ने आजाद भारत का पहला झंडा अपनाया

Updated On: Aug 15, 2018 09:53 AM IST

Pratima Sharma Pratima Sharma
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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आजादी स्पेशल: ये जो हमारा तिरंगा जैसा है... ऐसा क्यों है?

केसरिया बल भरने वाला सदा है सच्चाई हरा रंग है, हरी हमारी धरती है अंगड़ाई कहता है ये चक्र हमारा, कदम नहीं रुकेगा हिन्द देश का प्यारा झंडा ऊंचा सदा रहेगा

किसी भी देश के लिए उसका झंडा बहुत अहमियत रखता है. आखिर हो भी क्यों ना. वह झंडा उस देश की पहचान जो है. आजादी का जश्न मनाते हुए आपने तिरंगे को सम्मान तो जरूर दिया होगा. लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि हमारा तिरंगा बना कैसे?

किसने सोचा कि तिरंगा ऐसा हो?

आज आप जैसा तिरंगा देखते हैं यह शुरू से ऐसा नहीं था. भारत का पहला झंडा 7 अगस्त 1906 को कोलकाता में फहराया गया था. उस वक्त झंडे में तीन रंग तो थे लेकिन वे आज जैसे बिल्कुल नहीं थे. तब लाल, पीला और हरे रंग की पट्टियों से हमारा झंडा बना था. झंडे में सबसे ऊपर हरी पट्टी थी. उसपर 8 कमल के फूल बने थे. बीच पर पीली पट्टी थी. उस पर वंदे मातरम लिखा हुआ था. सबसे नीचे लाल पट्टी थी. उस पर बायीं ओर चांद और दांयी ओर सूरज बना हुआ था.

दूसरे बदलाव के बाद कुछ ऐसा था हमारा झंडा

एक साल के भीतर हमारे पहले झंडे का डिजाइन बदल गया. यह पहले वाले झंडे से मिलता जुलता जरूर था लेकिन वैसा नहीं था. अब इस झंडे में केसरिया, पीली और हरे रंग की पट्टियां थीं. सबसे ऊपर केसरिया पट्टी थी. उस पर कमल के फूल के बजाय सितारे बने हुए थे. बीच में पहले की तरह पीली पट्टी थी जिसपर वंदे मातरम लिखा हुआ था. सबसे नीचे लाल की जगह हरी पट्टी थी. उस पर चांद और सूरज बने हुए थे. बस चांद बाएं से दाएं और सूरज दाएं से बाएं आ गया था.

जब झंडे पर पहली बार छपा चरखा

1921 में आंध्रप्रदेश के विजयवाड़ा में अखिल भारती कांग्रेस समिति का अधिवेशन हो रहा था. तब पहली बार महात्मा गांधी ने झंडे में बदलाव का प्रस्ताव रखा था.तब उस झंडे को पिंगली वेंकैया ने डिजाइन किया था. उस झंडे में लाल और हरे रंग की पट्टियां थीं. ये दो रंग दो समुदायों के लिए इस्तेमाल किए गए थे. इसमें हरा रंग मुसलमानों के लिए और लाल हिंदुओं के लिए था. गांधी ने तब यह सलाह दी थी कि इसमें एक सफेद पट्टी जोड़ दी जाए जो बाकी समुदायों के लिए होगी. उस झंडे के बीच में एक चरखा बना हुआ था. झंडे के बीच में चरखा बने होने की खास वजह थी. गांधी जी हमेशा चाहते थे कि कपड़े के मामले में भारतीय स्वालंबी बनें. वे खुद अपने लिए कपड़ा बुनें जैसे गांधी जी खुद करते थे.

क्यों खास है 1931?

झंडे के इतिहास पर नजर डालें तो 1931 का साल बेहद अहम था. एक रेज्योलूशन पास करके तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के तौर पर अपनाया गया. इसमें सबसे ऊपर केसरिया रंग था. उसके बाद सफेद और सबसे नीचे हरा रंग था. सफेद रंग पर एक चरखा बना हुआ था. यह झंडा बिल्कुल हमारे आज के झंडे से मिलता जुलता है. बस फर्क यह था कि इसमें चक्र की जगह चरखा बना रहता था.

जब बना हमारा झंडा

22 जुलाई 1947 को कंस्टीट्यूएंट असेंबली ने आजाद भारत का पहला झंडा अपनाया. इस झंडे का रंग बिल्कुल पहले की तरह रहा. इसमें सिर्फ चरखे की जगह चक्र कर ने ले लिया था. इसी के साथ कांग्रेस पार्टी का झंडा आजाद भारत का झंडा बन गया.

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