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टैक्स बचाने को किराए की 'नकली' रसीद दी है तो लग सकता है झटका

अगली बार ऐसे बिल जमा करने से पहले सावधान रहें

Updated On: Apr 05, 2017 01:15 PM IST

FP Staff

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टैक्स बचाने को किराए की 'नकली' रसीद दी है तो लग सकता है झटका

अगर आप इनकम टैक्स से बचने के लिए मकान के किराए की 'नकली' रसीद देते हैं तो आपको झटका लग सकता है. अगली बार ऐसे बिल जमा करने से पहले सावधान रहें. इनकम टैक्स अधिकारी अब इस पर नजर रख रहे हैं और आपसे अधिक सबूत मांग सकते हैं.

इकॉनमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इनकम टैक्स अपेलेट ट्रिब्यूनल ने फैसला दिया कि आय की जांच कर रहे अधिकारी गहन जांच कर सकते हैं. वह आपसे इस बात के सबूत मांग सकते हैं कि जहां के किराए की रसीद आपने दी है, आप वहीं रहते हैं.

अगर अधिकारी को लगता है कि जमा की गई रसीद नकली हैं तो वह लीव एंड लाइसेंस एग्रीमेंट, हाउसिंग सोसायटी को लिखे गए लेटर, बिजली या पानी के बिल आदि चीजें मांग सकता है.

अभी टैक्स से राहत के लिए केवल किराए की रसीद जमा करनी होती है. अगर किराया एक लाख सालाना से अधिक हो तो मकान मालिक का पैन देना होता है. नए फैसले के बाद अब यह बल सकता है और अब किराया देने की बात साबित करने का जिम्मा जमा करने वाले पर होगा.

रिपोर्ट के अनुसार, इस फैसले से एक नजीर बन सकती है और इसका असर नौकरीपेशा लोगों पर जमकर हो सकता है.

नौकरीपेशा लोगों को आयकर अधिनियम के सेक्शन 10(13ए) के तहत मकान किराए पर छूट मिलती है. इस नियम के तहत कर्मचारी मिले किराया भत्ते (एचआरए) या बेसिक सैलरी के 50 (मेट्रो सिटी) फीसदी या 40 फीसदी (अन्य शहर) या फिर दिए गए किराए में बेसिक सैलरी का 10 फीसदी कम, इनमें जो भी सबसे कम हो, तक की छूट पा सकते हैं.

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