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जानिए कोर्ट ने क्यों कहा, सुप्रीम कोर्ट ‘पिकनिक की जगह’ नहीं

बहस के दौरान कोर्ट ने विभाग के वकील से कहा, 'ऐसा मत कीजिए. सुप्रीम कोर्ट पिकनिक की जगह नहीं है

Updated On: Sep 02, 2018 05:55 PM IST

Bhasha

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जानिए कोर्ट ने क्यों कहा, सुप्रीम कोर्ट ‘पिकनिक की जगह’ नहीं
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कोर्ट को ‘गुमराह करने के लिए’ आयकर विभाग को सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई है. दरअसल, आयकर विभाग ने कोर्ट को एक याचिका के लंबित होने की बात कही थी और इस याचिका को दाखिल करने में काफी वक्त लगा दिया. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट करते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ‘पिकनिक की जगह’ नहीं है और उससे इस तरह का बर्ताव नहीं किया जा सकता.

न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने विभाग पर दस लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया. इसके साथ ही कहा कि वह इस बात से हैरान है कि आयकर आयुक्त के जरिए केंद्र ने मामले को इतने हल्के में लिया है. पीठ ने आदेश में कहा कि आयकर विभाग ने 596 दिनों की देरी के बाद याचिका दायर की और देरी के लिए विभाग की ओर से अपर्याप्त और अविश्वसनीय दलीलें दी गईं. इस पीठ में न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता भी शामिल थे.

बहस के दौरान कोर्ट ने विभाग के वकील से कहा, 'ऐसा मत कीजिए. सुप्रीम कोर्ट पिकनिक की जगह नहीं है. उच्चतम न्यायालय से इस तरीके से पेश नहीं आ सकते.' सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गाजियाबाद के आयकर आयुक्त की ओर से दायर एक याचिका में विभाग ने कहा है कि साल 2012 में दी गयी एक उसी तरह की याचिका अब भी अदालत में लंबित है. पीठ का यह भी कहना था कि विभाग जिस मामले को लंबित बता रहा है, उसका फैसला सितंबर 2012 में ही कर दिया गया था.

याचिका खारिज

हालांकि कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया और अपने आदेश में कहा, 'याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट के सामने एकदम गुमराह करने वाला बयान दिया है. इसको लेकर हम हैरान हैं कि आयकर आयुक्त के जरिए भारत सरकार ने मामले को इतने हल्के में लिया.' अब पीठ ने विभाग को चार हफ्ते के अंदर सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा समिति को 10 लाख रुपए जमा कराने का निर्देश जारी किया. वहीं कोर्ट ने कहा कि इन रुपयों का इस्तेमाल किशोर न्याय से जुड़े मुद्दों के लिए किया जाएगा.

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