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रेड्डी पर हमले की जांच मामले में चंद्रबाबू नायडू ने PM मोदी को खत लिखकर उठाए महत्वपूर्ण सवाल

नायडू ने अपने खत में लिखा कि इस मामले में एनआईए जांच का गठन करके, केंद्र सरकार अब स्पष्ट रूप से राज्यों को दरकिनार कर आतंक से लड़ने की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेना चाहती है

Updated On: Jan 12, 2019 07:01 PM IST

FP Staff

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रेड्डी पर हमले की जांच मामले में चंद्रबाबू नायडू ने PM मोदी को खत लिखकर उठाए महत्वपूर्ण सवाल

आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने प्रधानमंत्री मोदी को खत लिखकर जगमोहन रेड्डी पर हुए हमले संबंधी जांच पर सवाल उठाए हैं. नायडू ने मोदी से सवाल किया है कि रेड्डी पर हुए हमले की जांच एनआईए को क्यों सौंपी गई. केंद्र सरकार द्वारा यह मामला एक आतंकवाद-विरोधी एजेंसी को स्थानांतरित करने का कदम, हर संस्था की स्वायत्तता और पवित्रता को कम करेगा.

नायडू ने अपने खत में लिखा कि एनआईए जांच का गठन करके, केंद्र सरकार अब स्पष्ट रूप से राज्यों को दरकिनार कर आतंक से लड़ने की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेना चाहती है.

न्यूज़ 18 के अनुसार पिछले साल अक्टूबर में विशाखापटनम एयरपोर्ट पर एक अज्ञात शख्स ने जगमोहन रेड्डी पर हमला कर दिया था.घटना उस वक्त हुई जब रेड्डी एयरपोर्ट लाउंज में बोर्डिंग पास का इंतजार कर रहे थे. इस दौरान एक अंजान शख्स उनके पास आया और फोटो खिंचवाने का आग्रह करने लगा. इसके बाद उसने अचानक ही रेड्डी के हाथ पर छोटे चाकू से वार कर दिया.

एसआईटी की जांच से असंतुष्ट थे रेड्डी

हमलावर श्रीनिवास राव को राज्य पुलिस ने जांच के लिए तुरंत हिरासत में ले लिया. राज्य सरकार द्वारा गठित एक विशेष जांच दल (एसआईटी) ने कहा कि हमला अभियुक्तों द्वारा किया गया प्रचार भर था और उनका रेड्डी को मारने का कोई इरादा नहीं था.

इसके बाद जांच से असंतुष्ट रेड्डी ने उच्च न्यायालय में यह दलील दी कि जांच एक स्वतंत्र एजेंसी को सौंप दी जानी चाहिए लेकिन आंध्र प्रदेश सरकार के अधीन नहीं होनी चाहिए. अदालत ने राज्य सरकार और केंद्र को एनआईए अधिनियम की धारा 6 के अनुसार कार्य करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया. इसके बाद, 31 दिसंबर को, गृह मंत्रालय ने एक आदेश पारित कर एनआईए को मामला उठाने के लिए कहा. जांच एजेंसी द्वारा एक जनवरी को मामला दर्ज किया गया था.

वाईएसआरसीपी कानूनी सेल के प्रमुख और याचिकाकर्ताओं में से एक के वकील पोन्नवोलु सुधाकर रेड्डी ने न्यूज 18 से कहा कि मामले की जांच गंभीरता से नहीं की गई है. वो शायद असली आरोपी को बचाना चाहते हैं. वहीं राज्य की स्थानीय एनआईए अदालत ने शुक्रवार को एनआईए पुलिस द्वारा आरोपी की सात दिन की हिरासत मंजूर कर ली है.

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