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2018 में फर्जी ई-टिकट का इस्तेमाल कर हवाई अड्डों में प्रवेश के मामले सबसे अधिक

यह पाया गया कि या तो नियमों की जानकारी नहीं होने या परिवार के किसी सदस्य या मित्र को विदा करने की तीव्र इच्छा ऐसे व्यक्तियों को हवाई अड्डे के भीतर अवैध प्रवेश करने के लिए प्रेरित करती है

Updated On: Dec 30, 2018 07:07 PM IST

Bhasha

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2018 में फर्जी ई-टिकट का इस्तेमाल कर हवाई अड्डों में प्रवेश के मामले सबसे अधिक

भारतीय हवाई अड्डों में अवैध प्रवेश के लिए फर्जी ई-टिकटों का इस्तेमाल पिछले चार वर्षों में 2018 के दौरान सबसे अधिक रहा. इसको देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां यात्रियों के प्रवेश के लिए बायोमेट्रिक या बारकोड आधारित प्रणाली इस्तेमाल करने पर विचार कर रही हैं.

सुरक्षा एजेंसियों ने दर्ज किए गए इन मामलों में आतंक संबंधी या तोड़फोड़ संबंधी कोई घटना होने से इनकार किया. उन्होंने भविष्य में हवाई अड्डा सुरक्षा घेरा तोड़ने के लिए इसके दुरुपयोग की आशंका को लेकर चिंता जतायी.

सीआईएसएफ डेटा के अनुसार दिसम्बर के शुरू तक फर्जी या रद्द ई-टिकट इस्तेमाल करते हुए यात्रियों के अवैध प्रवेश की कुल 140 घटनाएं सामने आयीं. पिछले वर्ष ऐसी 111 घटनाएं पकड़ में आयी थीं. 2016 के दौरान ऐसी घटनाओं की संख्या 74 और 2015 में 43 थीं.

भारतीय नागरिक हवाई अड्डों की सुरक्षा की जिम्मा सीआईएसएफ के पास है और वर्तमान में उसके पास ऐसी 61 इकाइयां हैं.

बल ने इस अपराध के सिलसिले में भारतीयों के साथ-साथ विदेशियों को भी पकड़ा है.

Delhi Airport

(फोटो: फेसबुक से साभार)

नियमों की जानकारी न होने या करीबी को विदा करने की ललक है कारण:
यह पाया गया कि या तो नियमों की जानकारी नहीं होने या परिवार के किसी सदस्य या मित्र को विदा करने की तीव्र इच्छा ऐसे व्यक्तियों को हवाई अड्डे के भीतर अवैध प्रवेश करने के लिए प्रेरित करती है. ऐसे व्यक्ति भीतर प्रवेश के लिए ऐसे पहले से रद्द हवाई टिकट का प्रिंटआउट या मोबाइल पर पीडीएफ अटैचमेंट प्रवेश द्वार पर सीआईएसएफ को दिखाते हैं.

हवाई अड्डे की सुरक्षा में लगे एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘सुरक्षा में सेंध की नजर से इनमें से कोई भी घटना गंभीर नहीं थी. लेकिन भविष्य में हवाई अड्डा की सुरक्षा में गंभीर सेंध लगाने के लिए किसी के फर्जी या रद्द किए हुए ई-टिकट के इस्तेमाल की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता.’

हवाई अड्डा की सुरक्षा में लगी सीआईएसएफ, गुप्तचर ब्यूरो, ब्यूरो आफ सिविल एविएशन सिक्युरिटी (बीसीएएस) जैसी विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां चाहती हैं कि इसे यात्रियों के लिए बायोमेट्रिक या बारकोड आधारित प्रवेश प्रणाली का इस्तेमाल करके रोका जाए.

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