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विदेशी फल : कभी बढ़ाता स्वाद तो कभी बढ़ाता है शान

उच्च मध्यम वर्ग द्वारा डाइनिंग रूप में डाइनिंग टेबल पर इम्पोर्टेड फल सजाकर रखना एक आम शगल हो गया है

Bhasha Updated On: Apr 10, 2018 04:52 PM IST

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विदेशी फल : कभी बढ़ाता स्वाद तो कभी बढ़ाता है शान

विदेशी या इम्पोर्टेड चीजों का मोह अब सिर्फ एसी, टीवी, फ्रिज, लैपटॉप, कार या मोबाइल तक सीमित नहीं रह गया है. इस फेहरिस्त में विदेशी या इम्पोर्टेड फलों का नाम भी जुड़ गया है. यही वजह है कि हाल के वर्षों में भारत में विदेशी फलों की मांग में कई गुना का इजाफा हुआ है.

शादी-ब्याह में विदेशी फलों का स्टॉल लगाने का चलन तो तेजी से बढ़ा है. साथ ही बेहतर गुणवत्ता की वजह से भी आज उच्च मध्यम वर्ग देसी के बजाय विदेशी फल खाना पसंद करता है.

दिलचस्प यह है कि विदेशी फल घर की सजावट का भी हिस्सा बन चुके हैं. उच्च मध्यम वर्ग द्वारा डाइनिंग रूप में डाइनिंग टेबल पर इम्पोर्टेड फल सजाकर रखना एक आम शगल हो गया है. डाइनिंग टेबल पर रखे विदेशी फलों पर उस देश का नाम होता है, जहां से इन्हें आयात किया गया है. इससे मेहमानों पर रौब गालिब किया जा सकता है.

न्यूजीलैंड, अमेरिका और चीन से आते हैं फल 

राजधानी की थोक फल एवं सब्जी मंडी आजादपुर मंडी के व्यापारियों के अनुसार बाजार में दो दर्जन के करीब विदेशी फल आते हैं. न्यूजीलैंड से कीवी तो, अमेरिका और चीन से सेब का आयात होता है. इसके अलावा इमली, अमरूद, अंगूर, खरबूजा, नाशपति, चेरी, आम, खजूर का भी आयात होता है.

दिल्ली में विदेशी फल की दैनिक मांग तीन-चार ट्रक प्रतिदिन की है. एक ट्रक में नौ टन फल आते हैं. शादी ब्याह के सीजन में तो यह मांग आठ-दस ट्रकों तक पहुंच जाती है.

व्यापारियों के अनुसार, भारतीय की तुलना में विदेशी फल की कीमत आमतौर पर 70 से 150 रुपए प्रति किलो तक अधिक होती है. चीन और अमेरिका से आने वाले सेब की कीमत 250 रुपए से किलो से अधिक है. दक्षिण अफ्रीका की नाशपति भी 200 रुपए किलो से अधिक बिकती है. आयातित खजूर 400 से 800 रुपए किलो बिकता है.

पैकेजिंग में देसी फलों से आगे हैं विदेशी फल 

व्यापारियों का कहना है कि विदेशी फलों की मांग का एक कारण यह भी कि इनकी पैकेजिंग काफी अच्छी होती है. पैकेजिंग के मामले में विदेशी फल भारतीय फलों को मात देते हैं. व्यापारी आयातित फलों को कोल्ड स्टोरेज में रखते हैं और जरूरत के हिसाब से इनको बाहर निकालकर बेचा जाता है.

शर्मा कहते हैं कि अब देश में भी विदेशी फलों की गुणवत्ता वाले फलों का उत्पादन शुरू हो गया है. हिमाचल प्रदेश में बड़े पैमाने पर कीवी का उत्पादन हो रहा है. यही नहीं विदेशी कृषि विशेषज्ञ भारत आकर खेती में मदद करते हैं. इससे भी फलों की गुणवत्ता को बेहतर किया जा रहा है.

आंकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो पिछले कुछ साल में विदेशी फल-सब्जियों का आयात कई गुना हो चुका है. 2011-12 में जहां 4,000 करोड़ रुपये के फल व सब्जियों का आयात हुआ था, वहीं 2016-17 में यह आंकड़ा 11,900 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है.

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