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1965 के भारत-पाक युद्ध की ऐसी सच्चाई जो आप नहीं जानते होंगे

चीन के साथ 1962 के युद्ध के घाव से भारत उभरा भी नहीं था कि 3 साल बाद पाकिस्तान ने फिर पीठ में छुरा घोंप दिया

FP Staff Updated On: Sep 22, 2017 10:25 AM IST

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1965 के भारत-पाक युद्ध की ऐसी सच्चाई जो आप नहीं जानते होंगे

चीन के साथ 1962 के युद्ध के घाव से भारत उबर भी नहीं पाया था कि 3 साल बाद पाकिस्तान ने फिर पीठ में छुरा घोंप दिया. 1947 के बाद ये दूसरा मौका था, जब साल 1965 में पाकिस्तान ने भारत पर हमला बोला था.

ये युद्ध कश्मीर में शुरू हुए पाकिस्तानी कोवर्ट (गुप्त) ऑपरेशन के चलते हुआ था. पहले पाकिस्तान ने गुजरात के कच्छ इलाके के कज़रकोट पर हमला किया और बाद में जम्मू-कश्मीर को निशाना बनाया. अगस्त से शुरू हुआ ये युद्ध 22 सितंबर को खत्म हुआ था.

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पढ़िए इस युद्ध से जुड़ी खास बातें-

- ऐसा माना जाता है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1965 की लड़ाई सबसे जबरदस्त तरीके से लड़ी गई थी. गुजरात से लेकर कश्मीर तक युद्ध क्षेत्र में तब्दील हो गया था.

- इस युद्ध की नींव जनवरी 1965 में ही रख दी गई थी. जब पाकिस्तानी सेना ने गुजरात के कच्छ क्षेत्र में ऑपरेशन 'डेजर्ट हॉक' शुरू किया.

- ऑपरेशन 'डेजर्ट हॉक' के पीछे पाकिस्तानी सेना का मकसद था कि वो भारतीय सेना को गुजरात में उलझाए रखें और कश्मीर में वो मोर्चा खोल दें.

-गुजरात के कच्छ में एक तरफ जहां पाकिस्तानी आर्मी ने मोर्चा खोला, वहीं कश्मीर में उन्होंने 33 हजार घुसपैठियों को घुसा दिया.

- 28 अगस्त 1965 के दिन बड़ी सफलता हासिल करते हुए भारतीय सेना ने, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के अंदर 8 किमी तक हाजी पीर पास पर कब्ज़ा कर लिया था.

- 1 सितंबर के दिन पाकिस्तानी सेना ने ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम की शुरुआत की थी. पाकिस्तान भारतीय सेना की सप्लाई बाधित करना चाहता था. इसके चलते उन्होंने चंब और जुरियन इलाके में जमकर बमबारी की.

-65 के युद्ध में लाल बहादुर शास्त्री के कड़े फैसले की बदौलत पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी. शास्त्री जी ने भारतीय सेना को पूरी छूट दी थी, जिसकी बदौलत पहली बार अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पार कर दिया था.

- पाकिस्तानी टैंकों का जवाब देने के लिए अब्दुल हमीद ने वो कर दिखाया, जो किसी ने नहीं सोचा था. अकेले हमीद ने जीप पर रिकॉइलैस गन लगाकर पाकिस्तानी पैटन टैंकों को कई फीट हवा में उछाल दिया.

-अकेले हमीद ने 7 पाकिस्तानी पैटन टैंकों को तबाह कर दिया था. इस अदम्य साहस के लिए उन्हें परमवीर चक्र से नवाज़ा गया.

- 22 सितंबर 1965 के दिन UN के दखल के बाद भारी युद्ध के बीच भारत और पाकिस्तान ने सीज़फायर का ऐलान कर दिया.

(साभार न्यूज 18)

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