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प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद गाजियाबाद में अवैध निर्माण धड़ल्ले से चालू

दिल्ली से सटे गाजियाबाद में निर्माणाधीन अवैध इमारतों को लेकर बड़ी कार्रवाई की शुरुआत हो गई है

Updated On: Jul 30, 2018 05:18 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद गाजियाबाद में अवैध निर्माण धड़ल्ले से चालू

दिल्ली से सटे गाजियाबाद में निर्माणाधीन अवैध इमारतों को लेकर बड़ी कार्रवाई की शुरुआत हो गई है. गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने अब तक जिले के 350 से अधिक इमारतों को सील कर दिया है. जिले की कई जर्जर इमारतों को खाली कराने का काम भी जबरदस्त तरीके से किया जा रहा है. जिला प्रशासन ने कई छाटे-मोटे बिल्डर्स को ब्लैक लिस्टेड भी कर दिया है. प्राधिकरण का यह कदम हाल के दिनों में दो-तीन निर्माणाधीन इमारतों के गिरने के बाद शुरू किया गया है.

बता दें कि जीडीए और जिला प्रशासन ने मिलकर अब तक जिले के 350 से भी अधिक अवैध इमारतों को सील कर दिया है. रविवार को भी जीडीए और जिला प्रशासन ने साथ मिलकर लगभग 80 इमारतों को लेकर अभियान चलाया. प्रशासन ने इस दौरान कई भवनों को खाली कराया और साथ ही लगभग 350 अवैध निर्माण को सील कर दिया गया. सोमवार को भी जीडीए और जिला प्रशासन की कई टीमें इस अभियान में लगी हैं.

प्राधिकरण ने यह कार्रवाई बारिश में सड़कों, पार्किंग स्थलों पर जल-जमाव, गड्ढों और दीवारों के गिरने बाद किया है. पिछले दिनों ही ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी और गाजियाबाद के आकाश नगर में बहुमंजिला इमारतों के गिरने से कई लोगों की मौत हो गई थी. बीते शुक्रवार को भी गाजियाबाद के खोड़ा कॉलनी में एक पांच मंजिला इमारत गिर गई थी. यह इमारत सरकारी जमीन पर तैयार की गई थी.

बता दें कि खोड़ा हादसे के बाद जिला प्रशासन ने और सख्ती दिखाते हुए इस अभियान को चला रही है. प्रशासन ने खोड़ा में निर्माणाधीन बिल्डिंग के गिरने पर बिल्डर के खिलाफ भी सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण की रिपोर्ट दर्ज कराई है.

बता दें कि गाजियाबाद जिला प्रशासन ने ऐसे अवैध निर्माण पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है, जिससे लोगों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जाता है. गाजियाबाद जिला प्रशासन ने मजिस्ट्र्टों की अगुवाई में आठ टीमों का गठन किया है. ये सभी टीमें गाजियाबाद में बन रहे अवैध इमारतों और बनाने वाले बिल्डर्स के बारे में एक रिपोर्ट तैयार करेगी.

गाजियाबाद के हर सेक्टर का सर्वे कराई जाएगा और वहां पर पहले से बने या फिर नए बन रहे मकानों की जांच की जाएगी. जांच के बाद यह रिपोर्ट जीडीए और जिला प्रशासन को दी जाएगी. अगर प्राधिकरण की तरफ से किसी भी तरह का दोष सामने आता है तो तुरंत ही बिल्डिंग को सीज कर बिल्डर्स पर एफआईआर दर्ज कराया जाएगा.

VASUNDHARA

गाजियाबाद के वसुंधरा में वार्तालोक सोसायटी के पास का वह गड्ढा जिसमें पानी भर जाने के कारण सड़क धंस गई थी.

जिले की डीएम और जीडीए की उपाध्यक्ष ऋतु महेश्वरी के मुताबिक, ‘जिले के सभी इलाकों में बन रही बहुमंजिला इमारतों और भवनों का सेफ्टी ऑडिट शुरू किया जा चुका है. जिले के पांच से ज्यादा रियल स्टेट कारोबारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश दिए जा चुके हैं. इन लोगों पर बेसमेंट की खुदाई करने और अधूरा काम छोड़ने का मामला दर्ज किया जाएगा. बेसमेंट की खुदाई के कारण ही सड़कें धंस रही हैं.

बिल्डिंग का काम समय पर पूरा नहीं होने से आस-पास रहने लोगों के जान पर भी अब खतरा बन आया है. हमलोगों ने इसके लिए कई टीमों का गठन किया है. जीडीए अधिकारी हर साइट पर जा कर मकानों और बहुमंजिला इमारतों की जांच कर रहे हैं. अवैध निर्माण और मकानों का ध्वस्त करने का काम भी शुरू दिया गया है. हम लोगों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे.’

इसके साथ ही प्रवर्तन अनुभाग को भी जिम्मेदारी दी गई है कि वह जिले में बन रहे अवैध निर्माण और बिल्डर्स पर नजर रखें. प्रवर्तन विभाग की टीम यह देखेगी कि गाजियाबाद के हर जोन में निर्माण कार्य कहां चल रहा है और बिल्डर्स का प्रोफाइल कैसा है. प्रवर्तन विभाग यह भी सुनिश्चित करेगी की निर्माणाधीन इमारत में काम करने वाले मजदूर निर्माणाधीन इमारत में न रहें. प्रवर्तन विभाग इस सिलसिले में जिले के सभी बिल्डर्स से एक एनओसी लेने पर भी विचार कर रही है.

बता दें कि जीडीए और जिला प्रशासन जिले में छोटे भूखंडों पर बहुमंजिला इमारतों को लेकर काफी सर्तक हो गई है. जीडीए बगैर नक्शा पास किए वैसी इमारतों को चिन्हित कर रही है, जहां पर निर्माण कार्य चल रहे हैं.

जीडीए ने फ्लैट या भूखंड खरीदने वालों के लिए हाउस लोन लेने के लिए एनओसी लेना जरूरी कर दिया है. साथ ही बिजली कनेक्शन लेने के लिए भी जीडीए से एनओसी लेना अनिवार्य कर दिया है. जीडीए इस बारे में जल्द ही सभी सरकारी और गैरसरकारी बैकों को पत्र के जरिए जानकारी देने वाली है ताकि शहर में अवैध निर्माण और अवैध कॉलनियां न बन सके.

पिछले 10-15 सालों में खासकर गाजियाबाद में 300 अवैध कॉलोनियां तैयार हो गई हैं. इन कॉलोनियों में छुटभैये बिल्डर्स बहुमंजिला इमारत तैयार करवा रहे हैं. इस अवैध निर्माण पर रोक लगाने के लिए ही जिला प्रशासन और जीडीए ने एक योजना तैयार की है. इस नई योजना के तहत अब बिल्डर्स को जीडीए से एनओसी लेनी होगी.

दरअसल पिछले दिनों दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में तीन अवैध इमारतें गिर गईं थी. इनमें कई लोगों की जान गई. इन घटनाओं के बाद यूपी सरकार ने जिला प्रशासन को सख्त कदम उठाने के निर्देश जारी किए थे.

बेशक सरकार का तरफ से सख्त निर्देश जारी किए गए हों, लेकिन इस इलाके में अब भी धड़ल्ले से अवैध इमारतों का निर्माण कार्य जारी है. स्थिति अब भी बहुत भयावह है. इन दो-तीन घटनाओं के बाद बिल्डरों पर शासन-प्रशासन के द्वारा लगातार नकेल कसने की खबर तो आ रही है. लेकिन धरातल पर हालात अभी भी सुधरे नहीं हैं.

Greater Noida Building Collapse

ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी में हुए हादसे की तस्वीर

पिछले मंगलवार को फ़र्स्टपोस्ट हिंदी ने गाजियाबाद के कई इलाके में अवैध निर्माण के कार्य का मुआयना किया. इन दो-तीन घटनाओं के बावजूद अब भी इस इलाके में अवैध निर्माण का काम जारी है. आकाश नगर में जिस जगह जिस इमारत गिरी थी उसके एक-दो किलोमीटर के दायरे में अब भी अवैध निर्माण धड़ल्ले से चल रहा है. जीडीए के तमाम अधिकारियों की मौजूदगी में ही अवैध निर्माण चल रहा है. अफसरों की गाड़ियों का काफिला आ-जा रहा है लेकिन निर्माण कार्य पर किसी तरह को कोई प्रभाव नजर नहीं आ रहा है. हां, कुछ साइट्स पर का जरूर रोक लगाई गई है.

गौरतलब है कि ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में घटित इन दो घटनाओं के बाद राज्य प्रशासन की तरफ से सख्ती दिखाने की शुरुआत हो गई है. राज्य प्रशासन ने इन इलाकों में अवैध निर्माण करने वाले बिल्डरों पर शिकंजा कसना भी शुरू कर दिया है. लेकिन सवाल यह है कि सालों से रह रहे लोगों को अपना मकान खाली करना पड़ रहा है. उनके लिए एक बार फिर से रहने से लेकर बैंक लोन चुकाने तक का भी संकट आ गया है.

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