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अवैध निर्माण को जुर्माना लगाकर सही बताना MCD का कारोबार बन गया है: HC

अदालत ने कहा कि इसे नगर निगमों द्वारा ‘राजस्व जुटाने के उद्देश्य’ के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए

FP Staff Updated On: May 12, 2018 09:11 AM IST

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अवैध निर्माण को जुर्माना लगाकर सही बताना MCD का कारोबार बन गया है: HC

दिल्ली हाईकोर्ट ने बिल्डिंग के निर्माण में अवैध निर्माण या स्वीकृत योजना से अलग निर्माण के चलते जिन योजनाओं पर जुर्माना लगाया गया था उन्हें बाद में अनुमति दिए जाने के तरीके को गलत बताया है. अदालत ने कहा कि इसे नगर निगमों द्वारा ‘राजस्व जुटाने के उद्देश्य’ के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.

चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सी हरि शंकर की पीठ ने शुक्रवार को कहा कि जान बूझकर जो अवैध निर्माण किया गया है, वह जुर्माना लगाने लायक नहीं है. हाईकोर्ट ने कहा कि स्वीकृत योजनाओं में बदलाव लाने का कोई अधिकार नहीं है और फिर इस पर जुर्माना अदा कर दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही आदेश कर रखा है कि किसी भी तरह के बदलाव या अवैध निर्माण पर जुर्माना लगाना गलत है और इसे नियम नहीं बनाया जा सकता.

अदालत ने कहा कि जुर्माना लगाना उनका सबसे अच्छा कारोबार बन गया है. अदालत ने नगर निगमों को कहा कि आप जुर्माना लगाने के नियम को राजस्व जुटाने के उद्देश्य के तौर पर इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं. इससे आप लाभ नहीं कमा सकते हैं.

दक्षिण दिल्ली के महरौली इलाके में स्थित दो बिल्डिंगों में अवैध निर्माण का आरोप लगाने वाली दो जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान अदालत ने ये बातें कहीं.

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