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आईआईटी ने व्हिसलब्लोअर प्रोफेसर का इस्तीफा स्वीकार किया

कुमार ने 2014 में ही इस्तीफा दे दिया था लेकिन संस्थान ने यह कहते हुए इसे स्वीकार नहीं किया कि यह मामला अदालत में विचाराधीन है

Updated On: Aug 20, 2017 09:08 PM IST

Bhasha

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आईआईटी ने व्हिसलब्लोअर प्रोफेसर का इस्तीफा स्वीकार किया

अपने सुधार कामों के लिए कभी 'गुमनाम नायक' कहे जाने वाले राजीव कुमार का इस्तीफा आखिरकार स्वीकार कर लिया गया है. इससे पहले अनिवार्य रिटायरमेंट करने के संस्थान के फैसले को प्रणब मुखर्जी ने रद्द कर दिया था.

क्या था मामला?

आईआईटी खड़गपुर ने मई 2011 में कुमार को 'भ्रष्टाचार' के आरोप में निलंबित किया था. उसी साल हाई कोर्ट ने आईआईटी के ज्वाइंट एंट्रेस टेस्ट (जी) में सुधारों के प्रयासों को लेकर राजीव को 'गुमनाम नायक' बताया था. राजीव की कोशिशों से ही जी एडवांस्ड कर दिया गया था.

क्या है आरोप?

राजीव पर आरोप लगा था कि उन्होंने लैपटॉप खरीद में अनियमितताएं और परीक्षाओं में छात्रों की नकल का आरोप लगाकर संस्थान की छवि को नुकसान पहुंचाया है. संस्थान ने एक जांच समिति बनाई जिसने उन्हें दोषी पाया.

2014 में आईआईटी ने उन्हें अनिवार्य तौर पर रिटायरमेंट देने का फैसला किया था. कुमार ने जांच समिति पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया और दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. कोर्ट ने आईआईटी के फैसले पर रोक लगा दी थी. कुमार ने उस वक्त के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भी आईआईटी का आदेश खारिज करने का अनुरोध किया.

जेएनयू से जुड़ गए थे कुमार 

कुमार ने 2014 में ही इस्तीफा दे दिया था लेकिन संस्थान ने यह कहते हुए इसे स्वीकार नहीं किया कि यह मामला अदालत में विचाराधीन है. हाई कोर्ट के आईआईटी के फैसले पर रोक लगाने के बाद 2015 में कुमार जेएनयू से जुड़ गए. हालांकि जून में उन्हें आईआईटी खड़गपुर से फिर से जुड़ने के लिए जेएनयू ने मुक्त कर दिया .

प्रोफेसर ने जेएनयू के कुलपति से उन्हें बहाल करने की अपील की है क्योंकि उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है. इस संबंध में जब जेएनयू के कुलपति एम जगदीश कुमार से संपर्क किया गया तो उन्होंने इस पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया.

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