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इस डिवाइस से अब आम आदमी भी पकड़ लेगा पेट्रोल-डीजल की चोरी

कानपुर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में मैकेनिकल विभाग के पीएचडी छात्रों ने एक खास तरह की डिवाइस (फ्यूल क्वांटिफायर) तैयार की है

Bhasha Updated On: May 13, 2018 07:59 PM IST

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इस डिवाइस से अब आम आदमी भी पकड़ लेगा पेट्रोल-डीजल की चोरी

कानपुर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में मैकेनिकल विभाग के पीएचडी छात्रों ने एक खास तरह की डिवाइस (फ्यूल क्वांटिफायर) तैयार की है जिसकी मदद से आम आदमी भी पेट्रोल पंप पर होने वाली चोरी को आसानी से पकड़ लेगा. इस खास डिवाइस (फ्यूल क्वांटिफायर) और मोबाइल में डाउनलोड एप्लीकेशन की मदद से अब कोई भी व्यक्ति पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल लेते समय पेट्रोल-डीजल की चोरी के खेल को पकड़ लेगा.

इस उपकरण को तैयार करने वाले पीएचडी के छात्र माधवराव लोंधे ने बताया कि उन्होंने इस डिवाइस को एक अन्य पीएचडी छात्र महेंद्र कुमार गोहिल की मदद से मैकेनिकल विभाग के प्रो. नचिकेता तिवारी की देखरेख में तैयार किया है.

लोंधे ने बताया कि कोन आकार में तैयार डिवाइस को कार या बाइक के फ्यूल टैंक में इस तरह से लगाया (इन्स्टॉल) जाएगा कि पेट्रोल या डीजल पंप मशीन का नोजल डिवाइस के अंदर से होते हुए टंकी में जाएगा और सर्किट में एक छोटी सी बैट्री भी लगेगी.

फ्यूल टैंक में इन्स्टॉल उपकरण को ब्लू-टूथ या फिर वाई फाई के द्वारा मोबाइल में डाउनलोड एक खास एप्लीकेशन से जोड़ा जाएगा जिसके पश्चात फ्यूल रीडिंग कुछ ही सेंकेंड में मोबाइल स्क्रीन पर अपने आप प्रदर्शित हो जाएगी. लोंधे का यह भी कहना है कि अलग से एक स्क्रीन डैशबोर्ड पर भी लगाई जा सकती है. फ्यूल क्वांटिफायर डिवाइस प्रति यूनिट टाइम के हिसाब से तेल की माप करती है. यह तेल के फ्लो रेट को माप लेता है. नोजल से टंकी में तेल जाने की गति चाहे तेज हो या फिर धीमी, उसका असर माप रीडिंग पर नहीं पड़ता है.

लोंधे के मुताबिक डिवाइस में कई सेंसर लगे हैं तथा इसमें काफी संख्या में नेगेटिव और पॉजिटिव ब्लेड भी होते हैं. पेट्रोल या डीजल पंप पर ईंधन डालते वक़्त नोजल डिवाइस के अंदर से होते हुए टंकी में जाएगा और तेल मैग्नेटिक रोटर में जाते ही ब्लेड को घुमाएगा जिससे तेल के फ्लो की रीडिंग माइक्रोप्रोसेसर यूनिट में आ जाएगी. माइक्रोप्रोसेसर पहले से ही कैलिब्रेट है. उसे पूरे सर्किट के साथ फंक्शन किया गया है.

लोंधे ने कहा है कि इस डिवाइस के लिए ऐप भी लांच करने की तैयारी है और संस्थान ने इस शोध को पेटेंट करा लिया है.

लोंधे ने आगे बताया कि इस डिवाइस को बनाने में अभी 2000 से 2500 रुपए की लागत आ रही है किंतु जब यह अधिक मात्रा में तैयार की जाएगी तो इसकी लागत 1000 रुपए से भी कम हो जाएगी.

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