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IFS अधिकारी संजीव चतुर्वेदी का दावा: CVC ने एम्स में भ्रष्टाचार के मामले बंद किए

जांच की मांग कर रहे संजीव ने हाल ही में राष्ट्रपति कार्यालय को अपने दावे के समर्थन में करीब 1000 पन्नों के दस्तावेज भेजे हैं

Updated On: Nov 21, 2017 05:41 PM IST

Bhasha

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IFS अधिकारी संजीव चतुर्वेदी का दावा: CVC ने एम्स में भ्रष्टाचार के मामले बंद किए

भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के बहुचर्चित अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने दावा किया है कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में हुए भ्रष्टाचार के कई ऐसे मामले बंद कर दिए जिनमें कई वरिष्ठ अधिकारी कथित तौर पर शामिल थे.

सीवीसी आयुक्त के. वी चौधरी के खिलाफ जांच की मांग कर रहे संजीव ने हाल ही में राष्ट्रपति कार्यालय को अपने दावे के समर्थन में करीब 1000 पन्नों के दस्तावेज भेजे हैं. उन्होंने राष्ट्रपति सचिवालय से 7 मामलों का ब्यौरा साझा किया है. इन 7 मामलों में एक उस वक्त का है जब एम्स में मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) के पद पर संजीव की तैनाती के दौरान उन्हें कथित तौर पर प्रताड़ित किया जा रहा था.

भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए सीवीसी की इकाई के तौर पर संजीव ने जुलाई 2012 से अगस्त 2014 तक एम्स में सीवीओ के रूप में सेवाएं दी थीं. उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार के कई मामले सीबीआई के संज्ञान में लाए थे. गहन जांच के बाद सीबीआई ने सीवीसी की ओर से बंद किए जा चुके 4 मामलों में विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की और उनमें अधिकारियों और वरिष्ठ शिक्षकों को नामजद किया. संजीव द्वारा सूचना का अधिकार (आरटीआई) के जरिए हासिल किए गए दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ है.

सतर्कता नियमावली के मुताबिक, आपराधिक पहलू वाले भ्रष्टाचार के मामले संगठन के सीवीओ की ओर से पहले सीबीआई को भेजे जाते हैं. विभागीय कार्रवाई के मामलों पर सीवीसी के निर्देश के आधार पर कार्रवाई की जाती है.

सीवीसी ने अपने जवाब में कहा कि हर मामले में रिपोर्ट का परीक्षण किया गया और उचित स्तर पर इसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया गया.

अपनी प्रतिक्रिया में सीवीसी ने कहा, ‘ऐसी रिपोर्टें गोपनीय दस्तावेज होती हैं और आयोग की ओर से सलाह दिए जाते वक्त उचित अधिकारी की राय पर गौर किया जाता है.’

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