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अब मुस्लिम दूल्हे लेंगे तीन तलाक न देने की कसम!

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड 'मॉडल निकाहनामा' में यह शर्त जोड़ने वाला है कि दूल्हा निकाहनामे में खुद यह लिखकर शपथ लेगा कि वो दुल्हन को इंस्टेंट ट्रिपल तलाक नहीं देगा

Updated On: Feb 06, 2018 06:29 PM IST

FP Staff

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अब मुस्लिम दूल्हे लेंगे तीन तलाक न देने की कसम!

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की 9 फरवरी से हैदराबाद में होने वाली जनरल बॉडी मीटिंग से पहले ही विवाद खड़ा हो गया है. खबरों के अनुसार मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड 'मॉडल निकाहनामा' में यह शर्त जोड़ने वाला है कि दूल्हा निकाहनामे में खुद यह लिखकर शपथ लेगा कि वो दुल्हन को इंस्टेंट ट्रिपल तलाक यानी तलाक-ए-बिद्दत नहीं देगा.

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक 9 से 11 फरवरी तक चलेगी. इस बैठक में बोर्ड मुस्लिम पर्सनल लॉ को बचाने का रोडमैप तैयार करेगा.

सीएनएन-न्यूज18 से एआईएमपीएलबी के कंवेनर और महासचिव, रहीमुद्दीन अंसारी ने कहा कि ‘बोर्ड पहले ही यह घोषणा कर चुका है कि इंस्टेंट ट्रिपल तलाक देने वालों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए. अब इस तरह के प्रैक्टिस को रोकने के लिए हम मॉडल निकाहनामे में एक और क्लाउज जोड़ने जा रहे हैं जिसमें पुरुष यह शपथ लेगा कि वो इंस्टेंट तीन तलाक नहीं देगा. इस बदलाव से तीन तलाक के मामलों में कमी आएगी.’

अंसारी ने कहा कि ‘हम मुस्लिम समुदाय को इस बात के लिए भी जागरूक करेंगे कि इंस्टेंट ट्रिपल तलाक इस्लाम और देश के कानून के खिलाफ है.’

हालांकि अंसारी ने यह भी कहा है कि ट्रिपल तलाक रोकने के लिए मॉडल निकाहनामा में जो बदलाव किया जा रहा है, वो बाध्यकारी नहीं होगा. राज्यों के वक्फ बोर्ड पर निर्भर करेगा कि वो निकाहनामा में किए गए बदलाव को माने या नहीं.

triple talaq

महिला संगठनों ने किया इस वजह से विरोध

दूसरी तरफ हैदराबाद के ही कुछ महिला संगठनों ने मॉडल निकाहनामा में फेरबदल कर ट्रिपल तलाक को रोकने के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. महिला संगठन का कहना है कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को महिलाओं के बारे में फैसले लेने का कोई हक नहीं है. हालांकि मुस्लिम लॉ बॉर्ड के सदस्‍य कमाल फारूकी ने इससे इनकार किया है. उनका कहना है कि कोई संशोधन नहीं किया जा रहा है.

महिला संगठनों का कहना है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मॉडल निकाहनामा में यह शर्त जोड़ने वाला है कि दूल्हा ट्रिपल तलाक नहीं देगा. लेकिन बोर्ड को खुद यकीन नहीं है कि इस शर्त को कितने लोग मानेंगे और कितने नहीं. ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून का विरोध करने वालों मुस्लिम नेताओं का दावा था कि वो खुद ऐसी व्यवस्था बनाना चाहते हैं, जिससे ट्रिपल तलाक न हो. लेकिन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक से पहले ही उन दावों की हवा निकलना शुरू हो गई है.

मुस्लिम महिलाओं का यह भी कहना है कि मुसलमानों को दिशानिर्देश देने का बोर्ड को कोई हक नहीं है.

महिला संगठनों का कहना है कि कुरान ट्रिपल तलाक की इजाजत नहीं देता, लेकिन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड कुरान की बात न करके, बार-बार शरीयत का हवाला देता है, जो गलत है.

इधर, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कमाल फारुकी ने सफाई में कहा, 'तीन तलाक से जोड़कर हम निकाहनामा में कोई संशोधन नहीं करने जा रहे हैं. तीन तलाक पर जो भी कदम उठाने थे वो हम पहले ही कर चुके हैं. अब इस संबंध में हमारी कोई बैठक नहीं होने जा रही है.'

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