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क्या है 'MASUKA', ट्विटर से कॉन्स्टिट्यूशन क्लब तक उठ रही है जिसकी मांग

यह कैंपेन ट्विटर से शुरू हुआ है और अभी तक हजारों लोग इससे सोशल मीडिया पर जुड़ चुके हैं

Nidhi Nidhi Updated On: Jul 07, 2017 07:59 PM IST

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क्या है 'MASUKA', ट्विटर से कॉन्स्टिट्यूशन क्लब तक उठ रही है जिसकी मांग

'एक भीड़ वो होती है जो लोगों को डराने के लिए इकठ्ठा होती है, लोगों की हत्या करने के लिए इकठ्ठा होती है. और एक भीड़ वो होती है जो इंसानियत को बचाने के लिए इकठ्ठा होती है.'

इन्हीं लाइनों और मैसेज के साथ ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है 'I Support MASUKA'. इस हैशटैग के साथ लोग 'मानव सुरक्षा कानून' की मांग कर रहे हैं.

भीड़ हत्या (mob lynching) के विरोध में हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर और देश के कई जगहों पर 'NotInMyName' के नाम से विरोध प्रदर्शन किए गए थे. इस प्रोटेस्ट को सोशल मीडिया पर ही शुरू किया गया था. और लोगों से जुड़ने की अपील की गई थी, जिससे भारी संख्या में लोग इकठ्ठा भी हुए थे.

अब 'MASUKA' नाम से चल रहे इस कैंपेन में भी राजनीतिक, फिल्मी हस्तियों से लेकर कई बुद्धिजीवी लोगों ने हिस्सा लिया है. stop mob lynching' नाम से चल रहे एक ट्विटर हैंडल पर इन सभी लोगों के 'मानव सुरक्षा कानून' की मांग करते हुए वीडियो अपलोड किए गए हैं.

कांग्रेस नेता शशि थरूर का एक वीडियो जारी किया गया है. जिसमें थरूर का कहना है कि, 'mob lynching के रूप में सड़कों पर लगातार बढ़ रहे अपराध के लिए कानून व्यवस्था का सख्त होना बेहद जरूरी है. इसलिए मैं 'MASUKA' यानी मानव सुरक्षा कानून की मांग का समर्थन करता हूं.

आप नेता और दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी इसका सपोर्ट किया है. मनीष सिसोदिया इस वीडियो में कह रहे हैं, 'हमारा देश विश्वगुरु के नाम से जाना जाता था और हम आगे भी चाहते हैं कि ये देश विश्वगुरु के नाम से जाना जाए. यहां एक दूसरी कम्युनिटी के लोग एक दूसरी कम्युनिटी के लोगों को इसलिए पकड़ कर पीट रहे हैं कि वो क्या खाते हैं, क्या पहनते हैं? क्या हम ऐसा चाहते हैं कि भारत को 'mob lynching' करने वाले देश के रूप में देखा जाए? हम नहीं चाहते कि भारत की पहचान ऐसी हो. आइए हम फिर से वैसे भारत की नींव रखते हैं. जो किसानों का था, मजदूरों का था, ज्ञान का था.

इसी तरह अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने भी इस कैंपेन में हिस्सा लिया है. इस वीडियो में वे बेहद सख्त लहजे में 'mob lynching' के विरोध में एक बेहतर और स्वच्छ समाज की मांग कर रही हैं. सुनिए क्या कह रही हैं स्वरा-

जेएनयू की छात्र नेता शेहला राशिद ने भी इस कैंपेन के सपोर्ट किया है. शेहला लगातार 'mob lynching' के विरोध में कैंपेन, सेमिनार और चर्चाएं कर रही हैं.

सोशल एक्टिविस्ट जिग्नेश मेवानी ने कहा है, जिस तरह लोग गौ-रक्षा के नाम पर लोकतंत्र और कानून की धज्जियां उड़ाकर सड़कों पर लोगों को प्रताड़ित कर रहे हैं, इससे साफ पता चलता है कि इंसानियत खतरे में है. इस परिस्थिति में हम नागरिक सुरक्षा कानून की मांग करते हैं.

ट्विटर पर हजारों की संख्या में लोगों ने इस कैंपेन का सपोर्ट किया है. ट्वीट और वीडियो के द्वारा लोगों ने हिंसात्मक भीड़ का विरोध किया है. और इस एक बेहतर, एक दूसरे के धर्म, जाति, संस्कृति की इज्जत करने वाले समाज की मांग करते हुए 'मानव सुरक्षा कानून की मांग की है.

@JacquelineDsou4- के हैंडल ने लिखा है-

@jaijaicongress- ने लिखा है-

पिछले दिनों भी फेसबुक पर #NOTINMYNAME से शुरू हुआ कैंपेन देखते-देखते देश भर में फैल गया. सोशल मीडिया की बदौलत ही #NOTINMYNAME का कैंपेन लंदन तक पहुंचा और वहां भी जुनैद के लिए विरोध-प्रदर्शन हुआ. इस बार फिर यह कैंपेन ट्विटर से शुरू हुआ है और अभी तक हजारों लोग इससे सोशल मीडिया पर जुड़ चुके हैं. साथ ही दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में 'MASUKA' की मांग के लिए इकठ्ठा भी हुए हैं.

आज हर दूसरे दिन एक हत्या और सड़कों पर हो रही मार-पीट की खबर आती है. अख़लाक से लेकर जुनैद तक इसी भीड़ हत्या के शिकार हुए हैं. ऐसे समय में बहुत जरूरी है कि इस पागल होती भीड़ के लिए सख्त कानून हो. जिससे समाज को इन असामाजिक तत्वों से बचाया जा सके.

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