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हाईकोर्ट ने मेट्रोलॉजी डिपार्टमेंट से पूछा- क्या आप समोसे पर भी हेल्पलाइन नंबर चाहते हैं?

तेलंगाना के राज्य मेट्रोलॉजी डिपार्टमेंट को इस बात का अधिकार नहीं है कि वह सिनेमा हॉल और मल्टीप्लेक्स में बिना पैकिंग के बिकने वाली खाने की चीजों पर रोक लगाए.

Updated On: Aug 03, 2018 04:16 PM IST

FP Staff

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हाईकोर्ट ने मेट्रोलॉजी डिपार्टमेंट से पूछा- क्या आप समोसे पर भी हेल्पलाइन नंबर चाहते हैं?

हैदराबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को साफ कर दिया है कि तेलंगाना के राज्य मेट्रोलॉजी डिपार्टमेंट को इस बात का अधिकार नहीं है कि वह सिनेमा हॉल और मल्टीप्लेक्स में बिना पैकिंग के बिकने वाली खाने की चीजों पर रोक लगाए. हाईकोर्ट ने यह बात उस मामले में कही है जिसमें खाने की चीजों पर ज्यादा पैसे वसूलने की बात उठी थी.

डिपार्टमेंट के आदेश में खामियां पाने के बाद कोर्ट ने टिप्पणी की, इससे साबित होता है कि अधिकारी चाहते हैं कि चाय, कॉफी और सोडा पर भी हेल्पलाइन नंबर हो. दरअसल जस्टिस एम एस रामचंद्र राव मल्टीप्लेक्स संघ और पीवीआर लिमिटेड की उस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे जो एमआरपी डिपार्टमेंट के आदेश को चुनौती देते हुए दाखिल की गई है.

न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक कोर्ट की टिप्पणी पर कानूनी मेट्रोलॉजी के नियंत्रक अकुन सभरवाल ने कहा कि मल्टीप्लेक्स और बाकी सिनेमा के मालिकों का कोर्ट जाना कंज्यूमर एक्ट के खिलाफ है. हम कानून का सच्चाई से पालन करेंगे. याचिकाकर्ताओं के लिए उपस्थित सीनियर काउंसिल एस निरंजन रेड्डी ने कहा कि पैकिंग की गई खाने की चीजों पर मेट्रोलॉजी डिपार्टमेंट द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों पर कोई आपत्ति नहीं थी लेकिन बिना पैकिंग की खाने की चीजों पर लगाए प्रतिबंध उचित नहीं है.

इस मामले में जज ने कहा कि यह कैसे संभव है कि दो समोसे के खरीदने पर और उन्हें पेपर प्लेट में परोसने पर स्टीकर की घोषणा की जाए. अगर ऐसा किया जाता तो प्रिंट किए गए स्टीकर और बाकी खर्चों का भार ग्राहकों पर आ जाता. आगे समोसे के मूल्य में वृद्धि हो सकती है. इसमें कुछ भी गलत नहीं है अगर ग्राहकों द्वारा खरीदी गईं वस्तुओं का बिल देना अनिवार्य किया गया है.

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