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दिल्ली मेट्रो: जब 7 रुपए के टिकट से हुई थी सुहाने सफर की शुरुआत

वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर में मेट्रो का दायरा 230 किमी से अधिक के दायरे में फैल चुका है. मेट्रो यहां की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग बन चुकी है

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Dec 25, 2017 04:20 PM IST

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दिल्ली मेट्रो: जब 7 रुपए के टिकट से हुई थी सुहाने सफर की शुरुआत

क्रिसमस डे और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के 93वें जन्मदिन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली-एनसीआर के लोगों को मजेंटा लाइन मेट्रो का तोहफा दिया है. देश में पहली चालक रहित (ड्राइवरलेस) मेट्रो ट्रेन का आगाज पीएम मोदी ने कर दिया है. 38.23 किलोमीटर लंबी यह मेट्रो लाइन नोएडा के बॉटनिकल गार्डेन से दिल्ली के जनकपुरी वेस्ट तक जाएगी.

पीएम मोदी ने सोमवार को मेट्रो फेज-3 प्रोजेक्ट के पहले भाग 12.64 किलोमीटर बॉटनिकल गार्डेन से कालकाजी तक के परियोजना का उद्घाटन किया है. यात्रियों के लिए 12.64 किलोमीटर का यह सफर अब महज 19 मिनट में पूरा कर लिया जाएगा.

Delhi Metro Magenta Line

दिल्ली मेट्रो फेज-3 प्रोजेक्ट के तहत सोमवार से मजेंटा लाइन की शुरूआत हुई है (फोटो: फेसबुक से साभार)

दिल्ली मेट्रो का यह पहला ऐसा रूट होगा, जिसको ऑटोमैटिक ऑपरेट किया जाएगा. भारत में यह योजना अगर सफल हुई तो और जगहों पर भी इसे आजमाया जा सकता है.

मजेंटा लाइन से बॉटनिकल गार्डेन से कालकाजी मंदिर की दूरी मात्र 19 मिनट में पूरी होगी 

नोएडा के बॉटनिकल गार्डेन से दिल्ली के कालकाजी मेट्रो स्टेशन की दूरी इस लाइन के जरिए महज 19 मिनट में तय कर ली जाएगी. कालकाजी से हरियाणा के फरीदाबाद की दूरी में भी 14.64 किलोमीटर की कमी आ जाएगी. सोमवार शाम 5 बजे से यह सेवा आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा. यह सेवा शुरू होने के बाद मजेंटा मेट्रो लाइन दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों का समय और किराए दोनों की बचत होगी.

भारत में मेट्रो के बारे में कहा जाता है कि यह दुनिया के आधुनिकतम और सर्वश्रेष्ठ मेट्रो परिवहन व्यवस्थाओं में से एक है. दिल्ली में सबसे पहले मेट्रो की शुरूआत 25 दिसंबर, 2002 को देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने जन्मदिन पर किया था. यह लाइन रिठाला से दिलशाद गार्डन को जोड़ती है, जिसकी दूरी 25.09 किलोमीटर है.

4 अक्टूबर, 2003 को तीस हजारी-त्रिनगर और बाद में 31 मार्च, 2004 को शाहदरा-दिलशाद गार्डेन रूट का उद्घाटन भी एनडीए सरकार में किया गया.

आपको बता दें कि दिल्ली में मेट्रो को लेकर वर्ष 1984 में ही डीडीए और भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय ने एक प्लान तैयार किया था, जिसमें दिल्ली की यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम तैयार करने की बात कही गई थी. सालों तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी थी. काफी जद्दोजहद के बाद वर्ष 1995 में दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) की स्थापना की गई.

DMRC

बीते 15 वर्षों में दिल्ली-एनसीआर में मेट्रो का दायरा बढ़कर 230 किलोमीटर तक पहुंच गया है

ई. श्रीधरन के नेतृत्व में 2002 में दिल्ली मेट्रो के पहले चरण का उद्घाटन किया गया

डीएमआरसी ने 1998 में दिल्ली में पहली रेल परियोजना पर काम करना शुरू किया था. मेट्रो मैन के नाम से जाने जाने वाले ई. श्रीधरन के कुशल नेतृत्व में साल 2002 में मेट्रो के पहले चरण का उद्घाटन किया गया. ई. श्रीधरन ने बहुत कम समय में दिल्ली मेट्रो के निर्माण का कार्य किसी सपने की तरह बेहद कुशलता और श्रेष्ठता के साथ पूरा कर दिखाया. उस समय कहा जाता था कि दिल्ली जैसे शहरों में मेट्रो चलाना असंभव सा काम है.

दिल्ली के साथ-साथ श्रीधरन ने कोच्चि और लखनऊ मेट्रो का काम भी बड़ी कुशलता से कर दिखाया. देश के अन्य कई शहरों में भी मेट्रो सेवा शुरू करने के पीछे श्रीधरन का ही दिमाग कहा जाता है.

श्रीधरन की कार्यशैली की सबसे बड़ी खासियत यह थी एक निश्चित योजना के तहत निर्धारित समय सीमा के भीतर काम को पूरा कर दिखाना. समय के बिल्कुल पाबंद श्रीधरन की इसी कार्यशैली ने भारत में सार्वजनिक परिवहन का चेहरा पूरी तरह से बदल दिया.

भारत की पहली सर्वाधिक आधुनिक रेलवे सेवा कोंकण रेलवे के पीछे भी ई श्रीधरन का दिमाग, योजना और कार्यप्रणाली रही है. भारत की पहली मेट्रो सेवा कोलकाता मेट्रो की योजना भी उन्हीं की देन है. साल 2011 में ई. श्रीधरन के उत्तराधिकारी के रूप में मंगू सिंह की नियुक्ति की गई है.

Modi and Turnbull travel in Metro

दिल्ली मेट्रो में सफर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री माइकल टर्नबुल

डीएमआरसी ने दिल्ली में मेट्रो के काम को तीन चरणों में बांट दिया था. पहले चरण के तीन लाइनों के लिए साल 2006 तक का लक्ष्य रखा गया. दूसरे चरण के लिए साल 2011 का लक्ष्य रखा गया और तीसरे चरण के लिए साल 2018 तक का लक्ष्य रखा गया.

पूर्व पीएम वाजपेयी ने भूमिगत रेलगाड़ी में सफर कर उसका उद्घाटन किया था

वर्ष 2002 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देश की पहली भूमिगत रेलगाड़ी में खुद सफर कर उसका उद्घाटन किया था. 8 किलोमीटर लंबा यह हिस्सा पूर्वी दिल्ली के शहादरा से उत्तरी दिल्ली के तीस हजारी के बीच शुरू हुआ था. उस समय इसका एक तरफ के टिकट का किराया 7 रुपया था.

आपको बता दें कि देश में सबसे पहले कोलकाता में मेट्रो रेल सेवा की शुरूआत हुई थी, लेकिन यह अपनी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाई. कोलकाता मेट्रो को लेकर जिस तरह की सफलता की उम्मीद दी थी वह पूरी नहीं हो पाई. ऐसे में दिल्ली मेट्रो को लेकर भी संदेह जताए जा रहे थे, लेकिन दिल्ली मेट्रो के बाद यह संदेह विश्वास में बदलने लगा.

देखा जाए तो दिल्ली के लोगों के लिए मेट्रो का ख्वाब साल 2002 में ही पूरा हो गया था. अब बारी थी देश के और शहरों में मेट्रो चलाने की. देश की शहरी विकास मंत्रालय दिल्ली के साथ-साथ देश के और शहरों में भी मेट्रो की शुरूआत कर एक लगातार और अनोखी पहल कर रही है.

कहा जा सकता है कि दिल्ली मेट्रो से शुरू हुआ यह सफर अब देश के कई राज्यों तक पहुंच गया है. चेन्नई, जयपुर, कोच्चि, हैदराबाद, लखनऊ, मुंबई और बेंगलुरू जैसे शहरों में भी मेट्रो की शुरूआत हो चुकी है.

Lucknow Metro launch

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ मेट्रो सेवा का उद्घाटन करते हुए

25 दिसंबर को दिल्ली मेट्रो अपना 15वां साल पूरा कर के अपने 16वें साल में प्रवेश करेगी. वर्तमान में दिल्ली में मेट्रो का दायरा 230 किलोमीटर के अधिक के दायरे में फैल चुका है. दिल्ली मेट्रो दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग बन चुकी है. दिल्ली-एनसीआर में लगभग 3 हजार ट्रेनें हर दिन लगभग 25 लाख लोगों को उनकी मंजिल तक पहुंचा रही है.

इंजीनियरिंग से जुड़ी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था

दिल्ली मेट्रो को शुरूआती दिनों में इंजीनियरिंग से जुड़ी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था. यमुना के ऊपर ब्रिज से लेकर सुरंग और तंग सड़कों से मेट्रो को ले जाने की चुनौतियां. इन सारी चुनौतियों का सामना करते हुए आज दिल्ली मेट्रो अपनी नई ऊचाइंयों पर पहुंच गई है.

पहले, दूसरे और तीसरे चरण का काम पूरा कर के दिल्ली मेट्रो अब चौथे और पांचवें चरण की दिशा में आगे बढ़ गई है. दिल्ली मेट्रो ने लक्ष्य रखा है कि अगले 5 वर्षों में दिल्ली को विश्व का सबसे लंबा मेट्रो नेटवर्क बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगी.

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