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कैसे पता करें कि आपके आस-पास कोई ब्लू व्हेल खेल रहा है या नहीं?

इस गेम को खेलने के लिए आपको कुछ वेबसाइट पर जाना पड़ता है. क्योंकि फेसबुक पर बहुत ज़्यादा लोग सक्रिय हैं इसलिए इस गेम से जुड़े ग्रुप दूसरी कम चर्चित वेबसाइट पर होते हैं

Animesh Mukharjee Animesh Mukharjee Updated On: Sep 04, 2017 12:00 PM IST

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कैसे पता करें कि आपके आस-पास कोई ब्लू व्हेल खेल रहा है या नहीं?

शनिवार को मध्यप्रदेश में 17 साल के एक छात्र ने आत्महत्या कर ली. दामोह में 11वीं में पढ़ने वाले सात्विक पांडे ने शनिवार शाम ट्रेन के सामने आकर जान दे दी. वो ब्लू गेम चैलेंज की आखिरी चुनौती पूरी कर रहा था. पिछले कुछ ही हफ्तों में ये गेम दुनिया भर में कई किशोरों की जान ले चुका है. इस गेम को बनाने वाले 21 साल के सायकलॉजी स्टुडेंट फिलिप बडेकिन को गिरफ्तार किया जा चुका है लेकिन ये खेल अभी भी जान ले रहा है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि कैसे पहचानें कि आपके आस-पास कोई ब्लू व्हेल चैलेंज तो नहीं खेल रहा.

डाउनलोड नहीं होता ये गेम

ब्लू व्हेल की सबसे खास (और खतरनाक भी) बात ये है कि ये गेम किसी भी तरह से डाउनलोड नहीं किया जा सकता है. अगर आप को किसी के फोन में, ऐप स्टोर पर रियल ब्लू गेम जैसा कोई लिंक मिलता है तो वो फर्जी लिंक है. इस गेम को खेलने के लिए आपको कुछ वेबसाइट पर जाना पड़ता है. क्योंकि फेसबुक पर बहुत ज़्यादा लोग सक्रिय हैं इसलिए इस गेम से जुड़े ग्रुप दूसरी कम चर्चित वेबसाइट पर होते हैं. रूस में ये खेल वी-कॉन्टेक्ट नाम की वेबसाइट पर खेला जा सकता था. फिलहाल इसपर रोक लग गई है.

शक हो तो हाथ और पैर चेक करिए

दुनिया में कई हिस्सों में व्हेल मछलियां समुद्र तटों पर आती हैं और उथले पानी या शिकारियों के हाथों में फंसकर जान दे देती हैं. ब्लू व्हेल को इसी घटना से उसका नाम मिला है. गेम खेलने वाले को 50 दिन में 50 चैलेंज पूरे करने होते हैं. इस खेल की चुनौतियां कुछ इस तरह से बनाई गई हैं कि खेलने वाले का आत्मविश्वास हर चैलेंज के बाद कम होता जाता है. इसके साथ ही उसके अंदर खुद को नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति बढ़ती जाती है. इस खेल की शुरुआती चुनौतियां हम आपको बता रहे हैं ताकि आप अपने आस-पास इस खेल को खेलने वालों की पहचान कर सकें.

अपने हाथ पर रेजर से कोई नंबर लिखो.

रोज पर सुबह 4.20 पर उठो और हॉरर फिल्में देखो.

अगर ब्लू व्हेल खेलना शुरू करना है तो अपने पैर पर यस लिखो.

अपने सोशल मीडिया स्टेटस में व्हेल लिखो या व्हेल की फोटो लगाओ.

छत की मुंडेर से बाहर की तरफ पैर लटकाकर बैठो.

सुबह 4.20 पर उठो और रेलवे लाइन के पास जाओ.

कुछ ऐसा करो कि बीमार पड़ जाओ.

किसी दूसरे व्हेल से मिलो.

आपका ऐडमिन आपको आपकी मौत की तारीख बताएगा, उसके लिए तैयार रहिए.

इसके बाद कई सीक्रेट टास्क होते हैं.

तय तारीख पर ऊंची इमारत से कूद कर जान दे दीजिए.

आखिर कैसे आत्महत्या तक पहुंच जाते हैं लोग

इंसान की मूल सोच है कि वो खुद को किसी भी कमजोरी से परे समझता है. ब्लू व्हेल के बारे में सुनकर हम सबके दिमाग में आया होगा कि एक बार खेल कर देखते हैं. क्योकि हम मानसिक तौर पर इतने मजबूत हैं कि इससे निकल जाएंगे. ब्लू व्हेल इसी फितरत को भड़काता है. इसके बाद परत दर परत आपको अपने अंदर खुद को नुकसान पहुंचाने की सोच विकसित करता है. अंत में आप इसके अंदर फंस जाते हैं.

सोशल मीडिया या किसी दूसरे माध्यम पर आपने मेंढक वाली एक कहानी तो सुनी ही होगी. मेढक को पकाने लिए लोग उसे ठंडे पानी से भरी पतीली में रख कर चूल्हे पर बैठा देते हैं. पानी धीरे-धीरे गर्म होता है और मेढक उस बढ़ते तापमान को सहने में अपनी ऊर्जा लगाता रहता है, उछलकर बाहर नहीं जाता. एक समय के बाद पानी खौलने लगता है मगर तब तक मेढक इस लायक नहीं रहता कि बाहर निकल सके.

सेल्फी लेते हुए मरने वाले कई हादसे आपने सुने ही होंगे. दुनिया भर में ऐसे भी कई लोग हैं जो कई खतरनाक जगहों पर ही सेल्फी खींचते हैं. एमटीवी पर एक शो आता है ‘रोडीज़’ क्योंकि शो को बनाने वाले लोग कानूनी और नैतिक रूप से ज़िम्मेदार होते हैं तो उसमें हिस्सा लेने वालों की हिफाज़त का खास खयाल रखा जाता है. मगर उसके टास्क और उन्हें पूरा करने वालों की सोच को एक बार दुबारा देखिए.

रोडीज़ का हिस्सा बनने के लिए लोग सड़क पर पैंट के ऊपर अंडरवियर पहनकर चले हैं, शाकाहारी होकर भी कीड़े मकोड़े खा चुके हैं, खुद को एक सीमा तक नुकसान पहुंचाने या बेइज़्ज़त होने वाले कई काम कर चुके हैं. शो के जिम्मेदार ऑर्गनाइज़र को हटाकर किसी गुमनाम सनकी टीनएजर को रख दीजिए. ब्लू व्हेल चैलेंज कुछ-कुछ वैसा ही है.

ब्लू व्हेल चैलेंज का फॉर्मैट कुछ ऐसा है कि सरकारों या कंपनियों का इस पर पूरी तरह से रोक लगा पाना संभव नहीं, इसलिए अपने आस-पास के लोगों खासकर किशोरों पर नज़र रखिए. एक शेर है, ‘हम सभी हैं त्रासदी के पात्र हममें, खुदकुशी हर शख्स की संभावना है’

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