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साइबर क्राइम को कंट्रोल करने में क्यों लाचार दिखती है देश की पुलिस व्यवस्था

गृह मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों को साइबर अपराध पर नकेल कसने के लिए विशेष कदम उठाने की हिदायत दे रखी है.

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Jun 08, 2018 09:32 AM IST

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साइबर क्राइम को कंट्रोल करने में क्यों लाचार दिखती है देश की पुलिस व्यवस्था

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने पिछले साल 30 नवंबर को एक रिपोर्ट जारी की थी. देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा जारी ‘क्राइम इन इंडिया- 2016’ नाम की इस रिपोर्ट में कई ऐसे आंकड़े सामने आए थे, जो काफी हैरान करने वाले थे. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद साइबर क्राइम की बढ़ती संख्या पर देश में विशेष तौर पर मंथन का दौर शुरू हो गया था. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद से ही कई राज्य सरकारों ने साइबर क्राइम पर नकेल कसने के लिए कई कारगर कदम उठाने शुरू कर दिए थे.

हाल के दिनों में देश की हाईटेक पुलिस में शुमार की जाने वाली दिल्ली पुलिस ने भी साइबर क्राइम को लेकर कई कदम उठाए हैं. साइबर अपराध की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने अपने पुरानी साइबर सेल को नए सिरे से पुनर्गठित करने की शुरुआत कर दी है. दिल्ली के हर थाने में एक साइबर तकनीकी अधिकारी की नियुक्ति से लेकर आधुनिक तकनीक के सारे साजो-सामान मुहैया कराने की बात कही जा रही है.

बता दें कि इस साल दिल्ली पुलिस की सलाना प्रेस वार्ता में भी पुलिस कमिश्नर ने साइबर अपराध पर विशेष तौर पर चिंता जाहिर की थी. दिल्ली में साइबर अपराध को लेकर इस समय सामान्य तौर पर ही काम हो रहा है. पुलिसकर्मी तकनीकी तौर पर साइबर क्राइम से ज्यादा परिचित नहीं हैं. तकनीकी तौर पर प्रशिक्षित नहीं होने के कारण दिल्ली में साइबर क्राइम की जांच में तेजी नहीं आ पा रही है.

दूसरी तरफ साइबर अपराधी नई-नई तकनीक ईजाद कर ठगी और कई तरह के साइबर अपराध को अंजाम दे रहे हैं. दिल्ली में पुलिसकर्मी को पर्याप्त प्रशिक्षण के अभाव में एक केस की जांच में सालों लग जाते हैं. साइबर अपराध में जांच प्रभावित होने से शिकायतों का अंबार भी लग रहा है. इसी को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस ने 500 से भी अधिक पुलिसकर्मियों को साइबर अपराध की ट्रेनिंग देने की व्यवस्था शुरू कर दी है.

दिसंबर 2017 के जारी आंकड़े

दिसंबर 2017 के जारी आंकड़े

देश के गृह मंत्रालय ने भी सभी राज्य सरकारों को साइबर अपराध पर नकेल कसने के लिए विशेष कदम उठाने की हिदायत दी है. देश के दूसरे हिस्सों में भी साइबर अपराध को लेकर विशेष जांच शाखा बनाने की कवायद शुरू हो गई है. अभी हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस को विशेष टीम गठित करने का निर्देश जारी किया था.

बता दें कि पिछले साल एनसीआरबी की सालाना रिपोर्ट में भी यह खुलासा हुआ था कि साल 2015 के मुकाबले 2016 में अपराध का ग्राफ ढाई फीसदी ज्यादा बढ़ा है. साल 2016 में देश में आईपीसी के तहत 29 लाख 75 हजार 711 और स्पेशल एंड लोकल लॉ (एसएलएल) के तहत 18 लाख 55 हजार 804 मामले दर्ज हुए थे.

अगर बात करें साइबर क्राइम की तो साल 2015 की तुलना में 2016 में साइबर क्राइम काफी बढ़ा है. साल 2016 में उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 2 हजार 639 मामले सामने आए हैं. वहीं महाराष्ट्र में 2 हजार 380 मामले निकल कर आए हैं.

एनसीआरबी की रिपोर्ट में कहा गया था कि साइबर क्राइम के लिहाज से मुंबई देश का सबसे असुरक्षित शहर है. नोटबंदी के बाद से साइबर क्राइम में काफी तेजी आई है. जहां साल 2014 में साइबर क्राइम के कुल 9 हजार 622 मामले दर्ज किए गए. वहीं 2015 में यह आंकड़ा बढ़कर 11 हजार 592 तक पहुंच गया.

साल 2016 में साइबर क्राइम का यह आंकड़ा 12 हजार 317 तक पहुंच चुका है. जानकारों का मानना है कि जब साल 2017-18 का क्राइम रिपोर्ट का डाटा एनसीआरबी लेकर आएगा तो साइबर क्राइम में पहले से कहीं ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिलेगी. क्योंकि, नोटबंदी के बाद से सबसे ज्यादा साइबर क्राइम की शिकायत मिल रही है. देश में डिजिटलाइजेशन के सामने साइबर क्राइम एक सबसे बड़ी बाधा बन कर खड़ा है.

पिछले दिनों ही कुछ साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट ने कहा था कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में हर 10 मिनट में एक साइबर अपराध होता है और साल 2017 के पहले छह महीनों में ऐसी 22 हजार 782 से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं.

साइबर कानून और ई वाणिज्य के क्षेत्र के कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि साइबर अपराध में कानून के मुकाबले तकनीक कहीं ज्यादा तेजी से चल रही है. जिससे यह समझना जरूरी हो गया है कि साइबर अपराध क्यों होते हैं और इसके पीछे कौन लोग हैं. हाल ही में सामने आए कैंब्रिज एनालिटिका विवाद के बाद तो इसे समझना और भी जरूरी हो गया है.

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फेसबुक के कर्ता-धर्ता मार्क जुकरबर्ग ने हाल ही में स्वीकार किया था कि एक ऐप ने करीब 5.6 लाख भारतीय यूजर्स का डेटा इकट्ठा कर ब्रिटेन की कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका के साथ साझा किया था, जिसके बाद भारत में ऑनलाइन निजता को लेकर चिंता बढ़ने लगी थी. फेसबुक पर कई देशों के नागरिकों की निजता को भंग करने का आरोप है. इसको लेकर मार्क जुकरबर्ग अमेरिका से लेकर ब्रिटेन की संसद में भी सफाई पेश कर चुके हैं.

दूसरी तरफ भारत में इन दिनों फेक न्यूज यानी फर्जी और झूठी खबरें लोगों की जिंदगी और कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा बनती जा रही हैं. फेक न्यूज के जरिए समाज में मतभेद पैदा करने के लिए असामाजिक तत्व आजकल सबसे ज्यादा सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं. ऐसे में देश के हर राज्य को इस वक्त साइबर एक्सपर्ट्स की जरूरत है.

सरकार और कुछ स्वयंसेवी संगठनों ने भी इस दिशा में मदद के लिए कदम बढ़ाए हैं. खासकर महिलाओं और लड़कियों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है. सोशल मीडिया पर लड़कियों और महिलाओं को सॉफ्ट टार्गेट समझने वाले लोगों को सबक सिखाने की तैयारी की जा रही है.

महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट, ट्रोल और धमकी जैसी घटनाओं को अंजाम देने वालों के खिलाफ एक पूरी फौज खड़ी की जा रही है. इसके लिए जल्द ही राष्ट्रीय महिला आयोग साइबर पीस फाउंडेशन के साथ मिलकर 60 हजार लड़कियों और महिलाओं को ट्रेंड करेगा.

ये 60 हजार लड़कियां और महिलाएं पहले ऑनलाइन अपराधों को रोकने के लिए सुरक्षित डिजिटल उपयोग और खासतौर पर सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, वाट्सएप, इंस्टाग्राम, ट्विटर आदि एप्लीेकेशन का इस्तेमाल, सेफ मेलिंग की ट्रेनिंग लेंगी. इसके बाद ऑनलाइन अपराधों की शिकार हो रहीं अन्य महिलाओं को इससे बाहर निकलने और इंटरनेट को सुरक्षित रूप से इस्तेमाल करने में भी मदद करेंगी.

महिलाओं और लड़कियों को ट्रेनिंग देने की तैयारी कर रहा राष्ट्रीय महिला आयोग 18 जून 2018 से अपने इस पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत करने जा रहा है. इन लड़कियों को साइबर पीस फाउंडेशन की टीम ट्रेंड करेगी.

बता दें कि साइबर अपराध के मामले में भारत का स्थान विश्व में तीसरा है. भारत में सबसे ज्यादा साइबर अपराध की घटनाएं मुंबई में घटती हैं. इस समय मुंबई सहित भारत के सभी राज्यों की पुलिस साइबर क्राइम से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम नहीं हैं, जिससे साइबर अपराध की संख्या में लगातार तेजी देखी जा रही है.

साइबर क्राइम को लेकर इन सरकारी कदमों के बावजूद जानकार मानते हैं कि अभी भी भारत जैसे देशों में साइबर क्राइम पर कंट्रोल कर पाना एक टेढ़ी खीर है. भारत जैसे देशों में साइबर क्राइम के मामले में सजा की दर बढ़ाने के लिए पुलिस को निचले स्तर से लेकर ऊपरी स्तर तक बेहतर ट्रेनिंग देने की जरूरत और एक दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत है.

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