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शिवसेना के ‘राहुल-प्रेम’ को कितनी गंभीरता से लेगी कांग्रेस ?

शिवसेना की तारीफ से कांग्रेस के भावी अध्यक्ष गदगद होंगे, उन्हें अपनी तारीफ से ज्यादा खुशी बीजेपी पर शिवसेना के हमले पर हो रही होगी.

Amitesh Amitesh Updated On: Oct 27, 2017 04:49 PM IST

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शिवसेना के ‘राहुल-प्रेम’ को कितनी गंभीरता से लेगी कांग्रेस ?

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की हाल ही में आई किताब में शिवसेना को लेकर कांग्रेस के नजरिए की एक झलक मिलती है. प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब ‘द कोलिशन इयर्स’ में जिक्र किया है कि 2012 के राष्ट्रपति चुनाव के वक्त शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के साथ उनकी मुलाकात को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी नाराज थीं.

प्रणब मुखर्जी के मुताबिक, ‘कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी 13 जुलाई 2012 को उनके मुंबई दौरे के वक्त बाल ठाकरे से मुलाकात के खिलाफ थीं.’ मुखर्जी ने कहा है कि वो बाल ठाकरे से एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार की सलाह के बाद मिलने गए थे.

दरअसल, प्रणब मुखर्जी 2012 में ही 13 जुलाई को अपने राष्ट्रपति चुनाव के सिलसिले में समर्थन जुटाने मुंबई गए हुए थे. उस वक्त एनडीए में होने के बावजूद शिवसेना ने यूपीए के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति चुनाव में समर्थन देने का फैसला किया था.

BAL THAKRE

इस प्रसंग का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा है कि ‘मैंने सोनिया गांधी की नामंजूरी के बावजूद ठाकरे से मिलने का निर्णय किया, क्योंकि मुझे ऐसा लगा कि जिस व्यक्ति ने मेरी उम्मीदवारी का समर्थन करने में अपने पारंपरिक गठबंधन साझीदार का साथ छोड़ दिया हो, उसे अपमानित महसूस नहीं करना चाहिए.’

प्रणब मुखर्जी ने उस संदर्भ का जिक्र करते हुए कहा है कि दिल्ली वापस लौटने के बाद गिरिजा व्यास ने मुझसे मुलाकात कर बताया कि बाल ठाकरे के साथ मेरी मुलाकात को लेकर सोनिया गांधी और अहमद पटेल खिन्न हैं. लेकिन, उस वक्त मुझे शरद पवार जो कि यूपीए के घटक दल एनसीपी के महत्वपूर्ण नेता थे, उनकी सलाह की संवेदनशीलता को ध्यान में रखना था.’

खांटी कांग्रेसी रहे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब दा की इस बात से साफ है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी शिवसेना के साथ किस कदर दूरी बनाकर रहना चाहती थीं. राष्ट्रपति चुनाव में शिवसेना के समर्थन से परहेज न करने के बावजूद उसे अछूत दिखाने की कोशिश कांग्रेस की उस रणनीति का परिचायक है जिसमें वो अपनी छवि से समझौता नहीं करना चाहती है.

या फिर दूसरे शब्दों में यह भी कह सकते हैं कि कांग्रेस ने शिवसेना का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल तो कर लिया लेकिन, उसको अपने पास फटकने भी नहीं दिया. कांग्रेस को लगता है कि शिवसेना की हिंदुत्व की राजनीति उसकी अपनी राजनीति में पलीता लगा सकती है. लिहाजा अबतक कांग्रेस शिवसेना से दूरी बनाकर ही चल रही है.

लेकिन, अपनी सहयोगी बीजेपी से खार खाई शिवसेना शायद अभी भी मुगालते में है. शिवसेना की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुकाबले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की तरफदारी हो रही है.

शिवसेना के राज्यसभा सांसद और प्रवक्ता संजय राउत ने कांग्रेस उपाध्यक्ष की तारीफ करते हुए कहा है कि ‘राहुल ने कांग्रेस को नेतृत्व दिया है. राहुल को सुनने लोग आते हैं.’ एक निजी टीवी चैनल के कार्यक्रम में संजय राउत ने कहा है कि ‘राहुल गांधी में देश का नेतृत्व करने की क्षमता है जबकि मोदी लहर अब खत्म हो रहा है.’

संजय राउत के इस बयान से साफ लग रहा है कि शिवसेना इस वक्त बीजेपी के खिलाफ अपनी भड़ास निकाल रही है. महाराष्ट्र की राजनीति में बीजेपी से बड़ी भूमिका में रहने वाली शिवसेना 2014 के विधानसभा चुनाव के बाद से ही एनडीए में नंबर दो की भूमिका में आ गई है. बस यही बात शिवसेना को नागवार गुजर रही है.

Uddhav Thackeray

रह-रह कर शिवसेना का अपनी ही सरकार के खिलाफ बोलते रहना तो अबतक जारी था, लेकिन, कांग्रेस के भावी अध्यक्ष राहुल गांधी की शान में कसीदे पढ़ने से उसकी तरफ से बीजेपी को बैकफुट पर धकेलने की कोशिश नजर आ रही है.

शिवसेना की ‘अपनी बीजेपी’ से तनातनी और महाराष्ट्र में उसकी जनाधार पर बीजेपी की पैनी नजर ने इस हिंदुत्व की झंडाबरदार पार्टी को भी परेशान कर दिया है. परेशानी का आलम तो ऐसा है कि शिवसेना गुड़ खाते हुए भी गुलगुल्ले से परहेज करते दिखना चाहती है. शिवसेना इस वक्त केंद्र और राज्य दोनों सरकारों में शामिल होकर बीजेपी को समर्थन दे रही है, लेकिन, अपनी ही सरकार की नीति की आलोचना की आदत शिवसेना की खीझ ही जान पड़ती है.

गुजरात विधानसभा चुनाव में इस वक्त लड़ाई मोदी बनाम राहुल की ही दिख रही है. बीजेपी और मोदी को गुजरात में घेरने की कोशिश में लगे राहुल के लगातार दौरों ने बीजेपी को भी सजग कर दिया है. लेकिन, राहुल को अब ताकत बीजेपी के सहयोगियों से ही मिल रही है. शिवसेना की तारीफ से कांग्रेस के भावी अध्यक्ष गदगद होंगे, उन्हें अपनी तारीफ से ज्यादा खुशी बीजेपी पर शिवसेना के हमले पर हो रही होगी.

लेकिन, शिवसेना पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की लिखी बातों पर गौर कर ले तो  उसके सियासी सेहत के लिए बेहतर रहेगा, जिसमें कांग्रेस के शिवसेना के प्रति नजरिए की झलक दिखती है. वरना, कांग्रेस को लेकर उसका एकतरफा प्यार शायद ही कभी परवान चढ़ पाए.

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