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प्रदूषण को लेकर मौसम की मेहरबानियों पर कब तक चलेगा काम?

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मौसम विभाग से ऐसा चेतावनी सिस्टम विकसित करने को कहा है जिसमें धूल आने के बारे में पहले से ही सूचना मिल जाए. जिससे समय रहते बचाव के कुछ प्रयास किए जा सकें

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Nov 21, 2017 03:01 PM IST

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प्रदूषण को लेकर मौसम की मेहरबानियों पर कब तक चलेगा काम?

कुछ दिनों की राहत के बाद एक बार फिर दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का लेवल दोबारा से ‘बहुत खराब’ स्तर पर पहुंच गया है.

प्रदूषण के खतरनाक स्तर को लेकर पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) ने राज्यों के ढुलमुल रवैये पर सवाल खड़े किए हैं.

देखा जाए तो दिवाली के कुछ दिन पहले से ही दिल्ली-एनसीआर स्मॉग चैंबर में तब्दील होना शुरू हो गया था. प्रदूषण के बढ़ते स्तर को लेकर हरियाणा-पंजाब में पराली जलाने से लेकर पाकिस्तान और पश्चिम एशिया के देशों को जिम्मेदार ठहराया गया. मगर, इसके बावजूद प्रदूषण को लेकर कोई ठोस पहल किसी स्तर पर नहीं की गई.

पिछले दिनों दिल्ली-एनसीआर में हल्की बारिश ने प्रदूषण के स्तर में थोड़ी राहत जरूर दी, लेकिन जैसे ही बारिश का प्रभाव मौसम से हटा प्रदूषण का लेवल एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया.

इसे देखते हुए सरकार की कई एजेंसियां फिर हरकत में आ गई हैं. सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित ईपीसीए ने एक बार फिर से ग्रेडेड रिस्पांस एक्सन प्लान (ग्रेप) को लागू करने के मुद्दे पर दिल्ली-एनसीआर के राज्यों की नियत पर सवाल खड़े किए.

ईपीसीए के चेयरमैन भूरेलाल यादव ने दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को पत्र कर लिखा है. ईपीसीए ने राज्य सरकारों को दोबारा से स्मॉग की स्थिति नहीं बनने की दिशा में सख्त कदम उठाने की मांग की है.

ईपीसीए के चेयरमैन भूरेलाल यादव का कहना है कि जब तक ग्रेप प्रणाली दिल्ली-एनसीआर में ठीक से लागू नहीं कर दिया जाता तब तक स्थिति बेहतर बनना मुश्किल काम है. दिल्ली-एनसीआर की स्थिति बेहतर बनाने के लिए दिल्ली से सटे चार राज्यों के मुख्य सचिवों को व्यवस्था दुरुस्त करने को कहा गया है.

वातावरण में प्रदूषण की सबसे अधिक मार बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ती है

वातावरण में प्रदूषण घुलने का सबसे अधिक असर बच्चों और बुजुर्गों पर होता है

धूल आने के बारे में पहले से सूचना देने वाला सिस्टम का विकास करे मौसम विभाग

दूसरी तरफ केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने भी मौसम विज्ञान विभाग को एक ऐसा चेतावनी सिस्टम विकसित करने को कहा है जिसमें धूल आने के बारे में पहले से ही सूचना मिल जाए.

सीपीसीबी के सदस्य सचिव ए सुधाकर ने मीडिया को बताया, ‘पिछले कुछ दिनों से दिल्ली-एनसीआर में जो हालात हैं वह कहीं न कहीं खाड़ी देशों में उठे धूल और पाकिस्तान से लेकर पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने से निकलने वाले धुआं को लेकर है. हमारे यहां पाकिस्तान या पश्चिमी देशों से धुआं आने में चार से पांच दिन का वक्त लगता है. ऐसे में हमने मौसम विज्ञान विभाग से अनुरोध किया है कि अगर एक-दो दिन पहले इस बारे में सूचना मिलने वाली सिस्टम को विकसित कर लिया जाए तो बचाव के कुछ प्रयास किए जा सकते हैं.’

पिछले दिनों बारिश के बाद कुछ दिनों तक एअर इंडेक्स क्वालिटी लेवल (एआईक्यू) में भी सुधार देखने को मिल रही थी, लेकिन मंगलवार सुबह से एक बार फिर प्रदूषण का लेवल बहुत खराब स्तर पर पहुंच गया है.

मंगलवार को दिल्ली-एनसीआर में पीएम 2.5 अपने सामान्य स्तर 60 के मुकाबले 304 मापी गई है. जबकि पीएम 10 अपने सामान्य स्तर 100 के मुकाबले 215 मापी गई.

प्रदूषण के बहुत खराब स्तर को देखते हुए एक बार फिर से एडवायजरी की जा रही है. खास कर फेफड़े, ह्रदय, सांस और हड्डी के रोगियों को खुली हवा में जाने से परहेज करने को बोला जा रहा है.

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