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हुदहुद से लेकर गाजा तक, कैसे रखे जाते हैं तूफानों के इतने रोचक नाम?

अटलांटिक क्षेत्र में 'हरिकेन' का नाम देने की परंपरा 1953 से ही जारी है जो मियामी के नेशनल हरिकेन सेंटर ने शुरू की थी

Updated On: Nov 15, 2018 03:15 PM IST

FP Staff

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हुदहुद से लेकर गाजा तक, कैसे रखे जाते हैं तूफानों के इतने रोचक नाम?

पिछले दिनों ओडिशा और आंध्र प्रदेश में चक्रवाती तूफान 'तितली' के कोहराम मचाने के बाद अब तमिलनाडु में गाजा तूफान का खतरा मंडरा रहा है. चक्रवाती तूफान गाजा गुरुवार को कुड्डलूर और पंबान के बीच दस्तक दे सकता है, जिससे तमिलनाडु में भारी बारिश होने की आशंका है. बताया जा रहा है कि इस दौरान 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं और तेज बारिश होने की संभावना है.

इस तूफान के चलते तमिलनाडु सरकार पहले ही 30,500 बचावकर्मी तैनात करने की घोषणा कर चुकी है, वहीं तंजौर, तिरुवरुर, पुडुकोट्टई, नागपट्टिनम, कुड्डलूर और रामनाथपुरम के कलेक्टरों ने गुरुवार को स्कूलों और कॉलेजों की छुट्टी घोषित कर दी है. चक्रवाती तूफान के मद्देनजर पुडुचेरी और कराईकल क्षेत्रों में गुरुवार को सभी शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे.

वैसे सोचने वाली बात है कि जितने खतरनाक ये तूफान होते हैं उतने ही दिलचस्प इनके नाम भी होते हैं. जैसे हुदहुद, लेला, निलोफर, वरदा, मारूथा, तितली और अब गाजा. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन तूफानों के इतने रोचक नाम क्यों रखे जाते हैं या फिर कैसे होता है इन तूफानों का नामकरण.आइए हम आपको बताते हैं.

एक साइक्लोन, एक हरिकेन और टाइफून से कैसे अलग है?

अगर कोई भी चक्रवातीय तूफान अटलांटिक महासागर के क्षेत्र में आता है तो इसे 'हरिकेन' कहते हैं. वहीं अगर ऐसा ही चक्रवातीय तूफान प्रशांत महासागर के क्षेत्र में आए तो इसे 'टाइफून' कहा जाएगा. और अगर चक्रवातीय तूफान हिंद महासागर के क्षेत्र में आता है तो इसे 'साइक्लोन' कहा जाता है. अब आप समझ गए होंगे कि क्यों अमेरिका में 'हरिकेन', जापान में 'टाइफून' और भारत में 'साइक्लोन' आता है. और हर बार जब ऐसा कोई साइक्लोन हिंद महासागर के उत्तरी हिस्से से टकराता है, भारतीय मौसम विभाग इसे एक नाम देता है.

कैसे रखा जाता है इन तूफानों का नाम?

अटलांटिक क्षेत्र में 'हरिकेन' का नाम देने की परंपरा 1953 से ही जारी है जो मियामी के नेशनल हरिकेन सेंटर ने शुरू की थी. फिलहाल विश्व मौसम विभाग ने अलग-अलग मौसम के हिसाब से पूरी दुनिया को 9 हिस्सों में बांट रखा है.

किसी तूफान का नाम क्या होगा, यह इसपर निर्भर करता है कि वह तूफान कहां पर यानी किस हिस्से में आ रहा है

हिंद महासागर के उत्तरी हिस्सों में आने वाले इन साइक्लोन का ऐसा नाम रखे जाने का चलन साल 2000 में शुरू हुआ. इस काम के लिए 'विश्व मौसम विभाग' ने 'भारतीय मौसम विभाग' को चुना गया. ओमान से लेकर थाईलैंड तक आठ देशों को 8-8 नामों की एक लिस्ट भेजने को कहा गया. जिसे इन देशों ने 2004 तक भेज दिया. इसके बाद इन आठों देशों को अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षरों के हिसाब से रखा गया. क्रम ये बना था- बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड. फिर इन देशों के नीचे इनके दिए 8 नामों को लगा दिया गया. कुल 64 नाम हो गए थे. 'तितली' इनमें से 54वां है. अभी आगे के 10 तूफानों के नाम और बचे हैं.

इसी वजह से साइक्लोन 'वरदा' जो दिसंबर, 2016 में चेन्नई में आया था, उसे दिया हुआ नाम पाकिस्तान का था. अरबी में 'वरदा' का मतलब होता है लाल गुलाब. 2017 की शुरुआत में आया तूफान 'मारुथा' श्रीलंका का दिया नाम था. इसके बाद 'मोरा' नाम का तूफान आया, जिसका नाम थाईलैंड का दिया था. 2017 के आखिरी में आया तूफान 'ओकी', बांग्लादेश का दिया नाम था. इससे पहले जो 'तितली' नाम का तूफान भारत में आया है, यह भी भारत का दिया नाम नहीं है, पाकिस्तान ने इसका नाम सुझाया था.

(न्यूज 18 के इनपुट के साथ)

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