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ऑनर किलिंग के आरोप में उजड़ा परिवार, पनीली आंखों से उजले भविष्य का इंतजार

ऑनर किलिंग के लिए बदनाम रहे हरियाणवी समाज को इससे जुड़े अपराध ज्यादा चौंकाते नहीं हैं. लेकिन ये मर्ज अब हरियाणा से निकलकर दूसरे राज्यों तक फैल चुका है

Alpyu Singh Updated On: May 13, 2018 09:20 AM IST

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ऑनर किलिंग के आरोप में उजड़ा परिवार, पनीली आंखों से उजले भविष्य का इंतजार

साहित्यकार उदय प्रकाश की मशहूर कहानी मैंगोसिल में एक किरदार है सूरी, जिसे 'मैंगोसिल' नाम की लाइलाज बीमारी है. मर्ज ये है कि बच्चे का सिर रोजाना अपने आप बड़ा होता रहता है. डॉक्टरों के पास बीमारी का कोई इलाज नहीं. जादुई यथार्थवाद से जुड़ी इस कहानी का एक कोना, एक मेटाफर से भी जुड़ा है, जिसके मुताबिक सूरी रोज अपने आस-पास इतना गलत होते देखता है कि उसका सिर इन नकारात्मक घटनाओं को इकट्ठा करता रहता है, जो उसके सिर के आकार के बढ़ने की वजह बनती है. इसलिए सिर का आकार बढ़ता है, रोज़ बढ़ता है.

सोनीपत के मतंड गांव के धज्जा की आंखें आपको मैंगोसिल की याद दिला देंगी. अनगनित सिलवटों के बीचों-बीच दो छोटी लेकिन गहरी आंखों में तकलीफ भरी खाई है, जो शायद रोज और गहरी हो रही है. मैंगोसिल के सिर के आकार की ही तरह. आंखों में लगातार एक नमी की परत भी बनी रहती है, जिसे पास के कस्बे के डॉक्टर लाइलाज बता चुके हैं. धज्जा राम कहते हैं, 'इब इनमें ये पानी सूखता को नीं (इन आंखों का पानी अब सूखने वाला नहीं).' डॉक्टर भी मना कर चुके हैं.

17 साल की पोती की ऑनर किलिंग के आरोप में घर सूना

वाकई धज्जा राम की आंखें बहुत कुछ देख चुकी हैं. अपनी सत्रह साल की पोती की ऑनर किलिंग (जिसे परिवार नेचुरल डेथ कहता है), लगभग पूरे परिवार का जेल जाना, गांव वालों की बेरूखी,कोर्ट कचहरी के चक्कर, जेल में मुलाकातों के दौर, एक कमरे वाले इस घर में फैली मनहूसियत, दो साल पुरानी वो सारी घटनाएं, जिनके तले अस्सी साल के जीवन की दूसरी अच्छी यादें अब बंधक हैं. दूसरे बुजुर्गों की तरह उनके बुढ़ापे की सर्द तटस्थता अच्छी यादों के गुनगुने अहसास के तले कट नही सकती, वो कहते हैं वो अभिशप्त हैं, इस उम्र में ये सब देखने और झेलने के लिए. साथ ही कहते हैं. 'कुछ नहीं जी अब वक्त काट रहे हैं, तकलीफें तो हैं, लेकिन करें क्या?'

पिछले ही महीने उनके परिवार के पांच सदस्यों को सोनीपत कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. पोती स्वीटी के ऑनर किलिंग के केस में पिता बलराज, मां सुदेश, बहन मीना, चाचा सुरेश और राजू सबको सजा मिली है.

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पुलिस कहती है धज्जा राम की ही शिकायत पर सभी लोगों की गिरफ्तारी हुई थी. आरोप है कि 2 जुलाई 2016 को स्वीटी के पिता बलराज और सुदेश समेत दूसरे घरवालों ने पीट-पीट कर उसकी जान ले ली. बाद में शव को ठिकाने लगाने के लिए गोबर के लिए बने बिठौड़े में ही घर के आंगन में जला दिया था. परिवार स्वीटी के पड़ोस गांव के एक लड़के से अफेयर के चलते खफा था.

'सादे कागज पर दस्तखत करवाया गया था'

इस मामले को उस वक्त देख रहे इनवेस्टिगेटिंग ऑफिसर सुभाष कहते हैं, 'हमें किसी ने फोन पर लड़की को मार कर जलाने की सूचना दी. जब हमने बिठौड़े से लड़की की अधजली लाश रिकवर की, तब शिकायत में धज्जा राम ने अपने परिवारवालों के शामिल होने का बयान दिया. उन्होंने एफआईआर में उस वक्त सबका नाम लिखवाया था.' हालांकि एफआईआर का जिक्र होने पर धज्जा कहते हैं कि 'मुझसे तो सादे कागज़ पर दस्तखत करवाया गया था.'

दरअसल धज्जा पुलिस शिकायत के बारे में बात करने पर असहज हो जाते हैं . दो साल में उनकी जिंदगी बहुत बदली है. रिश्तेदारों से लेकर गांववालों तक उन्हें इन हालातों के जिम्मेदार मानते हैं. इसीलिए अब धज्जा बात करते-करते सोचते हैं. फिर बोलते हैं. बोलकर सोचते हैं. पास में खड़ी छोटी बहू सुदेश की ओर देखते हैं. फिर हमारी ओर मुखातिब होते हैं. तब बात करते हैं. सुदेश का पति सुरेश भी उम्र कैद की सज़ा काट रहा है. आज धज्जा के घर में तीन बच्चों और दो पशुओं को छोड़ कोई नहीं. 1800 की पेंशन से खर्चा निकलना मुश्किल है. 10 साल का पोता, 14 और 15 साल की दो पोतियां. छोटे से कमरे के भीतर चारपाई पर बैठे धज्जा कहते हैं, 'बखत कट रहा है. वही तो काटना है. काम तो होता को नीं. बस चारे के लिए खेतों में चला जाता हूं. ढोर डंगर और रोटी का कच्चा-पक्का काम बच्चे ही करते हैं. पड़ोस में बैठना भी तब से कम ही है.'

उम्मीद करें या न करें?

पोती को याद कर पनीली आंखों में और नमी आ जाती है. मृतक की छोटी बहन की ओर देखकर वो कहते हैं, 'ये छोरी सै ना. इसी की तरह घणी सुथरी थी. घणी बढ़िया छोरी थी (इसी लड़की की तरह सुंदर थी वो)' फिर कुछ चुप होकर बोलते हैं, 'सारे बालक घणे प्यारे लगे सैं. सब याद आवें सैं. (सारे बच्चे याद आते हैं, मुझे तो सारे अच्छे लगते हैं) इनकी मां पैंतीस साल पहले चल बसी थी और इन बच्चों को मेरी गोद में दे गई थी. फिर वो हमसे पूछते हैं कि 'लिकण सकैं हैं, वो बाहर के क्या?' (क्या वो लोग आ सकते हैं बाहर?)

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छोटे से अहाते में चारपाई के पास रखी चौकी पर बैठी सुनीता कहती है, 'सारा करा कराया गांव में हमारे दुश्मनों का है. मेरी बहन तो स्वीटी को पढ़ाना चाहती थी. गोहाना में बीए में दाखिला भी करवाया था. लेकिन उसको मिर्गी आती थी. इसी से उसकी जान गई. हमने उसका अंतिम संस्कार भी किया था. लेकिन दुश्मनों ने शिकायत कर दी. गांव में हमारे कई दुश्मन हैं. अपने बच्चों को भी कोई मारता है क्या.'

हरियाणा में आम है ऑनर किलिंग

चौदह सौ वोटरों वाले इस गांव में दो साल पहले हुई इस घटना के बारे में कोई भी खुलेआम बोलने को तैयार नहीं. नाम ना छापने की शर्त पर एक शख्स कहता है, 'स्वीटी का पड़ोस के गांव के लड़के के साथ अफेयर था. परिवार को बहुत बेइज्जती का सामना करना पड़ा था. ये लोग गरीब हैं, लेकिन गरीब की भी तो इज्जत होती है, स्वीटी ने लक्ष्मण रेखा पार कर दी थी. एक दूसरे आदमी के मुताबिक, 'देखिए विनाशकाले विपरीत बुद्धि, ऐसा हो जाता है कभी-कभार. लेकिन अब कोई करे तो क्या करे.'

दरअसल ऑनर किलिंग के लिए बदनाम रहे हरियाणवी समाज को इससे जुड़े अपराध ज्यादा चौंकाते नहीं हैं. लेकिन ये मर्ज अब हरियाणा से निकलकर दूसरे राज्यों तक फैल चुका है. देश भर की की बात करें तो नेशनल क्राइम ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक साल 2015 में 251 ऑनर किलिंग के मामले सामने आए, जो 2014 के आंंकड़ों की तुलना 792 फीसदी ज्यादा हैं.

आज सोनीपत जेल में मुलाकात का दिन है. पहले बहू-बेटों से मिलने धज्जा राम भी जाते थे, लेकिन अब कमजोर शरीर और धुंधली आंखों के साथ जाना मुश्किल है. सुनीता का बेटा खाने का टिफिन तैयार कर रहा है. अब वही मिलने जाता है. धज्जा अपनी मटमैली डायरी खूंटी पर टंगे कुर्ते की जेब से निकालते हैं, उसमें वकीलों के नंबर टटोलते हुए कहते हैं, 'वकील को देने के लिए पास पैसे तक नहीं. कहां से दूं. लेकिन उसने कहा है कि आगे कोर्ट में अपील के बाद जमानत मिल जाएगी.' बचाव पक्ष वकील संजय दहिया हाईकोर्ट में मामले को लेकर आश्वस्त हैं. वो कहते हैं, '100 फीसदी सज़ा बदल जाएगी.हमारा केस मजबूत है.'

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उनकी तीसरे नंबर की पोती दादा के लिए चाय लाती है, वो उसे गायों को चारा देने के लिए कहते हैं. घर का ज्यादातर काम इसी लड़की के जिम्मे है. सुदेश भी कभी-कभार ही आती है. घर के पिछवाड़े में एक छोटा सा आंगन है, जहां उनका पोता अमरूद का पौधा लगाने में जुटा हुआ है. धज्जा राम उसे चारों ओर की जमीन को दबाने के लिए कहते हैं. उसी पौधे के के पास एक बिठौड़ा है, गोबर के उपलों को रखने की जगह.

पुलिस की रिपोर्ट की मानें, तो शायद इसी में स्वीटी को जलाया गया होगा. आज वहां उसका भाई अमरूद का पौधा लगा रहा है.

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