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एक ऐसा गांव जहां पिछले 125 सालों से नहीं मनाई गई होली!

62 साल पहले गांव में दुल्हन बनकर आईं लक्ष्मी बारंगे बताती हैं कि उन्होंने कभी गांव में होली का पर्व देखा ही नहीं

Updated On: Mar 02, 2018 04:05 PM IST

FP Staff

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एक ऐसा गांव जहां पिछले 125 सालों से नहीं मनाई गई होली!

होली का पर्व यानी उल्लास उमंग और हुल्लड़ होना तो लाजमी है, लेकिन मध्य प्रदेश के बैतूल की मुलताई तहसील का डहुआ एक ऐसा गांव है जहां पिछले लगभग सवा सौ साल से होली मनाने पर पर प्रतिबंध है.

होली के दिन गांव में दहशत और मातम सा माहौल रहता है. 100 साल की उम्र के बुजुर्ग हो या फिर नौनिहाल किसी को भी होली के दिन रंगों से खेलने की इजाजत नहीं है. ये कोई अंधविश्वास नहीं बल्कि सदियों पहले हुए एक फैसले का नतीजा है.

क्यों लगा होली खेलने पर बैन?

लगभग सवा सौ साल पहले होली के ही दिन गांव के सबसे रसूखदार प्रधान की एक बावड़ी में डूबने से हुई मौत हुई थी. इस घटना के बाद गांव के प्रमुख लोगों ने दिवंगत प्रधान को सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिए दोबारा कभी होली ना मनाने का फैसला लिया.

फैसला बदलना आसान नहीं

गांव के पंच भीमराव बारंगे बताते हैं, 'गांव के बुजुर्गों की सोच है कि अगर होली का पर्व दोबारा शुरू करना हो तो पूरे गांव को एकमत होकर फैसला करना होगा. क्योंकि इस गांव में होली ना मनाने का फैसला एक धार्मिक मान्यता जैसा बन चुका है जिसे बदलना इतना आसान नहीं है.'

डहुआ गांव की एक खासियत ये भी है कि यहां 100 या 90 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों की अच्छी खासी संख्या है. यहां होली पर रंग गुलाल उड़ते आज तक किसी ने नहीं देखा.

युवाओं को मलाल

62 साल पहले गांव में दुल्हन बनकर आईं लक्ष्मी बारंगे बताती हैं कि उन्होंने कभी गांव में होली का पर्व देखा ही नहीं. वहीं हिना पवार जैसे कई युवाओं को भी इस बात का मलाल है कि होली जैसा उल्लास का पर्व क्यों नहीं मनाया जाता.

हालांकि, ये फैसला एक परंपरा ही बन गया और पीढ़ी दर पीढ़ी गांव के लोग अपने बुजुर्गों का सम्मान रखते हुए आज भी होली मनाने से कतराते हैं.

(न्यूज़18 के लिए Rishu Naidu की रिपोर्ट)

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