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हिजबुल कमांडर की धमकी, 'हुर्रियत नेताओं के सिर लालचौक पर लटका देंगे'

इसमें घाटी में इस्लामी खलीफा का साम्राज्य स्थापित करने की बात हो रही है

Bhasha Updated On: May 13, 2017 08:54 AM IST

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हिजबुल कमांडर की धमकी, 'हुर्रियत नेताओं के सिर लालचौक पर लटका देंगे'

कश्मीर में सोशल मीडिया पर एक ऑडियो स्लाइडशो सामने आया है जिसमें हिजबुल मुजाहिदीन का कमांडर जाकिर मूसा अलगाववादी नेताओं को धमकी देने के साथ ही घाटी में इस्लामी खलीफा का साम्राज्य स्थापित करने की बात कर रहा है.

ऑडियो में मूसा ये कहता हुआ सुनाई दे रहा है, ‘मैं सभी ढोंगी हुर्रियत नेताओं को वॉर्निंग देता हूं. वो किसी भी हाल में वो हमारे इस्लाम के संघर्ष में दखल न दें. अगर उन्होंने ऐसा किया तो हम उनके सिर काटकर लालचौक पर लटका देंगे.’

इस ऑडियो में मूसा कह रहा है, 'हमारी लड़ाई का मकसद एकदम साफ है. कश्मीर में शरीयत को लागू करना है. ये मसला कोई पॉलिटिकल स्ट्रगल नहीं है. वो नेता ये बात जान लें कि ये संघर्ष इस्लाम और शरीयत के लिए.'

पुलिस महानिदेशक एसपी वैद्य ने पीटीआई से कहा कि ऑडियो में सुनाई दे रही आवाज जाकिर मूसा की ही है.

वैद्य ने बताया कि पुलिस ने आवाज की जांच की और मूसा के पहले के वीडियो और ऑडियो से उसका मिलान किया. उन्होंने कहा, 'वह मूसा ही है.' पांच मिनट 40 सेकेंड के क्लिप में कश्मीर के अलगाववादी नेताओं को चेतावनी दी गई है कि वे जम्मू कश्मीर में खलीफा का साम्राज्य स्थापित करने की मुहिम के बीच में नहीं आएं.

इसमें कहा गया है कि सीरिया और इराक की तरह जम्मू कश्मीर में खलीफा का साम्राज्य स्थापित किया जाएगा.

यह क्लिप कश्मीर में आतंकवाद के खतरनाक रूप लेने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. कश्मीर में अभी तक प्रदर्शन स्वतंत्रता या पाकिस्तान में विलय को लेकर होते रहे हैं और इसका जोर इस्लाम पर या जिहाद से जुड़ाव पर नहीं रहा है.

कश्मीर में 1989 में आतंकवाद की शुरूआत के साथ ही हिजबुल मुजाहिदीन का गठन हुआ था. समूह में लगभग सभी स्थानीय युवक हैं और इसने हमेशा पाकिस्तान में शामिल होने का अभियान चलाया.

क्लिप में वक्ता अलगाववादियों से कहता है कि या तो आतंकवादियों के साथ लड़ें या सशस्त्र संघर्ष के बारे में बयान देने से बचें. घाटी में आईएसआईएस के बढ़ते प्रभाव को हुर्रियत नेताओं द्वारा तवज्जो नहीं देने के बीच यह क्लिप सामने आई है.

हिजबुल मुजाहिदीन के सुप्रीम कमांडर सैयद सलाउद्दीन ने आज जारी बयान में कहा कि जम्मू कश्मीर में आईएसआईएस, अल कायदा या तालिबान जैसे समूहों के लिए कोई स्थान नहीं है.

उसने कहा, 'यह आंदोलन पूरी तरह स्थानीय और स्वदेशी है. इसका कोई अंतरराष्ट्रीय एजेंडा नहीं है. अल कायदा, दायेश या तालिबान की कश्मीर में कोई संलिप्तता या भूमिका नहीं है.'

उर्दू भाषा के स्लाइडशो में इंडोनेशिया की जेल में बंद अबु बकर बशीर और यमन निवासी अनवर अल अवलाकी के उद्धरण हैं जिन्हें आईएसआईएस और अल कायदा की गतिविधियों का सरगना माना जाता है.

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