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हीराखंड एक्सप्रेस रेल हादसा: जान बचे तो बुलेट ट्रेन पाए

अब रेल मंत्री को समझना होगा कि रेल ट्विटर पर नहीं पटरी पर चलती है.

Amitesh Amitesh Updated On: Jan 23, 2017 04:03 PM IST

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हीराखंड एक्सप्रेस रेल हादसा: जान बचे तो बुलेट ट्रेन पाए

रेलवे की कायापलट करने का दावा करने वाले रेल मंत्री सुरेश प्रभु अब सवालों के घेरे में हैं. सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं कि मुसाफिरों को बड़े-बड़े सपने दिखाने वाले रेल मंत्री का दावा अब खोखला साबित हो रहा है. सुविधाओं की बात तो दूर अब तो जान पर आ पड़ी है. मुसाफिर सांसत में हैं न जाने कब कौन सी मुसीबत सामने आ जाए.

सरकार की तरफ से बुलेट ट्रेन का सपना लगातार दिखाया जाता रहा है. कोरी कल्पना की ऊंची उड़ान के साथ मुसाफिर इस उम्मीद में टकटकी लगाए बैठे हैं. उसके पहले सरकार की तरफ से यात्री सुविधा के नाम पर कई ट्रेनों की शुरुआत की जा रही है.

गतिमान एक्सप्रेस से लेकर नए हमसफर ट्रेनों की शुरुआत की जा रही है. राजधानी और शताब्दी जैसी ट्रेन में सुविधा बढ़ाने की बात कही जा रही है. लेकिन, लगातार हो रही रेल दुर्घटनाओं ने इन तमाम तैयारियों की पोल खोल दी है.

शनिवार की देर रात आंध्र प्रदेश के विजयानगरम जिले में जगदलपुर-भुवनेश्वर हीराखंड एक्सप्रेस के नौ डिब्बे पटरी से उतरने के चलते कम से कम 39 लोगों की मौत हो गई जबकि 60 से ज्यादा घायल हो गए.

HirakhandRail

हमेशा की तरह रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने घटना स्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और दुर्घटना की जांच के आदेश दे दिए.

लेकिन, रेल मंत्री इतने भर से बरी नहीं होते. जांच होगी और जांच के बाद भले ही कारणों का पता चलेगा. लेकिन, सवाल अभी भी जस का तस बना हुआ है.

प्रभु से थी बड़ी उम्मीद

सुरेश प्रभु के रेल मंत्री बनने के बाद माना यही जा रहा था कि रेलवे की हालत रातोंरात बदल जाएगी और उम्मीदों की रेल सरपट एक नए अवतार और नई रफ्तार के साथ दौड़ने लगेगी. इन उम्मीदों पर फिलहाल विराम लगता दिख रहा है.

बुलेट ट्रेन का सपना संजोए लोगों के लिए एक-के बाद एक लगातार हो रही रेल दुर्घटनाओं ने अब प्रभु से भरोसा उठा दिया है. अभी हाल ही में 20 नवंबर 2016 को हुई इंदौर-पटना एक्सप्रेस रेल हादसे के वक्त सेफ्टी को लेकर तरह-तरह के दावे किए गए थे. कानपुर के पास पुखरांया में हुए भीषण रेल हादसे में 150 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी.

20 मार्च 2015 को रायबरेली के पास बछरांवा स्टेशन के पास देहरादून-वाराणसी एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद 46 लोगों की मौत हो गई थी और बडी तादाद में लोग घायल हो गए थे.

इसके अलावा भी ट्रेन के पटरी से उतरने की छोटी घटनाएं अब तो सामान्य सी बात हो रही हैं.

प्रभु भरोसे रेल

ऐसे में सवाल सुरेश प्रभु के उस वादे के ऊपर भी खड़ा होता है जिसमें उन्होंने न केवल यात्री सुविधा बल्कि यात्री सुरक्षा का भी दावा किया था.

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मोदी मंत्रिमंडल के पहले विस्तार में रेलमंत्री सदानंद गौड़ा की जगह सुरेश प्रभु को लाकर रेलवे में बड़े बदलाव और सुधार का संदेश दिया गया था.

यात्री सुविधा के नाम पर सोशल मीडिया पर सक्रियता ने सुरेश प्रभु को खूब वाहवाही भी दिलाई. ट्विटर के जरिए यात्रियों की परेशानियों को निपटारा हुआ भी. कभी ट्रेन की सफाई को लेकर तो कभी दवाई तो कभी बच्चों के दूध की व्यवस्था. बस एक क्लिक में सबकुछ हाजिर.

ऐसा कर प्रभु ने वाहवाही बटोरने की कोशिश की. लेकिन अब रेल मंत्री को समझना होगा कि रेल ट्विटर पर नहीं पटरी पर चलती है और इसके लिए सोशल मीडिया से नहीं जमीन पर काम करने की जरूरत है.

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