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हर प्रेम विवाह को लव जिहाद नहीं कहा जा सकता: केरल हाईकोर्ट

श्रुति ने 16 मई को एक मुस्लिम युवक के साथ अपना घर छोड़ दिया था. परिवार वालों की शिकायत पर पुलिस ने उन्हें हरियाणा के सोनीपत से खोज निकाला था

FP Staff Updated On: Oct 20, 2017 12:31 PM IST

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हर प्रेम विवाह को लव जिहाद नहीं कहा जा सकता: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने लव जिहाद को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. हाईकोर्ट ने अंतर्जातीय और अन्य धर्म के लोगों के साथ विवाह के मामलों पर सुनवाई करते हुए कहा कि हर प्रेम विवाह को लव जिहाद नहीं कहा जा सकता है. इसके साथ ही कोर्ट ने एक हिंदू युवती और एक मुस्लिम युवक के बीच शादी को बरकरार रखा है.

हाईकोर्ट के जज जस्टिस वी चितंबरेश और सतीश निनान की खंडपीठ ने 25 वर्षीय अनीस हमीद की याचिका पर सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुनाया. कन्नूर के रहने वाले हमीद ने अपनी पत्नी श्रुति को उसके परिवार की कस्टडी से रिहा कराने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था. इसके बाद कोर्ट ने अपने आदेश में श्रुति को हमीद के साथ रहने की अनुमति दी और लड़की के परिवार की याचिका खारिज कर दी.

कोर्ट ने कहा, 'हम राज्य में हर अंतर-धार्मिक विवाह को लव जिहाद या घर वापसी की नजर से देखे जाने के ट्रेंड को देखकर भयभीत हैं. ऐसा तब किया जा रहा है जब पति-पत्नी के बीच शादी से पहले निःस्वार्थ प्रेम रहा हो.'

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने लता सिंह और उत्तर प्रदेश सरकार मामले में 2004 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र किया, जिसमें अंतर-जातीय और अंतर-धार्मिक विवाह को बढ़ावा देने की बात कही गई थी.

श्रुति और अनीस की शादी को बरकरार रखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि हम सचेत करते हैं कि सभी अंतर-धार्मिक विवाह को धार्मिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए. हमें इस कारण धार्मिक सौहार्द को नहीं बिगाड़ना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में युवती के परिवार वालों ने इसे 'लव जेहाद' करार दिया है.

श्रुति ने 16 मई को एक मुस्लिम युवक के साथ अपना घर छोड़ दिया था. परिवार वालों की शिकायत पर पुलिस ने उन्हें हरियाणा के सोनीपत से खोज निकाला था. शुरुआत में निचली अदालत ने युवती को उसके माता-पिता के साथ रहने की अनुमति दी थी. इसके बाद युवती के परिवार वालों ने उसे एक योग केंद्र में भर्ती करवाया, जिससे कि वह मुस्लिम युवक को भूल जाए.

इसके बाद हाईकोर्ट में युवती ने आरोप लगाया कि योग केंद्र में उसे प्रताड़ित किया गया. मामले की अदालत में चल रही सुनवाई के बीच युवक और युवती ने शादी कर ली. खंडपीठ ने युवती की हिम्मत की दाद देते हुए उसकी शादी को बरकरार रखा.

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