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'तलाक के लिए अब नहीं करना होगा 6 महीने इंतजार'

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जोड़े अगर सहमति से अलग होना चाहते हैं, तो उनके लिए हिंदू मैरिज एक्ट के तहत छह महीनों का 'कूलिंग ऑफ पीरियड' अनिवार्य नहीं होगा

Updated On: Sep 13, 2017 10:19 AM IST

FP Staff

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'तलाक के लिए अब नहीं करना होगा 6 महीने इंतजार'

तलाक का इंतजार कर रहे शादीशुदा जोड़ों को सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी है. मंगलवार को तलाक के एक मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि शादीशुदा जोड़े अगर आपसी रजामंदी से एक-दूसरे से अलग होना चाहते हैं, तो उनके लिए हिंदू मैरिज एक्ट के तहत छह महीनों का वेटिंग पीरियड अनिवार्य नहीं होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अगर दोनों पक्षों में समझौते की गुंजाइश नहीं बची हो और बच्चे की कस्टडी आदि का फैसला हो चुका हो तो कोर्ट छह महीने की 'कूलिंग ऑफ पीरियड' अवधि को खत्म कर सकता है.

जज आदर्श कुमार गोयल और यूयू ललित की पीठ ने इस बारे में कहा कि अंतिम आदेश के लिए 6 माह का वक्त लेना सिविल जज पर निर्भर होगा. अगर जज चाहे तो तुरंत तलाक का आदेश दे सकते हैं.

Supreme Court of India

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दिल्ली के एक जोड़े के तलाक के मामले में आया है. जो पिछले 8 साल से अलग रह रहा था. दोनों ने आपसी सहमति से तीस हजारी कोर्ट में तलाक की अर्जी दी थी.

हिंदू विवाह अधिनियम में 1976 में हुए संशोधन के जरिए आपसी सहमति से तलाक के मामले में छह महीने के 'कूलिंग ऑफ पीरियड' जोड़ा गया था. सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, छह महीने की अवधि एहतियात के तौर पर तय की गई थी. ताकि हड़बड़ाहट में कोई गलत फैसला ना हो जाए. लेकिन जब आपसी सहमति से तलाक हो रहा है तो एक साल भी काफी होता है.

 

 

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