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हिंदू कोर्ट के सहारे कैसे 'रामराज' लाएगी हिंदू महासभा

कोर्ट को श्री राम भवन का नाम दिया गया है, जहां 'नारद शास्त्र' के आधार पर लोगों को न्याय दिए जाने का दावा किया गया

Updated On: Aug 25, 2018 04:06 PM IST

FP Staff

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हिंदू कोर्ट के सहारे कैसे 'रामराज' लाएगी हिंदू महासभा
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उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में जल्द ही पहला 'हिंदू कोर्ट' शुरू होने जा रहा है. इस खास कोर्ट के लिए कमरे के इंटीरियर को मार्बल से तैयार किया गया है. अंदर कांसे की मूर्तियां रखी गई हैं. इसके अलावा इसे हिंदू महासभा के नेताओं की तस्वीरों से भी सजाया गया है. कोर्ट को श्री राम भवन का नाम दिया गया है, जहां 'नारद शास्त्र' के आधार पर लोगों को न्याय दिए जाने का दावा किया गया.

डॉक्टर पूजा शकुन पांडे को इस कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है. अलीगढ़ से 50 किलोमीटर दूर रहने वाली डॉक्टर पूजा के लिए स्पेशल कुर्सी तैयार की गई है. याचिकाकर्ताओं और जज के लिए सोफे लगाए गए हैं.

15 अगस्त को, 'जय हिंदू राज' और 'जय हिंदू राष्ट्र' के जोरदार नारों के बीच, हिंदू कोर्ट की स्थापना की घोषणा मेरठ में अखिल भारत हिंदू महासभा के हेड ऑफिस से की गई. इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक शर्मा ने कोर्ट के पहले मुख्य न्यायाधीश के तौर पर राष्ट्रीय सचिव पूजा शकुन पांडे को नियुक्त किया. शरिया कोर्ट की तर्ज पर हिंदू कोर्ट की शुरुआत की गई है.

इस कोर्ट का मुख्य चैंबर अलीगढ़ के नौरंगाबाद में बनाया गया है. यहीं पर पूजा शकुन पांडे रहती हैं. हिंदू कोर्ट का विस्तार देश के हर जिले में किया जाएगा. नौरंगाबाद में पूजा शकुन पाण्डेय का दो मंजिला घर भगवे रंग में रंगा है. वो आमतौर पर भगवे रंग के ही पोशाक में मेहमानों का स्वागत करती हैं. 'चीफ जस्टिस' के चैंबर में नाथुराम गोडसे की एक बड़ी सी तस्वीर हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचती है.

क्यों खोला गया है हिंदू कोर्ट?

पांडे अपनी बात रखने से हिचकती नहीं हैं. वो कहती हैं कि हिंदू कोर्ट का आइडिया उन्हें इस साल जुलाई में आया था, जब अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने घोषणा की कि थी कि वो देश भर में शरिया कोर्ट ले कर आएंगे.

उन्होंने कहा, 'एक महीने पहले, मुसलमानों ने सरकार से शरिया अदालतों की मांग की और कहा कि अगर ऐसी अदालतों की स्थापना की अनुमति नहीं दी जाती है तो उन्हें एक नया राष्ट्र दिया जाना चाहिए. इसके जवाब में हमारे वाइस प्रेसिडेंट अशोक शर्मा ने इस तरह के अनुरोध को रद्द करने के लिए प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा था. हमारे प्रधानमंत्री ने कुछ भी नहीं किया. इसलिए हमने हिंदू न्यायपीठ स्थापित करने का फैसला किया.'

पांडे ने आगे कहा, 'किसी को भी हमारी अदालतों से डरने की जरूरत नहीं है. शरिया कोर्ट की तरह हम हिंदुओं के लिए काम करेंगे. ये बदला लेने वाला कदम नहीं है. ये न्याय का मामला है. जब हम कहते हैं कि भारत धर्मनिरपेक्ष लोगों के लिए है तो हमारे पास धर्म के आधार पर विभाजित लोगों के लिए दो कानून क्यों हैं?'

कैसे काम करेगा ये कोर्ट?

पांडे और अखिल भारत हिंदू महासभा के सदस्यों का कहना है कि 'अदालत' राम के दरबार की तरह होगा. फिलहाल इसके लिए संविधान तैयार किया जा रहा है.

पांडे के पति और अखिल भारत हिंदू महासभा के संयोजक अशोक पांडे ने कहा, 'अंग्रेजों ने कानून बनाने के लिए 11 लोगों का एक ग्रुप बनाया था. कानूनों को लागू करने के बाद, अंग्रेजों को एहसास हुआ कि ये कानून सिर्फ एकता के लिए थे और इसलिए उन्होंने विभाजन और शासन की अपनी साजिश शुरू की. हम संस्कृत पुस्तक को फिर से जीवित कर रहे हैं.'

अशोक पांडे ने आगे कहा, 'अदालतें सनातन प्रणाली के अनुसार काम करेगी. अदालतें राम दरबार की तरह होंगी. हमारे सभी जज काफी सख्त मिजाज के होंगे. हमारे जज हवा, पानी, आग और पृथ्वी के गवाह के बाद फैसला सुनाएंगे.'

क्या होगी सजा?

पांडे के मुताबिक ये कोर्ट भारतीय दंड संहिता को चुनौती नहीं देगी. बल्कि 'हिंदू अदालत' में सजा 'सुधार' के लिए दिया जाएगी. उन्होंने कहा, 'हमारा दंड, वैदिक प्रणाली के अनुसार होगा. जैसे कि सजा के तहत तीन महीनों के लिए गायों की सेवा करने के लिए कहा जाएगा. हम सुनिश्चित करेंगे कि उनका दिल बदल जाए.'

कानूनी अड़चन

22 अगस्त को इलाहबाद हाईकोर्ट ने हिंदू कोर्ट के गठन पर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करते हुए इस मामले पर जानकारी मांगी है. इसके साथ ही डीएम मेरठ और हिंदू कोर्ट की जज पूजा शकुन पांडे को पक्षकार बनाने का निर्देश देते हुए भी नोटिस जारी किया. इस मामले पर अगली सुनवाई 11 सितम्बर को होगी. कानपुर के अमित सिंह की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस डी.बी.भोसले और जस्टिस यशवंत वर्मा की पीठ इस मामले सुनवाई कर रही है.

(न्यूज18 के लिए देबायन रॉय की रिपोर्ट) 

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