S M L

हिंदी अकादमी के उपाध्यक्ष और साहित्यकार विष्णु खरे का निधन

हिंदी अकादमी के उपाध्यक्ष और हिंदी साहित्य जगत के वरिष्ठ कवि-साहित्यकार विष्णु खरे का गुरुवार को निधन हो गया, खरे 78 वर्ष के थे

Updated On: Sep 19, 2018 05:50 PM IST

FP Staff

0
हिंदी अकादमी के उपाध्यक्ष और साहित्यकार विष्णु खरे का निधन

हिंदी अकादमी के उपाध्यक्ष, हिंदी साहित्य के विद्वान, लेखक, अनुवादक और पत्रकार विष्णु खरे का गुरुवार को निधन हो गया. विष्णु खरे 78 वर्ष के थे. खरे को तकरीबन दो हफ्ते पहले ब्रेन हेमरेज हुआ था, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के जीबी पंत सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. यहां पर वो कोमा में थे. ब्रेन हेमरेज के बाद से उनके शरीर का एक हिस्सा पैरालिसिस से ग्रस्त हो गया था.

हिंदी अकादमी का उपाध्यक्ष बनने के बाद सुप्रसिद्ध लेखक और कवि विष्णु खरे मुंबई से दिल्ली आए थे. वे पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार के हिंदुस्तान टाइम्स अपार्टमेंट में रह रहे थे. उनके निधन की खबर से साहित्य जगत में शोक की लहर है.

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में हुआ था जन्म

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में जन्में विष्णु खरे को हिंदी साहित्य में बतौर अनुवादक भी याद किया जाता है. उन्होंने श्रीकांत वर्मा तथा भारतभूषण अग्रवाल के पुस्तक का अंग्रेजी अनुवाद भी किया. समसामयिक हिन्दी कविता के अंग्रेजी अनुवादों का निजी संग्रह 'दि पीपुल एंड दि सैल्फ'. लोठार लुत्से के साथ हिन्दी कविता के जर्मन अनुवाद 'डेअर ओक्सेनकरेन' का संपादन भी किया.

'यह चाकू समय' (आत्तिला योझेफ़), 'हम सपने देखते हैं' (मिक्लोश राद्नोती), 'काले वाला' (फ़िनी राष्ट्रकाव्य), डच उपन्यास 'अगली कहानी' (सेस नोटेबोम), 'हमला' (हरी मूलिश), 'दो नोबल पुरस्कार विजेता कवि' (चेस्वाव मिवोश, विस्वावा शिम्बोरर्स्का) आदि का उल्लेखनीय अनुवाद भी किया.

विष्णु खरे की कृतियां

विष्णु खरे की प्रमुख कृतियों में टीएस एलिअट का अनुवाद 'मरुप्रदेश और अन्य कविताएं (1960), 'विष्णु खरे की कविताएं' नाम से अशोक वाजपेयी द्वारा संपादित पहचान सीरीज की पहली पुस्तिका, खुद अपनी आंख से (1978), सबकी आवाज के पर्दे में (1994), पिछला बाकी (1998), काल और अवधि के दरमियान (2003).

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
#MeToo पर Neha Dhupia

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi