S M L

भारतीय रेल की नई टैगलाइन 'हादसों का सफर' होनी चाहिए

रेलवे की दुर्दशा के लिए सिस्टम भी कम जिम्मेदार नहीं है

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Aug 30, 2017 09:58 AM IST

0
भारतीय रेल की नई टैगलाइन 'हादसों का सफर' होनी चाहिए

भारतीय रेल को पटरी पर लाने की हर कोशिश रास्ते में ही दम तोड़ती नजर आ रही है. रेलवे को दुरुस्त करने के लिए सरकार के हर पहल का परिणाम उत्साहवर्धक साबित नहीं हो रहा है. पिछले 11 दिनों में तीन रेल दुर्घटनाओं ने भारतीय रेल की दुर्दशा को बेनकाब कर दिया है.

मंगलवार तड़के महाराष्ट्र में नागपुर-मुंबई दुरंतो एक्सप्रेस पटरी से उतर गई. ट्रेन के नौ डिब्बे पटरी से उतर गए. रेलवे ने बयान जारी कर घटना के बारे में कहा कि किसी की मौत नहीं हुई है. कुछ लोग घायल जरूर हुए हैं. जिनका उपचार करवाया जा रहा है.

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में हुए लगातार दो रेल हादसों के बाद भारतीय रेल महकमे में काफी फेरबदल किए गए थे. रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ए के मित्तल को हटा कर अश्विनी लोहानी को रेलवे बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया था.

लेकिन, भारतीय रेल और मुसाफिरों की नियति बन गई है गम और परेशानियों के साथ चलते रहने का. रेलवे की दुर्दशा के लिए सिस्टम भी कम जिम्मेदार नहीं है.

एक तरफ रेल दुर्घटनाओं और बाढ़ जैसे स्थितियों की वजह से रेलवे को काफी नुकसान उठाना पड़ता है. वहीं दूसरी तरफ भारत की राजनीतिक और सामाजिक संरचना की वजह से भी रेलवे को काफी नुकसान उठाना पड़ता है.

देश में आए दिन आंदोलनों और बड़े रसूखदार लोगों के कानूनी अड़चनों को लेकर रेलवे को बाधित किया जाता है. रलवे जन आंदोलनों के जरिए नुकसान पहुंचाने का सबसे सॉफ्ट टारगेट बन गया है.

Security in Sirsa

दुर्घटनाओं से लेकर आंदोलनों का नुकसान रेलवे को

अभी इसी सप्ताह की बात करें तो बाबा राम रहीम मसले को लेकर हरियाणा पंजाब और दिल्ली में ट्रेनें आंदोलनकारियों की निशाने पर रहीं.

पिछला एक महीना रेलवे के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रहा है. एक तरफ लगातार रेल दुर्घटनाओं ने भारतीय रेल को नुकसान पहुंचाया तो दूसरी तरफ बाबा राम रहीम मामले को लेकर कई ट्रेनों को रद्द करना पड़ा.

पिछले कुछ दिनों से पंजाब, हरियाणा और हिमाचल जाने वाली कई ट्रेनें को उत्तर रेलवे ने रद्द कर दी थी.

उत्तर रेलवे के सीपीआरओ नीरज शर्मा फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘देखिए पिछले 24 तारीख से लेकर आज तक लगभग 1300 ट्रेनें रद्द की गई हैं. इसके साथ ही हमलोग रेलवे के हुए नुकसान पर वर्क आउट कर रहे हैं. एक अनुमान के मुताबिक नुकसान का आंकड़ा कई सौ करोड़ को पार कर जाएगा. मंगलवार से हमलोग ट्रेनों को एक बार फिर से चलाने का काम शुरू कर रहे हैं.’

duronto train accident

फोटो साभार: ANI

भारी बारिश की वजह से भूस्खलन

महाराष्ट्र में दुरंतो एक्सप्रेस के हादसे के बाद एक फिर से देश में रेलवे के परिचालन और रखरखाव को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. हादसे के बारे में कहा जा रहा है कि भारी बारिश के कारण अचानक भूस्खलन से हादसा हुआ है.

अब सवाल यह है भूस्खलन से अगर दुर्घटनाएं हो रही हैं तो इसके लिए कहीं न कहीं रेलवे के इंफ्रास्टक्चर में सुधार लाने की जरूरत है. जब भारत की मिट्टी भारत की पुरानी रेलवे पद्दति को स्वीकार नहीं कर पा रही है या सरकार की नीति की वजह से सुधार नहीं करवाया जा रहा है तो और तेज रफ्तार की ट्रेनें भारत जैसे देश में चलाना कितना तर्कसंगत लगता है.

पिछले दिनों लगातार होते रेल हादसे के बीच रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने पीएम मोदी के सामने इस्तीफे की पेशकश की थी. हालांकि पीएम मोदी ने प्रभु को अभी इंतजार करने को कहा था. लगता है कि रेल मंत्री सुरेश प्रभु के लिए अगस्त का महीना काफी मुश्किलों भरा रहा है.

इस महीने दुरंतो एक्सप्रेस से पहले भी यूपी में दो ट्रेन हादसे हुए हैं. इन हादसों में 30 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है. वहीं 100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. इसके चलते रेल मंत्री सुरेश प्रभु का इस्तीफा भी मांगा जा रहा था. सुरेश प्रभु ने घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की पेशकश भी की थी.

रेलवे के सूत्र के अनुसार सरकार की तरफ से लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद सुविधा और सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई है.

जानकारों का कहना है कि रेल प्रबंधन अब गंभीर हो गया है. लापरवाह और निकम्मे अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है जो कि एक अच्छा कदम है.

हम आपको बता दें कि पिछले कई सालों से रेल महकमे पर रेल दुर्घटनाओं को देखते हुए भी सावधानी नहीं बरतने के आरोप लगते रहे हैं. पिछले कुछ दिनों में लगातार ऐसे मामले सामने आए हैं जिस पर तत्काल रेल प्रबंधन को सतर्कता बरतनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

ऐसे में सैकड़ों रेलयात्रियों का जीवन कभी भी संकट में पड़ सकता है. रेल मंत्रालय जहां यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के प्रति गंभीर है वहीं अधिकारियों की लापरवाही उसके रवैये पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं.

दूसरी तरफ भारतीय रलवे के एक अधिकारी का कहना है कि भारतीय रेल नेटवर्क की आकलन करने के लिए जापानी विशेषज्ञों का एक दल इस समय भारत के दौरे पर है.

यह यात्रा एक के बाद एक रेल हादसों की पृष्ठभूमि में हो रही है. जापानी विशेषज्ञ भारतीय रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों से मिल रहे हैं और स्थलों का दौरा कर रहे हैं. जापानी विशेषज्ञों का दल एक सितंबर तक भारत के कई शहरों का दौरा करेगी.

जापानी विशेषज्ञों की यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री शिन्जो आबे द्वारा अगले महीने भारत की पहली हाई स्पीड रेल नेटवर्क की आधारशिला रखने से पहले हो रही है.

suresh prabhu

 

एक साल में देश में 24 बड़ी रेल दुर्घटनाएं

हम आपको बता दें कि एक ओर जहां पिछले एक साल में देश में 24 बड़ी रेल दुर्घटनाएं हुई हैं. पिछले 11 दिनों में लगातार तीन रेल दुर्घटनाओं ने सरकार को नींद से जगा दिया है. वहीं दूसरी ओर अभी भी बुलेट ट्रेन और तेज रफ्तार की ट्रेनें चलाने की कवायद में कमी नहीं आई है.

भारतीय रेल इस समय 64 हजार किलोमीटर के ऑपरेशनल नेटवर्क पर दौड़ रही है. इसके निगरानी और मेनटेनेंस के लिए लोग काफी कम पड़ रहे हैं. भारतीय रेल दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है और फिलहाल उसके पास 13 लाख कर्मचारी हैं.

रेलवे की यह दुर्दशा आज की देन नहीं हैं. इस हालत के लिए कहीं न कहीं रेलवे की घिसी-पिटी पुरानी तकनीक और सिस्टम को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Test Ride: Royal Enfield की दमदार Thunderbird 500X

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi