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तमाम दावों के बावजूद बिगड़ रही है राजस्थान की कानून व्यवस्था

राजस्थान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है

Updated On: Sep 24, 2017 12:06 PM IST

Mahendra Saini
स्वतंत्र पत्रकार

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तमाम दावों के बावजूद बिगड़ रही है राजस्थान की कानून व्यवस्था

जोधपुर में राजस्थान हाइकोर्ट की खंडपीठ ने प्रशासन पर बहुत ही सख्त टिप्पणी की है. मामला जोधपुर के एक मर्डर केस से शुरू होकर कानून व्यवस्था, अफसरों के गैर जिम्मेदाराना रवैये और अदालत की अवमानना में होम सेक्रेटरी को चेतावनी भरे निर्देश तक जा पहुंचा.

दरअसल, जोधपुर में व्यापारी वासुदेव इसरानी का सरेआम मर्डर हो गया था. बाड़मेर में भी स्कूल के अंदर एक बच्ची के यौन शोषण का मामला गरमाया. पश्चिम राजस्थान में लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाओं के बाद हाइकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायाधीश विनीत माथुर की खंडपीठ ने होम सेक्रेटरी दीपक उप्रेती को तलब किया था.

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में बिजी होने का हवाला दे कर उप्रेती अदालत से गैर हाजिर रहे. इसे अदालत ने गंभीर अपराध माना और राजस्थान के दूसरे सबसे बड़े शहर जोधपुर की लगातार उपेक्षा पर सरकार से ये तक पूछा कि जोधपुर, राजस्थान का हिस्सा है या नहीं? कोर्ट ने यहां तक चेतावनी दी कि होम सेक्रेटरी पेश नहीं हुए तो गिरफ्तारी के आदेश भी दिए जा सकते हैं.

राजस्थान में राज मस्त, जन त्रस्त!

जोधपुर के सरदारपुरा में व्यापारी वासुदेव इसरानी की उस वक्त गोली मार कर हत्या कर दी गई जब वे अपना स्टोर बन्द कर रहे थे. हैरानी की बात ये है कि इसरानी पर 19 जून को भी फायरिंग हो चुकी थी. बार-बार वसूली की मांग और न देने पर हत्या की धमकी भी दी जा रही थी.

शिकायत पर पुलिस ने सुरक्षा के लिए दो गार्ड तैनात कर दिए थे. घटना वाले दिन इनमें से एक गार्ड, जिसके पास बंदूक थी, वो शाम 4.30 बजे चला गया. रात 9.30 बजे दूसरा गार्ड ये कहकर चला गया कि उसके पास गन नहीं है.

जानकारी के मुताबिक अजमेर जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई का गुर्गा हरेंद्र जाट इसरानी को धमकियां दे रहा था. हरेंद्र पर ही पंजाब के शूटर काली के साथ मिलकर हत्या करने का आरोप है.

यानी पुलिस को पहले से सब पता था. जिसकी हत्या होने वाली है, उसका भी और जो हत्या करने वाला है, उसका भी. इसके बावजूद हालात ये है कि सांप गुजर जाने के बाद केवल लकीर पीटी जा रही है.

जोधपुर पुलिस की गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद जनता का भारी विरोध भी दिखा है. लोग कमिश्नर अशोक राठौड़ के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. इसके बाद जांच स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) को सौंप दी गई है. जांच का नेतृत्व विशेष तौर पर तेजतर्रार IPS दिनेश एम एन कर रहे हैं.

दरअसल, पिछले कुछ अरसे से अकेले जोधपुर में फायरिंग की करीब आधा दर्जन वारदातें हो चुकी हैं. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर जोधपुर के साथ सौतेले व्यवहार का आरोप लगाते हुए कहा है कि अगर पहले चेत जाते तो शायद ये नौबत न आती.

केंद्रीय मंत्री और जोधपुर सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी पुलिस की खामी और कानून व्यवस्था की बदहाली स्वीकार की है. शेखावत ने कहा कि इस संबंध में वे सीधे मुख्यमंत्री से बात करेंगे.

आर्थिक तरक्की से कानून व्यवस्था बदहाल!

सवाल ये उठता है कि बेहद शांत समझे जाने वाले और छितरी आबादी वाले पश्चिम राजस्थान में अचानक आपराधिक घटनाएं क्यों बढ़ने लगी हैं. जानकर लोग इसका बड़ा कारण इस इलाके में तेजी से आ रही आर्थिक समृद्धि को भी बताते हैं.

अरावली के पश्चिम में जोधपुर, राजस्थान का सबसे बड़ा शहर है. राजस्थान के सबसे बड़े संभाग का मुख्यालय भी जोधपुर है. जोधपुर संभाग के बाड़मेर-जैसलमेर में देश के सबसे बड़े तेल और गैस के भंडार हैं. 2013 में बाड़मेर में 90 मिलियन टन की रिफाइनरी का शिलान्यास भी किया गया था, जिसे अब बीजेपी सरकार ने पुनर्जीवित कर दिया है.

इसके अलावा, जोधपुर, बाड़मेर और जैसलमेर में सौर ऊर्जा के प्लांट लगाने के लिए दर्जनों कंपनियां भी इलाके में आ चुकी हैं. रिसर्जेन्ट राजस्थान-2015 में 1.90 लाख करोड़ के एमओयू तो सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र के लिए ही किए गए थे.

1998-2003 और 2008-2013 के दौरान 2 बार मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत (वे जोधपुर से ही हैं) के कार्यकालों में भी इस शहर ने खास तौर पर तरक्की की है. गहलोत के प्रयासों से ही एम्स और निफ्ड जैसी उच्चस्तरीय संस्थाएं भी जोधपुर की पहचान बनी हैं.

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फलाहारी बाबा को गिरफ्तार करने में पुलिस को तीन दिन लग गए

जाहिर है, इन सबने पश्चिमी राजस्थान और खासकर जोधपुर में आर्थिक खुशहाली को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है. पहले सैकड़ों एकड़ के मालिक होने के बावजूद बंजर जमीन के कारण लोग पलायन को मजबूर थे. लेकिन अब बाहर से लोग यहां आ रहे हैं. इससे जमीनों के दाम भी एकाएक बढ़े हैं.

पुलिस का कहना है कि बाहरी, खासकर मजदूर के रूप में उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों का आना और स्थानीय लोगों के पास एकाएक पैसा बढ़ना भी क्राइम ग्राफ बढ़ने का एक कारण है. मनोविज्ञानी भी अपराध को शहरीकरण का एक साइड इफ़ेक्ट मानते रहे हैं.

देर होने से पहले जागना तो पड़ेगा

ऐसा माना जा सकता है लेकिन जोधपुर पुलिस इसकी आड़ में अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती. अगर शहरीकरण लॉ एंड आर्डर की बदहाली का एक कारण है तो पुलिस को भी अपनी रणनीति इसके अनुसार बनानी चाहिए. आखिर मुम्बई की तर्ज पर राज्य के दोनों बड़े शहरों में कमिशनरी सिस्टम भी इसीलिए शुरू किया गया था.

सच्चाई ये है कि कमिशनरी सिस्टम ही नहीं राजस्थान पुलिस की पूरी कार्यप्रणाली ही सवालों के घेरे में है. पश्चिम में ही नहीं, पूर्वी राजस्थान में भी कानून व्यवस्था राम भरोसे ही नजर आती है. अलवर में फलाहारी बाबा पर यौन शोषण की शिकायत के बावजूद पुलिस ने उसको गिरफ्तार करने में 3 दिन लगा दिए. पीड़ित की शिकायत के बाद भी कथित बाबा एक निजी अस्पताल में इलाज के नाम पर छुपा रहा.

उंगलिया अब सीधे नेतृत्व की कार्यशैली पर भी उठ रही हैं. पुलिस के मुखिया के तौर पर गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया तो अपनी जिम्मेदारी से बच ही नहीं सकते. खुद बीजेपी को भी अगले साल विधानसभा चुनाव में लॉ एंड आर्डर के मुद्दे पर जवाब देना होगा. बेहतर होगा, जिम्मेदार लोग जाग जाएं, इससे पहले कि देर हो जाए.

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