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बीएचयू में छात्राओं के मोबाइल और वाईफाई पर है रोक: प्रशांत भूषण

प्रशांत भूषण ने बताया कि इन नियमों के अनुसार हॉस्टल की लड़कियों को रात आठ बजे के बाद परिसर से बाहर जाने की इजाजत नहीं है.

Bhasha Updated On: Jan 05, 2018 11:19 AM IST

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बीएचयू में छात्राओं के मोबाइल और वाईफाई पर है रोक: प्रशांत भूषण

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के अधिकारियों से विद्यार्थियों के ज्ञापन पर विचार करने को कहा है. ज्ञापन में छात्रों ने बीएचयू में छात्राओं से हो रहे ‘लैंगिक भेदभाव के नियमों’ पर सवाल उठाया है.

शीर्ष न्यायालय ने नियमों को चुनौती देने वाले विद्यार्थियों को ज्ञापन के जरिए विश्वविद्यालय अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायतें उठाने को भी कहा.

न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति एमएम संतनगौदार की सदस्यता वाली पीठ ने छात्रों द्वारा किए गए किसी भी गलत आचरण के बारे में अपना जवाब दाखिल करने के लिए विश्वविद्यालय को स्वतंत्रता दी है.

इससे पहले, बीएचयू के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता प्रदर्शन में शामिल थे और उनके खिलाफ एक एफआईआर भी दर्ज है. छात्र विकास सिंह और अन्य की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि बीएचयू में लैंगिक भेदभाव के ऐसे कई नियम कायदे हैं जिन्हें बीएचयू के वूमेंस हॉस्टल ने ही बनाया है.

नहीं है रात में मोबाइल पर बात करने की इजाजत

प्रशांत भूषण ने बताया कि इन नियमों के अनुसार हॉस्टल की लड़कियों को रात आठ बजे के बाद परिसर से बाहर जाने की इजाजत नहीं है. उन्होंने दावा किया कि लड़कियां रात 10 बजे के बाद मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं कर सकती. अगर उन्हें इस्तेमाल करना है तो मोबाइल को स्पीकर मोड में रखना पड़ता है. उन्हें हॉस्टल और मैस में छोटे कपड़े पहनने की भी इजाजत नहीं है.

हॉस्टल के कमरों में वाईफाई पर भी रोक

भूषण ने कहा कि लड़कियों को अपने हॉस्टल के कमरों में वाईफाई और इंटरनेट के इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी जाती, जबकि पुरूष छात्रों को ऐसी सुविधाओं की इजाजत है.

उन्होंने कहा कि यदि कोई लड़की रात में होस्टल से शहर के बाहर जा या आ रही हो तो नियमों के चलते उसे इसकी इजाजत नहीं है. ये क्रूर और पुरातनपंथी नियम हैं. पीठ ने कहा कि छात्रों को अपनी शिकायतों के बारे में विश्वविद्यालय अधिकारियों को एक ज्ञापन देना चाहिए और वह इस पर गौर करेगा.

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