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पेंशन के लिए स्वतंत्रता सेनानी को हुई परेशानी पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

न्यायमूर्ति ने कहा 'पेंशन कोई खैरात नहीं है बल्कि यह नि:स्वार्थ स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में दी जाती है'

Updated On: Jan 26, 2018 08:40 PM IST

FP Staff

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पेंशन के लिए स्वतंत्रता सेनानी को हुई परेशानी पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

मद्रास हाईकोर्ट ने आजाद हिंद फौज के सदस्य रहे 89 वर्षीय बुजुर्ग को नौकरशाहों की हठधर्मिता की वजह से पिछले चार दशक से स्वतंत्रता सेनानी पेंशन के लिए संघर्ष करने पर खेद व्यक्त किया. अदालत ने तमिलनाडु सरकार को दो हफ्ते के अंदर इसे मंजूरी देने को कहा.

साल 1980 में पेंशन के लिए आवेदन करने वाले के. गांधी ने 37 साल के इंतजार के बाद याचिका दायर की. उनकी याचिका को मंजूर करते हुए न्यायमूर्ति के रविचंद्र बाबू ने कहा कि पेंशन कोई खैरात नहीं है बल्कि यह नि:स्वार्थ स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में दी जाती है और राज्य को इस बात का इंतजार नहीं करना चाहिए कि इसके लिए वे आवेदन करें.

न्यायाधीश ने अपने हालिया आदेश में कहा, 'हमें खेद है श्रीमान, आपको हमारे लोगों के हाथों भी परेशान होना पड़ा. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस की स्वतंत्रता के लिए आपने संघर्ष किया, वहां कई बार हठधर्मी नौकरशाही ऐसे ही जड़त्ववादी रवैये से काम करती है.'

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